सीतामढ़ी: मिट्टी की उर्वराशक्ति गिरने पर वैज्ञानिकों ने जताई चिंता, बदलाव की अपील

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कृषि विज्ञान केंद्र की बैठक

Sitamarhi News: सीतामढ़ी के पुपरी में कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को जैविक और प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी है. वैज्ञानिकों ने मिट्टी की उर्वराशक्ति घटने पर चिंता जताई और फसल चक्र सुधार, जैव उर्वरक और मिट्टी जांच पर जोर दिया है. पढ़ें पूरी खबर…

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सीतामढ़ी के पुपरी से बैधनाथ ठाकुर का रिपोर्ट

Sitamarhi News: सीतामढ़ी जिले के पुपरी क्षेत्र में बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र, बलहा-मकसूदन ने किसानों को खेती के पारंपरिक तरीकों में बदलाव करने की सलाह दी है. प्रधानमंत्री की अपील के बाद वैज्ञानिकों ने कहा है कि अब समय आ गया है कि किसान जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर तेजी से कदम बढ़ाएं, ताकि मिट्टी की सेहत को बचाया जा सके.

मिट्टी की उर्वराशक्ति में लगातार गिरावट

कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. रामेश्वर प्रसाद के नेतृत्व में वैज्ञानिक दल किसानों को जागरूक कर रहा है. वैज्ञानिकों का कहना है कि असंतुलित रूप से रासायनिक खाद, कीटनाशक और उर्वरक के अधिक इस्तेमाल से मिट्टी में मौजूद लाभकारी जीवाणु तेजी से घट रहे हैं. इसके कारण मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन का स्तर गिरकर लगभग 0.2 प्रतिशत तक पहुंच गया है.

जैविक खेती अपनाने की सलाह

उद्यान वैज्ञानिक मनोहर पंजीकार किसानों को सलाह देते हैं कि वे जैविक खेती, प्राकृतिक खेती और जैव उर्वरकों जैसे पीएसबी और राइजोबियम कल्चर का उपयोग करें. इससे खेतों में लाभकारी सूक्ष्मजीव बढ़ेंगे और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी.

फसल चक्र बदलने पर जोर

वैज्ञानिकों ने फसल चक्र में सुधार की भी जरूरत बताई है. उनका कहना है कि दलहनी फसलों को फसल चक्र में शामिल करने से मिट्टी में नाइट्रोजन और कार्बन की मात्रा बढ़ती है, जिससे यूरिया, डीएपी और पोटाश जैसे रासायनिक उर्वरकों की खपत कम हो जाती है और उत्पादन भी बेहतर होता है. 

मिट्टी जांच को बताया जरूरी

कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों से अपील की है कि वे अपने खेतों की मिट्टी की जांच जरूर कराएं. इससे अनावश्यक रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को रोका जा सकता है और लागत घटाकर अधिक उत्पादन हासिल किया जा सकता है. यह अभियान पिछले महीने से लगातार चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य बंजर होती मिट्टी को बचाना और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना है.

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अनिकेत कुमार

लेखक के बारे में

By अनिकेत कुमार

अनिकेत बीते 4 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. राजस्थान पत्रिका और न्यूजट्रैक जैसे मीडिया संस्थान के साथ काम करने का अनुभव. एंटरटेनमेंट, हाईपरलोकल और राजनीति की खबरों से अधिक जुड़ाव. वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ कार्यरत.

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