जमुई में ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में जमुई में बंद रहीं मेडिकल दुकानें, एआई प्रिस्क्रिप्शन और नकली दवा पर बढ़ी चिंता
Published by : Pratyush Prashant Updated At : 20 May 2026 9:01 AM
ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में जमुई में बंद रहीं मेडिकल दुकानें
Jamui News: ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ देशभर में केमिस्टों की हड़ताल, नकली दवा और नशे के खतरे को लेकर बढ़ी चिंता
Jamui News : जमुई से अर्जुन अरनव की रिपोर्ट — ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में बुधवार से जमुई समेत पूरे देश में दवा दुकानदारों की एक दिवसीय हड़ताल शुरू हो गई. ऑल इंडिया केमिस्ट एसोसिएशन और बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर जिले की सभी दवा दुकानें बंद रहीं. दवा व्यवसायियों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भारी छूट, नकली दवाओं की बढ़ती आशंका और एआई जनरेटेड प्रिस्क्रिप्शन के जरिए नशीली दवाओं की आसान उपलब्धता को लेकर गंभीर चिंता जताई है.
दवा दुकानदारों ने क्यों बंद की दुकानें?
जमुई केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज कुमार सिंह और सचिव ब्रजेश कुमार सक्सेना ने बताया कि ऑनलाइन दवा कंपनियां भारी डिस्काउंट देकर पारंपरिक दवा कारोबार को प्रभावित कर रही हैं. उनका कहना है कि सामान्य व्यापारिक मार्जिन में इतनी बड़ी छूट देना संभव नहीं है, जिससे नकली दवाओं के कारोबार को बढ़ावा मिलने का खतरा बढ़ गया है.
व्यवसायियों का आरोप है कि ऑनलाइन कंपनियों की अनियंत्रित बिक्री से छोटे दवा दुकानदारों का कारोबार प्रभावित हो रहा है और मरीजों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है.
AI Prescription को लेकर बढ़ी चिंता
दवा व्यवसायियों ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर एआई जनरेटेड प्रिस्क्रिप्शन के जरिए कई प्रकार की दवाएं आसानी से खरीदी जा रही हैं. खासकर नशीली दवाओं तक युवाओं की पहुंच आसान हो गई है, जो समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है.
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में नकली दवाओं के मामले तेजी से बढ़े हैं और यदि समय रहते सख्त नियम लागू नहीं किए गए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है.
सरकार से सख्त नियम बनाने की मांग
केमिस्ट एसोसिएशन ने केंद्र और राज्य सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री पर कड़े नियम लागू करने की मांग की है. व्यवसायियों का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर लंबे समय से सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया जा रहा है, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
इसी कारण देशव्यापी बंद का फैसला लिया गया ताकि सरकार इस गंभीर विषय पर तत्काल कदम उठाए. दवा कारोबारियों ने चेतावनी दी कि यदि ऑनलाइन बिक्री को नियंत्रित नहीं किया गया तो आने वाले समय में मरीजों की सुरक्षा और पारंपरिक दवा व्यवसाय दोनों पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है.
मरीजों को हुई परेशानी
हड़ताल के कारण बुधवार को कई मरीजों को दवा खरीदने में परेशानी का सामना करना पड़ा. हालांकि इमरजेंसी सेवाओं के लिए कुछ मेडिकल स्टोर आंशिक रूप से खुले रहे.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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