उर्दू स्कूलों में चावल के अभाव में एमडीएम बंद

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उर्दू स्कूलों में चावल के अभाव में एमडीएम बंद उर्दू प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में भी पठन-पाठन की व्यवस्था ठीक नहीं है. रविवार को प्रभात खबर ने बोखड़ा व परिहार प्रखंड के दो-दो स्कूलों का जायजा लिया. सबसे खास बात यह सामने आया कि नामांकित बच्चों की तुलना में 50 फीसदी भी बच्चो की उपस्थिति […]

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उर्दू स्कूलों में चावल के अभाव में एमडीएम बंद उर्दू प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में भी पठन-पाठन की व्यवस्था ठीक नहीं है. रविवार को प्रभात खबर ने बोखड़ा व परिहार प्रखंड के दो-दो स्कूलों का जायजा लिया. सबसे खास बात यह सामने आया कि नामांकित बच्चों की तुलना में 50 फीसदी भी बच्चो की उपस्थिति नहीं थी. इसका मुख्य कारण एमडीएम का बंद रहना बताया गया. फोटो- 1 प्रावि भरौन में बच्चों का पढ़ाते शिक्षक, 2 किचेन में लटका ताला कई शिक्षक नदारद मिले बोखड़ा. प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय, उर्दू भरौन में 253 छात्र-छात्राओं का नामांकन है. रविवार को 169 बच्चे मौजूद दिखे. पोशाक राशि से लाभान्वित कराये जाने के बावजूद 25 बच्चे होंगे जो पोशाक में स्कूल आये थे. प्रधान शिक्षक अब्दुल सलाम ने बताया कि चावल के अभाव में गुरुवार से ही एमडीएम बंद है. उनके अलावा एक और शिक्षक हैं. शिक्षक की कमी से बच्चों का पठन-पाठन प्रभावित होता है. अगर वे विद्यालय के काम से कहीं चले जाते हैं तो एक शिक्षक पर पूरे बच्चों की जिम्मेदारी होती है. भवन हो रहा खस्ता स्कूल परिसर में तीन कमरे का भवन बनाया गया है. कहने के लिए भवन को स्कूल प्रबंधन को सौंप दिया गया है, लेकिन उसका उपयोग नहीं किया जाता है. वर्ष 10-11 से ही उक्त भवन एक तरह से खंडहर बना हुआ है. जर्जर होती जा रही हालत पर प्रधान ने बताया कि यह भवन पूर्व प्रधान शिक्षक लइकुजामा द्वारा बनाया गया था. सीढ़ी टूट रही है. कक्षा पांच तक ही बच्चों की पढ़ाई होने व शिक्षकों की कमी के चलते नये भवन की जरूरत हीं नहीं पड़ी. नामांकित 700, मौजूद 300 फोटो- 3 स्कूल परिसर में खेल रहे बच्चे, 4 रसोइघर में लगा ताला बोखड़ा. प्रखंड के मध्य विद्यालय उर्दू, बोखड़ा में भी चावल के अभाव में एक सप्ताह से एमडीएम बंद है. रविवार को एक बजे तक आठ में से सात शिक्षकों की हाजिरी बनी थी. तीन शिक्षक नदारद थे. प्रधान शबाना अफरोज छुट्टू पर थी. प्रभारी प्रधान श्याम कुमार भी नदारद मिले. शिक्षक नूर आलम ने बताया कि तीन शिक्षक खाना खाने गये हैं. बच्चों की काफी कम संख्या पर उक्त शिक्षक का कहना था कि बच्चे भी खाना खाने गये हुए हैं. संस्कृत शिक्षक नहीं होने के चलते इस विषय की पढ़ाई नहीं हो पाती है.

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