मर्डर मिस्ट्री में उलझी पुलिस, सीने में गोली और हत्यारा ओझल

Updated at : 01 Sep 2018 1:43 AM (IST)
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मर्डर मिस्ट्री में उलझी पुलिस, सीने में गोली और हत्यारा ओझल

संतोष की हत्या पुलिस के लिए बनी अबूझ पहेली प्रेम-प्रसंग में हत्या की आशंका को लेकर भी की जा रही चर्चा सीतामढ़ी/सुप्पी : संतोष के सीने में गोली लगी और हत्यारा ओझल हो गया. सुप्पी सहायक थाना क्षेत्र के परसा गांव में ट्रैक्टर चालक संतोष कुमार की हत्या की गुत्थी पुलिस के लिए अबूझ पहेली […]

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संतोष की हत्या पुलिस के लिए बनी अबूझ पहेली

प्रेम-प्रसंग में हत्या की आशंका को लेकर भी की जा रही चर्चा
सीतामढ़ी/सुप्पी : संतोष के सीने में गोली लगी और हत्यारा ओझल हो गया. सुप्पी सहायक थाना क्षेत्र के परसा गांव में ट्रैक्टर चालक संतोष कुमार की हत्या की गुत्थी पुलिस के लिए अबूझ पहेली बन गयी है. एक तरफ जहां पिता किशोरी राय को किसी पर शक नहीं है, वहीं इस हत्या को लेकर गांव-घर में तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गरम हो गया है. मृतक के पिता ने साफ तौर पर किसी से दुश्मनी होने से इनकार किया है.
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि किस परिस्थिति में और किसने संतोष के सीने में गोली मारी है? इस हत्या के पीछे आखिर कैसी साजिश थी? आखिर संतोष को मौत के घाट उतारने के पीछे वजह क्या था?
यह कुछ सवाल है, जो हत्या के पीछे की चर्चाओं को सामने रख रहा है. पुलिसिया जांच अब तक परिजन के बयान के आसपास ही घूम-फिर रहा है. सवाल उठ रहा है कि जब संतोष के अगल-बगल में उसके पड़ोसी गणेश राय पुत्र सुजीत कुमार के साथ सो रहा था, ऐसे में दोनों में किसी की नजर हत्यारे पर क्यों नहीं पड़ी. मामले को प्रेम-प्रसंग से जोड़कर भी देखा जा रहा है. हालांकि परिजन प्रेम-प्रसंग के किसी बात को खारिज कर रहे हैं.
चश्मदीद की चुप्पी बन रहा बड़ा रहस्य
संतोष की हत्या में चश्मदीद की चुप्पी बड़ा रहस्य बना है. पुलिस के लिए यह अनुसंधान व हत्या के खुलासे की यह महत्वपूर्ण कड़ी बन गयी है. पुलिस का अनुसंधान इस ओर भी घूम रहा है कि संतोष को गोली मारते किसने देखा है. और अगर देखा है तो पुलिस के सामने वह राज क्यों खोलना नहीं चाह रहा है? सवाल दर सवाल तैरते उक्त हत्या के पीछे चश्मदीद की चुप्पी बड़ा रहस्य बन रहा है.
मालूम हो कि संतोष अपने बगलगीर के दरवाजे पर सोया था, जहां गोली मारकर उसकी हत्या कर दी गयी. जिस वक्त उसकी हत्या की गयी, बगल में ही गणेश राय अपने पुत्र संजीत कुमार के साथ वहां सो रहा था.
कोन कसूर रहे हमर बाबू के, हो राम!
आखिर कोन कसूर रहे हमर बाबू के, हो राम! यह कहते हुए मृतक के पिता किशोरी राम फफक पड़ते हैं. मृतक संतोष कुमार अपने मजदूर मां-बाप का इकलौता पुत्र था. वह अपनी एकमात्र बहन से छोटा था. उसकी शादी अभी नहीं हुई थी. वह गांव-घर में ट्रैक्टर चलाकर परिवार की मदद करता था. मां कुंती देवी व विवाहिता बहन बबीता देवी का भी रो-रोकर बुरा हाल है. दोनों बार-बार रोते हुए मूर्क्षित हो जा रही है. गांव के लोग चर्चा कर रहे हैं कि जब दुश्मनी नहीं है तो आखिर गोली क्यों मारी गयी है. गांव के लोग भी संतोष की मौत पर दु:खी हैं तथा मृतक के मां-बाप को दुख की घड़ी में सांत्वना दे रहे हैं.
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