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105 वर्षीय लोकगायक जंगबहादुर सिंह हुए सम्मानित

Updated at : 28 Feb 2026 10:09 PM (IST)
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105 वर्षीय लोकगायक जंगबहादुर सिंह हुए सम्मानित

शनिवार को देशरत्न डॉ राजेन्द्र प्रसाद के पुण्य तिथि पर मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति पृथ्वी राज सिंह रूपन ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किया. इस दौरान पूर्व राष्ट्रपति ने 105 वर्षीय लोकगायक जंग बहादुर सिंह को ‘सन ऑफ सीवान, प्राइड ऑफ बिहार’ सम्मान से अलंकृत किया.साथ ही 108 फुट का तिरंगा झंडा राजेंद्र उद्यान में फहराया.

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प्रतिनिधि,जीरादेई. शनिवार को देशरत्न डॉ राजेन्द्र प्रसाद के पुण्य तिथि पर मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति पृथ्वी राज सिंह रूपन ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किया. इस दौरान पूर्व राष्ट्रपति ने 105 वर्षीय लोकगायक जंग बहादुर सिंह को ‘सन ऑफ सीवान, प्राइड ऑफ बिहार’ सम्मान से अलंकृत किया.साथ ही 108 फुट का तिरंगा झंडा राजेंद्र उद्यान में फहराया. उन्होंने कहा कि जीरादेई की धरती को नमन कर मुझे काफी प्रसन्नता हुई. मेरे ही पूर्वज मॉरीशस में पहुंचे जो गया जिले से थे. भारत के साथ हमारा रिश्ता था है और रहेगा. बिहार हमारे परिवार का हिस्सा है. हमलोग भारतीय त्योहार को भी मनाते है. हमारी भोजपुरी भाषा भी यहां जीवित है. कार्यक्रम का संचालन शिक्षक मनोरंजन कुमार सिंह ने किया. लोक गायक को सम्मानित किये जाने पर बिहारी कनेक्ट के अध्यक्ष डॉ. उदेश्वर सिंह ने कहा कि जंग बहादुर सिंह जैसी विभूति को सम्मानित करना पूरे समाज के लिए गौरव का विषय है. उन्होंने कहा कि यह सम्मान न केवल एक कलाकार का अभिनंदन है, बल्कि भोजपुरी लोकधारा और स्वतंत्रता संग्राम की सांस्कृतिक विरासत का भी सम्मान है. 10 दिसंबर 1920 को रघुनाथपुर प्रखंड स्थित कौसड़ गांव में जन्मे जंग बहादुर सिंह ने युवावस्था से ही देशभक्ति को अपने गायन का स्वर बनाया. 1942 से 1947 के स्वतंत्रता आंदोलन केदौर में वे गांव-गांव घूमकर अपने देशभक्ति गीतों के जरिये आजादी का अलख जगाते रहे, जिसकी वजह से ब्रिटिश शासन की प्रताड़ना झेली, जेल भी गए, किंतु उनके स्वर का जोश कभी मद्धिम नहीं पड़ा.पं. बंगाल के आसनसोल स्थित सेनरेले साइकिल कारखाने में कार्यरत रहते हुए उन्होंने भोजपुरी की व्यास शैली में गायन कर झरिया, धनबाद, दुर्गापुर, संबलपुर और रांची सहित देश के कई हिस्सों में अपनी अद्वितीय पहचान बनाई. वे रामायण, भैरवी और देशभक्ति गीतों के वे अप्रतिम साधक थे और वैसे ही उनके कद्रदान भी रहे. साठ के दशक में उनका नाम भोजपुरी जगत में शीर्ष पर रहा और लगभग दो दशकों तक उन्होंने बंगाल, झारखंड और उत्तर प्रदेश में अपने गायन से बिहार का मान बढ़ाया.वे केवल गायक ही नहीं, कुश्ती के क्षेत्र में भी दक्ष पहलवान रहे. कोयलांचल की धरती पर उन्होंने अनेक दंगलों में विजय पताका लहराया. मौके पर पूर्व राष्ट्रपति की पत्नी रूपन, सांसद विजय लक्ष्मी देवी, महाधिवक्ता पीके शाही, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी, विधायक भीष्म प्रताप सिंह कुशवाहा, पूर्व विधायक रमेश सिंह कुशवाहा, संत उमाकांता महाराज, चंद्रभूषण राय, जिला पदाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय, एसपी पुरन कुमार झा सहित अन्य लोग उपस्थित थे.

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