संवाददाता, सीवान. नगर परिषद सीवान में करोड़ों रुपये के सरकारी राशि के फर्जीवाड़े से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है. पूर्व कार्यपालक पदाधिकारी के निलंबन के बाद फर्जी हस्ताक्षर कर 61 जाली वर्क ऑर्डर जारी किए जाने के मामले में जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय के आदेश पर जूनियर इंजीनियर सहित तीन कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. सोमवार की संध्या सिटी मैनेजर बालेश्वर राय ने महादेवा ओपी थाना में आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया है. इस कार्रवाई के बाद पूरे नगर परिषद कार्यालय में हड़कंप मच गया है और दिन भर शहर में इस मामले की चर्चा होती रही. जानकारी के अनुसार तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी अनुभूति श्रीवास्तव के कार्यकाल में कुल 76 विकास योजनाओं के वर्क ऑर्डर जारी किए गए थे. बाद में अगस्त माह में आय से अधिक संपत्ति के मामले में कार्रवाई के बाद नगर विकास एवं आवास विभाग ने उन्हें अक्टूबर में निलंबित कर दिया था. निलंबन के बाद मामला और गंभीर तब हो गया, जब 30 दिसंबर 2025 को पूर्व इओ ने जिलाधिकारी को आवेदन देकर आरोप लगाया कि उनके फर्जी हस्ताक्षर कर बड़ी संख्या में वर्क ऑर्डर निर्गत किए गए हैं.पूर्व इओ द्वारा दिए गए आवेदन में उल्लेख किया गया था कि 4 अक्टूबर 2025 को नगर परिषद के तीनों कनीय अभियंताओं को 10 से 15 विभागीय योजनाओं के कार्यादेश कार्यालय कर्मियों द्वारा संचिका प्रस्तुत किए जाने के बाद उनके द्वारा हस्ताक्षरित किए गए थे. इसके अतिरिक्त यदि कोई अन्य कार्यादेश निर्गत पंजी में दर्ज है, तो वह या तो उनके द्वारा हस्ताक्षरित नहीं है अथवा उसमें उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं.उन्होंने इस पूरे मामले की जांच कराने और शेष कार्यादेशों को निरस्त करने की मांग की थी.पूर्व इओ के इसी आवेदन को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने पूरे मामले की जांच के बाद प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश दिया. इसके तहत जूनियर इंजीनियर ओमप्रकाश सुमन, पूर्व कार्यपालक सहायक रंजीत कुमार शर्मा तथा योजना सहायक विजय कुमार पासवान के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है.बताया जा रहा है कि इन सभी की भूमिका जाली वर्क ऑर्डर निर्गत करने और वित्तीय गड़बड़ी में संदिग्ध पाई गई है.नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी डॉ. विपिन कुमार ने बताया कि जिलाधिकारी के आदेश के आलोक में तीन कर्मियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई जा रही है.इसके लिए सिटी मैनेजर द्वारा महादेवा ओपी थाना में आवेदन दिया गया है. उन्होंने कहा कि मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. 76 कार्यादेश से संबंधित संचिकाओं की बरामदगी के लिए हुई थी छापेमारी – नगर परिषद सीवान में 76 कार्यादेश जारी करने के मामले में जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने गंभीर रुख अपनाते हुए पहले ही नगर विकास एवं आवास विभाग, को पत्र लिखकर सभी कार्यादेशों को रद्द करने का आग्रह किया था. यह पत्र तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी के आवेदन प्राप्त होने के बाद भेजा गया था. डीएम द्वारा प्रेषित पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि नगर विकास एवं आवास विभाग की अधिसूचना संख्या-3608, दिनांक 04 अक्टूबर 2025 के तहत अनुभूति श्रीवास्तव को उसी दिन से निलंबित कर दिया गया था. चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि निलंबन की तिथि को ही अनुभूति श्रीवास्तव द्वारा नगर परिषद सीवान में 76 अलग-अलग विभागीय योजनाओं के कार्यान्वयन हेतु कार्यादेश निर्गत कर दिए गए थे.जिला प्रशासन का मानना है कि एक ही दिन में इतनी बड़ी संख्या में कार्यादेश जारी किया जाना संदेह के घेरे में है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है. प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई गई है कि उक्त सभी कार्यादेश बैक डेटेड प्रक्रिया के तहत जारी किए गए हो सकते हैं. जिला प्रशासन के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में नगर परिषद के कुछ कर्मियों की मिलीभगत से वित्तीय अनियमितता और सरकारी राशि के दुरुपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इसी को देखते हुए जिलाधिकारी ने स्वयं कई बार नगर परिषद कार्यालय पहुंचकर संबंधित अभिलेखों की जांच की और अधिकारियों से पूछताछ भी की.मामले की गंभीरता को देखते हुए 30 दिसंबर 2025 को जिलाधिकारी के आदेश पर 76 कार्यादेश से संबंधित संचिकाओं की बरामदगी के लिए छापेमारी की गई थी . यह छापेमारी शहर के रामदेव नगर मुहल्ला स्थित नगर परिषद के नियर इंजीनियर ओमप्रकाश सुमन तथा पूर्व कार्यपालक सहायक रंजीत कुमार शर्मा के आवास पर की गई. छापेमारी के दौरान एक लैपटॉप सहित कई महत्वपूर्ण कागजात बरामद किए गए थे.जिन्हें जांच के लिए जब्त कर लिया गया था.
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