सेवक ही बन गये भक्षक, 34 दिन में दूसरी बार महकमा शर्मसार

Updated at : 06 Sep 2019 2:22 AM (IST)
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सेवक ही बन गये भक्षक, 34 दिन में दूसरी बार महकमा शर्मसार

सीतामढ़ी : आम तौर पर पुलिस को जनता का सेवक माना जाता है. थानों में स्लोगन भी पुलिस का सही अर्थ बताता है, पु मतलब पुरुषार्थ, लि मतलब लिप्सारहित तथा स मतलब सहयोगी.. जिस पुलिसकर्मी पर जनता की सुरक्षा की महती जिम्मेवारी है, वही जब भक्षक बन जाये तो, फिर पुलिसिंग व्यवस्था का कहना क्या. […]

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सीतामढ़ी : आम तौर पर पुलिस को जनता का सेवक माना जाता है. थानों में स्लोगन भी पुलिस का सही अर्थ बताता है, पु मतलब पुरुषार्थ, लि मतलब लिप्सारहित तथा स मतलब सहयोगी.. जिस पुलिसकर्मी पर जनता की सुरक्षा की महती जिम्मेवारी है, वही जब भक्षक बन जाये तो, फिर पुलिसिंग व्यवस्था का कहना क्या.

नगर थाना के गश्ती दल में शामिल दारोगा व पैंथर मोबाइल के तीन जवानों ने जिस प्रकार अपनी नापाक करतूत को अंजाम देकर विभाग को शर्मसार किया है, वह अचंभित करने वाला है. इन पुलिसकर्मियों की करतूत से पुलिस विभाग आम जनता के समक्ष कटघरे में खड़ा है और सवाल दर सवाल खड़े किये जा रहे हैं.
34 दिनों में नगर थाने की पुलिस को अपने कर्मियों के आचरण से दूसरी बार शर्मिंदगी झेलनी पड़ी है. पूरा महकमा इस करतूत से शर्मसार है. अभी दो अगस्त को हीं मद्य निषेध की विशेष निगरानी टीम ने नगर थाना में छापेमारी कर अवैध शराब के साथ दारोगा प्रमोद कुमार-2 को गिरफ्तार किया था. इतना हीं नहीं पूर्व नगर थानाध्यक्ष सह इंस्पेक्टर सुबोध कुमार मिश्रा के विरुद्ध गिरफ्तारी का आदेश निकला है. फिलहाल वह भूमिगत हैं तथा उन पर कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है.
इससे पूर्व 30 जनवरी 2019 को तत्कालीन एसपी सुजीत कुमार के निर्देश पर सदर डीएसपी डॉ कुमार वीर धीरेंद्र ने रून्नीसैदपुर थाना से सैप व होमगार्ड के जवानों को जब्त शराब को छिपाने के जुर्म में गिरफ्तार किया था.
बेलगाम हो चले थे पैंथर मोबाइल के जवान: डरा-धमकाकर व झूठे केस में फंसाकर जेल भेजने की धमकी देनेवाले इन पुलिसकर्मियों ने पिछले कुछ महीनों से शहर में आतंक का पर्याय बना था. इनकी करतूत से व्यवसायियों तक में गहरा आक्रोश था. झूठा केस दर्ज होने व जेल जाने के डर से व्यवसायी इनके खिलाफ कुछ बोलने तक की हिम्मत नहीं कर रहे थे. खासकर पैंथर मोबाइल के जवानों की कार्यशैली को लेकर सवाल खड़े किये जा रहे थे. अक्सर गश्ती के नाम पर इन जवानों को किसी व्यवसायिक प्रतिष्ठान की गद्दी पर बैठा देखा जा सकता था.
कहने को इनकी ड्यूटी दिवा गश्ती तक रखी गयी थी, लेकिन अक्सर बिना किसी वरीय अधिकारियों के आदेश पर इन्हें शहर के गली-मोहल्ले व रेस्टूरेंट तक का चक्कर काटता देखा जा सकता था. सूत्रों की माने तो थानेदार भी इनकी कार्यशैली से क्षुब्ध थे. पूर्व में इनकी कार्यशैली की रिपोर्टिंग तक की गयी थी, लेकिन सुधार का लक्षण तो दूर की बात, इन्हें बदला तक नहीं गया. हाल हीं पैंथर मोबाइल के एक जवान का तबादला कर दिया गया था.
गोपाल ने व्यवसायी से ऐंठा था एक किलोग्राम चांदी: नगर थाना के पैंथर मोबाइल के जवान गोपाल कुमार ने आभूषण कारोबारी सचिन दिलीप धारगे को डरा-धमकाकर एक किलोग्राम चांदी ऐंठ चुका है. पीड़ित व्यवसायी ने पुलिस को दिये गये बयान में कहा है कि इन जवानों द्वारा उन्हें लगातार धमकी दी जाती थी.
पूछे जाने पर पीड़ित ने कहा कि वह बार-बार इन पुलिसकर्मियों को कहता था कि वह यहां व्यवसाय करने आया है. उनका व्यवसाय पूरी तरह वैध है तो फिर वह कैसे कोई हिस्सा दे सकता है? हर बार उसके साथ भयादोहन किया जाता था.
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