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siwan news. 15 साल पहले सीएम ने की थी पर्यटक स्थल बनाने की घोषण, अब तक प्रथम राष्ट्रपति के आवास का कायाकल्प नहीं

Updated at : 02 Dec 2025 10:35 PM (IST)
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siwan news. 15 साल पहले सीएम ने की थी पर्यटक स्थल बनाने की घोषण, अब तक प्रथम राष्ट्रपति के आवास का कायाकल्प नहीं

देश के प्रथम राष्ट्रपति देशरत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद की 141वीं जयंती आज को मनायी जायेगी

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जीरादेई. देश के प्रथम राष्ट्रपति देशरत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद की 141वीं जयंती आज को मनायी जायेगी. जयंती समारोह के लिए उनके पैतृक आवास पर जोर-शोर से तैयारी चल रही है. समारोह में राजनीतिक हस्तियां व प्रशासनिक अधिकारी प्रतिमा पर माल्यार्पण करने पहुंचेंगे. देश के पहले राष्ट्रपति का जन्म सन 1884 में इसी धरती पर हुआ था. बावजूद इसके आजादी के 77 साल गुजर जाने के बाद भी इस गांव की दशा और दिशा में कोई भी खास परिवर्तन नहीं हुआ है. पुरातात्विक विभाग से नियंत्रित गणतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद का पैतृक आवास सरकारी उपेक्षा का शिकार है. आलम यह है कि देशरत्न की आलीशान इमारत अपने अतीत को याद कर आंसू बहा रही है. देशरत्न की पहली सांसों का गवाह जीरादेई स्थित यह भवन विकास की रौशनी की बाट खोज रहा है. 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसे पर्यटक स्थल बनाने की घोषणा की थी, बावजूद इसके इस आलीशान इमारत का कायाकल्प नहीं हो सका.

पधार चुकी हैं महान विभूतियां

आवास में दर्ज शिलालेख से यह ज्ञात होता है. यह स्थान देश के महान विभूतियों के आगमन का गवाह रहा है. स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस भवन में महात्मा गांधी, विनोबा भावे, सरदार वल्लभ भाई पटेल, सरोजनी नायडू, लोकनायक जयप्रकाश नारायण आदि अनेक विभूतियाें का आगमन हो चुका है. बरामदे में रखी चारपाई उनके विश्राम के काम आती थी. यही पर इन लोगों ने स्वतंत्रता आंदोलन के अनेक सपने देखे थे. देश आजाद हो गया, लेकिन यह स्थल आज भी वह स्थान प्राप्त नहीं कर सका जिसका वाजिब हक दार है. भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन आने पर भी भवन में चमक नहीं आ पाई. यह विभाग के उदासीनता के परिचायक प्रतीत होता है .देशरत्न के पैतृक संपत्ति के प्रबंधक रामेश्वर सिंह ने बताया कि बाबू का आवास रात भर अंधेरे में रहता है.

जिस घर में जन्म लिया, वह जर्जर

राजेन्द्र बाबू का जिस घर मे जन्म हुआ ,वह रखरखाव के अभाव में जर्जर हो गया है. इसका खपरैल असोरा टूट रहा है. बच्चा बाबू ने बताया कि सदियों से बाबू के घर में दीप जलता था तथा भवन के आंगन में स्थित तुलसी माता के पौधा का पूजा अर्चना होता था .यह शिलशिला अनवरत चलता रहा. बाबू का परिवार वैष्णव धर्म का उपासक है.ज्योहीं भारतीय पुरातत्व विभाग अपने अधीन ली ,तबसे दीप ,पूजा पाठ सबकुछ खत्म हो गया .साथ ही कुलदेवी का पूजा भी बंद हो गया.समाजसेवी व ग्रामीण लालबाबू प्रसाद ने बताया कि कहने को तो पांच कर्मचारी नियुक्त है. पर कोई रात को नहीं रहता और न ही विजिटर रजिस्टर है. कुछ राजनीतिक व सामाजिक कार्यकर्ता आकर लम्बी -लम्बी घोषणाएं कर जाते है.लेकिन उस घोषणा का धरातल पर कोई प्रभाव नही है.

शौचालय के अभाव में शर्मसार होती हैं महिलाएं

जीरादेई को पर्यटक स्थल का दर्जा मिला है. लोग इस महान विभूति को नमन करने के लिए सुदूर स्थानों से आते हैं. पर्यटकों में आधी आबादी की संख्या अधिक होती है. लेकिन, शौचालय के अभाव में उन्हें शर्मसार होना पड़ता है. एक ओर जहां केंद्र सरकार व राज्य सरकार द्वारा हर घर शौचालय अभियान की मुहिम चलाया जा रहा है. वहीं, दूसरी ओर बाबू के पैतृक आवास पर एक अदद सार्वजनिक शौचालय नही है, जो चिंतनीय व निंदनीय है.

उच्च शिक्षा से वंचित है क्षेत्र की आधी आबादी

डा.राजेन्द्र प्रसाद की धरती पर आधी आबादी सरकारी उपेक्षा का शिकार हो रही है. चुनाव के वक्त हर दल लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा की व्यवस्था के लिए आश्वासन देते है.चुनाव जीतने के बाद यह मुद्दा उनके एजेंडे से गायब हो जाते है.देशरत्न के नाम से विख्यात राजेन्द्र बाबू ने खुद तो उच्च शिक्षा ग्रहण कर देश का नाम रोशन किया. लेकिन बाबू की जन्म धरती पर उनके देखे हुए सपने साकार नहीं हुए.आलम यह है कि आज राजेन्द्र बाबू के क्षेत्र आधी आबादी उच्च शिक्षा से वंचित हो रही हैं. देशरत्न डा. राजेन्द्र प्रसाद के पैतृक क्षेत्र में एक भी कालेज नहीं जहां स्नातक व स्नातकोत्तर की पढ़ाई होती हो. जो हाई स्कूल है उसे उत्क्रमित कर इंटर तक किया गया है. उसमें भी सभी विषयों की पढ़ाई शिक्षक के अभाव में नहीं होती. केवल खानापूर्ति के लिए उत्क्रमित कर दिया गया है.

इस इलाके में हालात यह है कि लड़कियां 10 किलोमीटर की दूरी तय करके कालेजों में पढ़ने जाती हैं. ऐसे में ज्यादातर लड़कियां तो प्लस टू या इससे आगे की कक्षाओं में पढ़ाई करने से वंचित रह जाती हैं. उच्च शिक्षा से वंचित लड़कियों को शादी के लिए मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है. इनके माता-पिता परेशान होते हैं.आज भी यहां के विद्यार्थी उच्च शिक्षा से वंचित होने का दंश झेल रहे हैं.उच्च शिक्षा के लिए छात्र-छात्राओं को 10 से 15 किलोमीटर की दूरी तय कर जिला मुख्यालय जाना पड़ता है. प्रखंड के 16 पंचायतों में प्राथमिक, मध्य एवं उच्च विद्यालय मिलाकर 111 विद्यालय है. पूरे प्रखंड की आबादी लगभग दो लाख से अधिक है. जीरादेई गांव में एक वित्तरहित डिग्री कालेज देशरत्न डा. राजेन्द्र प्रसाद के नाम पर है, परंतु इसकी स्थिति उतनी अच्छी नहीं है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Shashi Kant Kumar

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By Shashi Kant Kumar

Shashi Kant Kumar is a contributor at Prabhat Khabar.

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