सड़क पर बिखरा खून, मची थी चीख-पुकार
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :16 Apr 2017 12:56 AM (IST)
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हादसा. एनएच-77 पर गिट्टी लदे ट्रक से टकराया कैदी वाहन सीतामढ़ी/रून्नीसैदपुर : सीतामढ़ी-मुजफ्फरपुर एनएच 77 के गयघट पुल के पास तेज रफ्तार कैदी वैन के गिट्टी लदे ट्रक से टकराने के कारण हुए भीषण हादसे में सात पुलिसकर्मी समेत आठ लोगों की दर्दनाक मौत हो गयी. जबकि इस हादसे में जख्मी सात पुलिसकर्मी समेत आठ […]
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हादसा. एनएच-77 पर गिट्टी लदे ट्रक से टकराया कैदी वाहन
सीतामढ़ी/रून्नीसैदपुर : सीतामढ़ी-मुजफ्फरपुर एनएच 77 के गयघट पुल के पास तेज रफ्तार कैदी वैन के गिट्टी लदे ट्रक से टकराने के कारण हुए भीषण हादसे में सात पुलिसकर्मी समेत आठ लोगों की दर्दनाक मौत हो गयी. जबकि इस हादसे में जख्मी सात पुलिसकर्मी समेत आठ लोगों का इलाज मुजफ्फरपुर में जारी है. जिले के इतिहास में यह पहला हादसा है जब एक साथ सात पुलिसकर्मियों की जान अकाल हीं काल के गाल में समा गयी है. मौत भी ऐसी कि देखते हीं देखते पुलिसकर्मियों के खून से घटनास्थल की धरती लाल हो गयी. घटनास्थल पर पहुंचने वालों में कमजोर दिल इनसान का शरीर पुलिसकर्मियों के खून व मांस के लोथरे देख कर सिहर रहा था.
आरक्षी केंद्र व रून्नीसैदपुर थाना से आनेवाले पुलिसकर्मियों के आंखें अपने साथियों के भयानक मौत को देख कर नम हो रही थी. किसी तरह अपने आप पर काबू कर बचाव कार्य में जुटे रहें. घटना के बाद जहां जिले के पुलिसकर्मी सदमे में है. स्थानीय पुलिस व आम जनता ने सड़क से गुजर रहे वाहनों को रोक कर उसमें घायलों को लाद कर जैसे-तैसे मुजफ्फरपुर भेजा. पूरे दिन आरक्षी केंद्र सीमरा में सन्नाटा पसरा रहा. वहीं एसपी समेत कई पुलिस अधिकारी पूरे दिन मुजफ्फरपुर के पुलिस अधिकारी व अस्पताल के अधिकारियों के संपर्क में रहे. जबकि डीएसपी सदर समेत कई पुलिस अधिकारी मुजफ्फरपुर में कैंप करते रहे.
वहीं ड्यूटी समाप्त करने के बाद कई पुलिसकर्मी घायलों का हाल लेने मुजफ्फरपुर रवाना हुए. इधर, स्थानीय पुलिसकर्मी शवों के आने का इंतजार करते रहे. इधर, देर शाम तक रून्नीसैदपुर में परिजन हेमंत राम के शव के आने का इंतजार करते रहे.
शनिवार की सुबह रून्नीसैदपुर थाना क्षेत्र का गयघट गांव खून के रंग में रंगा नजर आया. सड़क जहां खून के रंग से लाल था, वहीं मांस के लोथरे भी बिखड़े पड़े थे. जबकि पास में भी पुलिस कर्मियों के हथियार भी पड़े थे. मौके पर पहुंची पुलिस ने हथियारों को उठा कर उसकी सफाई की. जबकि ग्रामीणों की भीड़ उमड़ी रहीं. घटना को लेकर लोग चर्चा करते व कयास लगाते नजर आये. एसपी हरि प्रसाथ एस व डीएसपी सदर कुमार वीर धीरेंद्र ने भी मौके पर पहुंच कर मामले की जांच की.
हेमंत राम के शव का परिजन कर रहे इंतजार : हादसे में जख्मी हार्डकोर नक्सली हेमंत राम की मौत के बाद गांव में मातमी सन्नाटा है. रून्नीसैदपुर उत्तरी पंचायत के झुग्गी बस्ती स्थित उसका आवास मातम की चादरों में लिपट गया है. पिता सेवानिवृत्त शिक्षक जयमंगल राम व मां सतिया देवी का बुरा हाल है. उसकी पत्नी बदहवास है. ग्रामीणों के अनुसार चार बहनों की शादी हो चूकी है. तीन भाइयों में वह बीच का था. बड़ा भाई राजू राम व छोटा भाई सूरज राम है. घटना की सूचना मिलते ही आस पास के लोग उसके घर पहुंच कर परिजनों का दर्द बांट रहे है. हेमंत राम 30 मार्च 2002 को रीगा नक्सली हमले में सुर्खियों में आया था.
उस पर नक्सली वारदातों के अलावा हत्या, लूट, डकैती व अपहरण का मामला रीगा, मेजरगंज व रून्नीसैदपुर समेत कई थानों में दर्ज है. पूर्वी चंपारण जिला के छौड़ादानो थाना के तीनकोनि निवासी राजकुमार साह की गला रेत कर हत्या करने के बाद उसके शव को मेजरगंज थाना के मड़पा इश्वरदास गांव के सरेह में फेक दिया था. 16 जुलाई 2015 को ससौला राजदेवी स्थान के समीप अपने साथियो के साथ किसी बड़े वारदात को अंजाम देने के लिए पहुंचे हेमंत को मेजरगंज पुलिस ने आर्म्स के साथ गिरफ्तार किया था.
वह 17 जुलाई 2015 से जेल में था. वर्तमान में हेमंत राम के खिलाफ कोर्ट में छह मामले लंबित है. इनमें चार में उसे बेल मिल चुका था. लेकिन मेजरगंज थाना में हत्या व आर्म्स एक्ट में उसे बेल नहीं मिला था. शनिवार को इन दोनों मामलों में एसीजेएम एके सिंह के कोर्ट में उसकी पेशी होनी थी.
हेमंत राम पर दर्ज मामले
1. रून्नीसैदपुर थाना कांड संख्या : 43/15 : रंगदारी, 64/15 : रंगदारी, 68/15 : रंगदारी, 106/2007 : रंगदारी. मेजरगंज थाना : 1. मेजरगंज थाना कांड संख्या : 171/15 : डकैती की योजना बनाते आर्म्स के साथ गिरफ्तार, 154/15 : हत्या (रीगा में थाना पर हमला व सैप जवान की हत्या समेत कई मामले रीगा थाने में भी है दर्ज)
सुहाग पासवान पर दर्ज मामले
रून्नीसैदपुर थाना कांड संख्या :
32/11 : स्कूल में गणतंत्र दिवस पर काला झंडा फहराने, 97/11 : निर्माण एजेंसी का पोकलेन जलाने, 286/12 : आर्म्स के साथ छह की गिरफ्तारी में सुहाग का नाम आने, 290/12 : सुहाग की निशानदेही पर महिंदवारा से माइंस की बरामदगी, 194/11 : रंगदारी,बेलसंड थाना : कांड संख्या 30/10 : रैली निकाल विरोध प्रदर्शन, पथराव व गैस एजेंसी में लूटपाट, 301/10 : तत्कालीन थानाध्यक्ष वीरेंद्र यादव द्वारा पुलिस पर हमला मामले की प्राथमिकी.
इतनी बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की मौत की पहली घटना
इतनी बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की मौत की पहली घटना
तेज आवाज से दहला गयघट का इलाका
शुक्रवार की रात जब लोग अपने घरों में सोये थे तभी रात तकरीबन डेढ़ बजे तेज धमाके की आवाज से लोग दहल गये. स्थानीय लोगों के अनुसार सीतामढ़ी की ओर जा रहे एक बस के संवाहक द्वारा बस्ती के पास चिल्ला-चिल्ला कर लोगों को हादसे की जानकारी दी गयी. इसके बाद पहुंचे लोगों ने रून्नीसैदपुर पुलिस को सूचना दी. प्रभारी थानाध्यक्ष रतन यादव के नेतृत्व में पहुंची टीम ने ग्रामीणों के सहयोग वाहनों में फंसे घायल व मृतकों को बाहर निकाला. वहीं आरक्षी केंद्र को सूचना दी.
हालांकि घायल व मृतकों को पहुंचाने के लिए वाहन तक नहीं थे. मौके पर पहुंचे मोरसंड पंचायत के सरपंच मीनू देवी के पति गयघट गांव निवासी रूपेश कुमार सिंह ने बताया कि जब वे मौके पर पहुंचे तो लोगों को छटपटाते देखा. सभी लोग वाहन में फंसे थे. इनमें सबसे ज्यादा बुरा हाल चालक का था. वह बार-बार चिल्ला रहा था कि-भइया हो भइया, बचा ल हो भइया. लेकिन वह इस कदर फंसा था की निकलना मुश्किल था. वहीं वार्ड सदस्य पिंकी देवी के पति व गयघट निवासी रंजीत कुमार ने बताया की उन्होंने चार लोगों को मृत पाया. शेष जख्मी हालत में थे. इनमें तीन-चार की हालत नाजुक थी.
गयघट निवासी वृज किशोर शर्मा ने बताया की घटना का दृश्य दिल दहलाने वाला था. चारों ओर चीख- पुकार मची थी. अगर वाहन समय पर आ जाता तो कुछ लोग बचाये जा सकते थे. अवर निरीक्षक रतन यादव समेत अन्य पुलिस कर्मियों ने खुद से घायल व मृत लोगों को निकाला.
फॉरेंसिक टीम ने की मामले की जांच
सीतामढ़ी : गयघट हादसे के बाद इसकी जांच भी शुरू हो गयी है. थाना पुलिस अपने स्तर से मामले की जांच में लगी है. वहीं शनिवार की शाम मुजफ्फरपुर से फॉरेंसिक विभाग की चार सदस्यीय टीम गयघट पहुंची और घटनास्थल तथा वाहन से खून व मांस के लोथरे एकत्रित किया. डॉ सुनील कुमार के नेतृत्व में स्वतंत्र कुमार, मो सईद आलम व भब्बू प्रसाद की टीम ने घंटों बारीकी से मामले की जांच की. इस दौरान टीम ने बताया की वरीय अधिकारी के आदेश पर मामले की जांच कर रहे है. मकसद घटना की वजहों का पता लगाना है.
मृतकों की सूची
1. मदन मोहन साह (59 वर्ष), जमादार, पिता- जमुना साह, ग्राम-सोनमा, थाना-बाढ़, जिला-पटना.
2. चुम्मन सिंह (50 वर्ष), सैप जवान, पिता- रामजी सिंह, ग्राम छतवनपुर, थाना-ब्रह्मपुर, जिला-भोजपुर.
3. संजय कुमार राय (38 वर्ष), सिपाही, पिता-जगनारायण राय, ग्राम-डिहरी, थाना-धनगाई, जिला-भोजपुर.
4. कृष्णा सिंह (54 वर्ष), हवलदार, पिता- राम सिंह, ग्राम-कमरा, थाना जगदीशपुर, जिला-भोजपुर.
5. उमेश मिश्रा (54 वर्ष), हवलदार, बद्री नारायण मिश्रा, ग्राम महराजन, थाना-कांती, जिला-दरभंगा.
6. मुन्ना कुमार सिंह (50 वर्ष) हवलदार सह चालक, पिता-पुनदेव सिंह, ग्राम-जसौली, थाना-पचरूखी, जिला सीवान.
7. कुलेश्वर चौधरी (53 वर्ष), सिपाही, अवध बिहारी चौधरी, ग्राम-मदौना, थाना सूर्यपुरा, जिला रोहतास.
8. हेमंत राम, हार्डकोर नक्सली, पिता-जयमंगल राम, सेवा निवृत शिक्षक, ग्राम रून्नीसैदपुर उत्तरी झुग्गी बस्ती, थाना रून्नीसैदपुर, जिला-सीतामढ़ी.
घायलों की सूची
1. अवधेश कुमार, पुलिसकर्मी, पिता-शिव बालक सिंह, ग्राम-भंडारी, जिला नालंदा.
2. शिव शंकर राम, पुलिसकर्मी, पिता-रास बिहारी राम, ग्राम-सिरसिया, थाना- परिहार, जिला-सीतामढ़ी.
3. प्रमोद कुमार, पुलिसकर्मी, पिता-रामू महतो, अवमलगोला, जिला-पटना.
4. विपिन कुमार, पुलिसकर्मी, पिता- कामेश्वर प्रसाद यादव, ग्राम-नरियार, जिला- सहरसा.
5. पवन कुमार राय, पुलिसकर्मी, पिता-मोसदी राय ग्राम-मांझी, थाना-सुगौली, जिला-पूर्वी चंपारण.
6. राजदेव राम, पुलिसकर्मी, पिता- रघुवीर राम, ग्राम-पोखरिया, थाना-मोतिहारी, जिला- पूर्वी चंपारण.
7. हरि किशुन राम, पुलिसकर्मी, पिता-राम विलास राम, ग्राम-दुबजही जमोदी, थाना-तरारी, जिला-भोजपुर.
8. सुहाग पासवान, नक्सली सब जोनल कमांडर, पिता-राम विलास पासवान, ग्राम-पैगंबरपुर, थाना-मीनापुर, जिला-मुजफ्फरपुर.
पुलिस जवानों ने डॉक्टरों को पीटा, इमरजेंसी सेवा ठप
साथी की मौत पर
भड़का आक्रोश
मुजफ्फरपुर : भागलपुर सेंट्रल जेल से सीतामढ़ी कोर्ट में पेशी के लिए कैदी को लेकर जा रहे कैदी वैन ने रून्नीसैदपुर थाने के गैघट गांव के पास नेशनल हाइवे- 77 पर गिट्टी लदे ट्रक के पीछे से जोरदार टक्कर मार दी. इस सड़क हादसे में घायल सिपाही और कैदी को इलाज के लिए सुबह करीब तीन बजे एसकेएमसीएच में लाया गया. इमरजेंसी में मौजूद डॉ गणेश पासवान व जूनियर डॉक्टर अमित कुमार ने घायलों का इलाज शुरू किया. इस दौरान सीतामढ़ी पुलिस लाइन से आये पुलिस जवान व अन्य लोगों ने इलाज में कोताही का आरोप लगाते हुए निजी अस्पताल में रेफर करने का दबाव बनाने लगे. हालांकि डॉ गणेश पासवान व डॉ अमित कुमार ने मरीजों का इलाज सही ढंग से होने का भरोसा दिलाया. लेकिन, घायलों का इलाज चल ही रहा था. इसी बीच जमादार मदन सिंह और सिपाही कृष्णा सिंह की मौत इलाज के दौरान अस्पताल में हो गयी. दोनों की मौत की खबर सुनते ही पुलिस लाइन से आये सिपाही आक्रोशित हो गये और डॉक्टरों की पिटाई शुरू कर दी. उनके साथ काफी देर तक हाथापाई व मारपीट की. करीब 15 मिनट तक इमरजेंसी में बवाल हुआ. इसके बाद डॉक्टर वहां से जान बचाकर भाग निकले. इसके बाद सिपाहियों ने पुलिस जवान घायल प्रमोद सिंह, पवन साह, विपिन कुमार, सुरेंद्र पासवान और अवधेश सिंह को एसकेएमसीएच के समीप एक निजी अस्पताल में इलाज के लिए भरती कराया.
एक घंटे की बैठक बेनतीजा, ठप रही इमरजेंसी : सिपाहियों व डॉक्टरों के बीच जारी गतिरोध पर विराम लगाने के लिए एसकेएमसीएच अधीक्षक के चैंबर में नगर डीएसपी आशीष आनंद, प्रभारी अधीक्षक बच्चा प्रसाद, डॉक्टर गणेश पासवान, डॉ अरविंद कुमार की टीम की बैठक हुई. करीब एक घंटे तक चली इस बैठक के बाद भी कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाया. डॉक्टरों का कहना था कि सीसीटीवी फुटेज में जो लोग मारपीट करते दिख रहे है. उनपर कार्रवाई की जाये. इसके साथ ही डॉक्टरों को अस्पताल में सुरक्षा मुहैया करायी जाये. इसके बाद ही इमरजेंसी सेवा बहाल होगी. नगर डीएसपी के काफी समझाने पर भी डॉक्टर इलाज के लिए तैयार नहीं हुए.
इमरजेंसी में सात मरीजों का नहीं हुआ इलाज : इमरजेंसी में आये सात मरीजों का इलाज नहीं किया गया. मरीज के परिजन डॉक्टरों से इलाज के लिए गुहार लगाते रहे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे इमरजेंसी से बाहर निकाल गेट बंद कर दिया. इधर प्रभारी अधीक्षक बच्चा प्रसाद ने भी इसकी पुष्टि की. इमरजेंसी में जो मरीज थे, उनका इलाज नहीं हो पाया है. इसके बाद डॉक्टरों ने हड़ताल कर दिया था. यहां इलाज बाधित रहा. इमरजेंसी में इलाज करा रहे सभी मरीजों को परिजन दूसरी जगह इलाज के लिए चले गये. कई वार्ड खाली हो चुका था.
मारपीट व हंगामा के कारण ओपीडी में भी इलाज नहीं हो सका.
डॉक्टरों ने बंद करा दी इमरजेंसी, इलाज बाधित, निराश होकर लौट गये मरीज
डॉक्टरों के साथ मारपीट की घटना एसकेएमसीएच में आग की तरह फैल गयी. मेडिकल कॉलेज से पहुंचे डॉक्टरों ने इमरजेंसी में सुबह 5.45 बजे ताला बंदी कर दी. इसके बाद इमरजेंसी गेट पर खड़ा होकर जमकर हंगामा किया. घटना की सूचना पर नगर डीएसपी आशीष आनंद व अहियापुर थाने से पुलिस अधिकारी एसकेएमसीएच पहुंचे. पुलिस बल ने डॉक्टरों को समझाने का प्रयास किया. उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया. लेकिन, डॉक्टरों का कहना था कि इस घटना में दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो, उनकी गिरफ्तारी की जाये और डॉक्टरों को सुरक्षा मुहैया करायी जाये. इसके बाद ही इमरजेंसी में आये मरीजों का इलाज शुरू करेंगे. इस बीच, एसकेएमसीएच के प्रभारी अधीक्षक बच्चा प्रसाद भी एसकेएमसीएच पहुंच गये. उन्होंने घटना की जानकारी लेकर डॉक्टरों को इमरजेंसी शुरू करने का निर्देश दिया. लेकिन जूनियर डॉक्टर उनकी बात मानने की तैयार नहीं थे.
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