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शहाबुद्दीन का आरोप, बिहार सरकार जान से मारने की साजिश रच रही है

Updated at : 28 Jun 2016 4:47 PM (IST)
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शहाबुद्दीन का आरोप, बिहार सरकार जान से मारने की साजिश रच रही है

सीवान : जेल में बंद पूर्व सांसद मो.शहाबुद्दीन ने मंगलवार को यहां एडीजे चार सह विशेष अदालत में अर्जी देकर राज्य सरकार से अपने जान माल के खतरे की चिंता जताते हुए रक्षा की गुहार लगायी है. कोर्ट ने इस संबंध में राज्य सरकार से जवाब-तलब किया है और मामले में सुनवाई की अगली तिथि […]

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सीवान : जेल में बंद पूर्व सांसद मो.शहाबुद्दीन ने मंगलवार को यहां एडीजे चार सह विशेष अदालत में अर्जी देकर राज्य सरकार से अपने जान माल के खतरे की चिंता जताते हुए रक्षा की गुहार लगायी है. कोर्ट ने इस संबंध में राज्य सरकार से जवाब-तलब किया है और मामले में सुनवाई की अगली तिथि 14 जुलाई को निर्धारित की है. एडीजे चार सह विशेष अदालत के न्यायाधीश अजय कुमार श्रीवास्तव के कोर्ट में पूर्व सांसद कीओर से अधिवक्ता अभय कुमार राजन ने यह अर्जी दी. अर्जी में कहा गया है कि हमें राज्य सरकार से खतरा है. सरकार के हाथ में शहाबुद्दीन का जीवन सुरक्षित नहीं है.

जेल में हुई थी हत्या की कोशिश-शहाबुद्दीन

अधिवक्ता द्वारा शहाबुद्दीन की ओर से पेश की गयी अर्जी के मुताबिक जेल में रहने के दौरान ही मो.शहाबुद्दीन की वर्ष 2006 में राज्य सरकार के इशारे पर हत्या करने की कोशिश की गयी. एसडीपीओ सुधीर कुमार के हमले से शहाबुद्दीन के रीढ़ की हड्डी खिसक गयी. जिसका एम्स में ऑपरेशन कराया गया. चिकित्सकों की टीम ने जांच के दौरान इसकी पुष्टि की थी. राज्य सरकार जेल प्रशासन से मिलकर उन्हें ठिकाने लगाने की साजिश रचती रही है, लेकिन न्यायालय के हस्तक्षेप से ऐसा नहीं हो सका. आवेदन में कहा गया है कि वर्तमान राज्य सरकार सत्ता में आते ही विद्या कमीशन को भंग कर दी. यह कमीशन ही प्रताप पुर गोलीकांड में आठ ग्रामीणों के हत्या के मामले की जांच कर रही थी. इस कांड में पुलिस विद्रोह के मामले में तत्कालीन डीआइजी व डीएम ने कोर्ट में रिटयाचिका दायर किया था. लेकिन सरकार ने लोक अदालत के माध्यम से सुलह कर मामले को निष्पादित करा दिया,जो कानून सम्मत नहीं है.

राज्य सरकार पर साजिश का आरोप

आवेदन में कहा गया है कि अल्पसंख्यक समुदाय से होने तथा उसका नेता होने के चलते सरकार प्रताड़ित करना चाहती है.फर्जी मुकदमे में फंसाने और मारने की साजिश रची जा रही है.कोर्ट के आदेश के बिना ही मंडल कारा से भागलपुर जेल में स्थानांतरित कर दिया गया. यह उच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन है. अर्जी में कहा गया है कि शहाबुद्दीन के स्पाइनल में दर्द की जांच को लेकर राज्य सरकारद्वारा गठित मेडिकल टीम पर भरोसा नहीं है. बेहतर इलाज के लिए विशेष अस्पताल में भेजा जाय. इस आवेदन पर राज्य सरकार के प्रतिनिधि के रूप में अपर लोक अभियोजक को 14 जुलाई को जवाब प्रस्तुत करने का कोर्ट ने निर्देश दिया है.

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