सदर अस्पताल में मरीजों के आते ही टूट पड़ते है एंबुलेंस चालक

Published by : DEEPAK MISHRA Updated At : 19 Jul 2025 9:52 PM

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सदर अस्पताल में इन दिनों निजी एंबुलेंस चालकों और दलालों की दादागिरी चरम पर है. ग्रामीण क्षेत्रों से रेफर होकर आने वाले मरीजों को बिना इलाज या उचित रेफरल के निजी अस्पतालों में भेजने का गंभीर खेल चल रहा है. अस्पताल प्रशासन ने परिसर में मरीजों के परिजनों को दलालों से सावधान रहने के लिए होर्डिंग्स लगाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी करने का दावा किया है

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प्रतिनिधि,सीवान. सदर अस्पताल में इन दिनों निजी एंबुलेंस चालकों और दलालों की दादागिरी चरम पर है. ग्रामीण क्षेत्रों से रेफर होकर आने वाले मरीजों को बिना इलाज या उचित रेफरल के निजी अस्पतालों में भेजने का गंभीर खेल चल रहा है. अस्पताल प्रशासन ने परिसर में मरीजों के परिजनों को दलालों से सावधान रहने के लिए होर्डिंग्स लगाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी करने का दावा किया है, लेकिन यह उपाय नाकारा साबित हो रहा है. गोलीबारी की घटना ने उजागर की गंभीरता शुक्रवार की रात में सदर अस्पताल के मुख्य गेट पर रात लगभग सावा ग्यारह बजे एक निजी एंबुलेंस संचालक प्रदीप कुमार पर गोलीबारी की घटना ने इस समस्या की गंभीरता को उजागर किया. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यह गोलीबारी दो एंबुलेंस चालक समूहों के बीच मरीजों के रेफरल को लेकर हुए विवाद का परिणाम है. जब डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी इस प्रथा का विरोध करते हैं, तो उन्हें भी धमकियां मिलती हैं, जिससे अस्पताल में कार्यरत कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है. संगठित गैंग का खेल अस्पताल कर्मचारियों के अनुसार, सदर अस्पताल में निजी एंबुलेंस चालकों का एक संगठित गैंग सक्रिय है, जो मरीजों को सीवान, पटना और गोरखपुर के निजी अस्पतालों में भेजकर मोटी रकम कमाता है. यह गैंग 24 घंटे अस्पताल परिसर में मौजूद रहता है और मरीजों के परिजनों को बेहतर इलाज का लालच देकर निजी अस्पतालों में ले जाता है. इस प्रक्रिया में कुछ अनधिकृत स्वास्थ्यकर्मी,कुछ सफेदपोश और सरकारी कर्मचारी भी बिचौलिए की भूमिका निभाते हैं. निजी अस्पतालों का जाल शहर के आधा दर्जन से अधिक निजी अस्पतालों के लिए काम करने वाले दलाल सदर अस्पताल में सक्रिय हैं. ये दलाल, विशेष रूप से पटना और गोरखपुर के निजी अस्पतालों के लिए, मरीजों को कम किराए में ले जाने का वादा करते हैं. पीएमसीएच रेफर मरीजों को भी ये चालक सस्ती सेवा का लालच देकर निजी अस्पतालों में ले जाते हैं.रास्ते में परिजनों को निजी अस्पतालों में बेहतर सुविधाओं का भरोसा दिलाया जाता है, लेकिन इलाज के दौरान भारी-भरकम बिल की मांग होने पर परिजनों को ठगी का अहसास होता है. क्या कहते हैं जिम्मेदार सुरक्षाकर्मियों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को सख्त निर्देश दिया गया है कि निजी एंबुलेंस चालकों को अस्पताल परिसर में प्रवेश नहीं होना चाहिए.अगर कोई एंबुलेंस चालक अंदर प्रवेश करता है तो उसे पकड़ कर पुलिस को सौंपा जाएगा.वैसे इस संबंध में अस्पताल परिसर में सूचना चिपका दिया गया है. डॉ अनिल कुमार सिंह,अधीक्षक,सदर अस्पताल

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