खपत से 50 फीसदी कम होती है दलहन की उपज

Updated at : 16 Nov 2015 5:04 AM (IST)
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खपत से 50 फीसदी कम होती है दलहन की उपज

पुपरी : राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत दलहन व तिलहन फसल की बुआइ के लिए कृषि विज्ञान केंद्र, सीतामढ़ी में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इसमें करीब 60 किसान शामिल हुए. कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्र के कार्यक्रम समन्वयक डा रामईश्वर प्रसाद ने किया. समन्वयक ने दिया प्रशिक्षण : ॉ मौके पर […]

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पुपरी : राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत दलहन व तिलहन फसल की बुआइ के लिए कृषि विज्ञान केंद्र, सीतामढ़ी में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इसमें करीब 60 किसान शामिल हुए. कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्र के कार्यक्रम समन्वयक डा रामईश्वर प्रसाद ने किया. समन्वयक ने दिया प्रशिक्षण : ॉ

मौके पर समन्वयक डा प्रसाद ने कहा कि दलहन व तिलहन की जितनी खपत है, उसका 50 फीसदी ही उत्पादन हो पाता है. यह स्थिति पूरे देश की

है. उत्पादन कम होने के चलते ही दलहन व तिलहन का आयात करना पड़ रहा है. दलहन व तिलहन के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मंत्रालय ने कृषि विज्ञान केंद्रों को किसानों को प्रशिक्षण देने की जिम्मेवारी सौंपी है. सीतामढ़ी जिला को कलस्टर एप्रोच के रूप में मसूर, मटर, तीसी व तोड़ी को प्रत्यक्षण के लिए आवंटन किया गया है.
बेहतर उत्पादन को प्रशिक्षण : फसल वैज्ञानिक सच्चिदानंद प्रसाद ने तिलहन व दलहन के बेहतर उत्पादन के वैज्ञानिक जानकारी देने के साथ ही विस्तार से प्रशिक्षण दिया. बताया कि मसूर की एचयूएल-57, मटर की प्रकाश, तीसी की शेखर व तोड़ी की राजेंद्र सुफलाम आदि प्रजातियों का चयन किया गया है,
जिसका प्रत्यक्षण वैज्ञानिक तरीके से किया जाना है. उद्यान वैज्ञानिक मनोहर पंजिकार ने कहा कि यदि पूरे वर्ष में एक बार दलहनी फसलों की खेती किया जाये तो इससे दलहन की आपूर्ति के साथ-साथ खेतों में नाइट्रोजन बरकरार रहता है. फलत: फसलों में यूरिया का प्रयोग कम होता है और
खेत की उर्वरा शक्ति में वृद्धि होती है. बीज का वितरण : प्रशिक्षण के बाद चयनित किसानों के बीच बीज व बीज उपचार के कीट का वितरण किया गया. मौके पर बाजपट्टी प्रखंड के रामचंद्र सिंह, रामश्रेष्ठ सिंह, अतिकुर्रहमान, इंदल भंडारी, पुपरी प्रखंड के रंजीत कुमार, अरविंद सिंह, रीगा प्रखंड के रामश्रेष्ठ सिंह, जितेंद्र कुमार सिंह, रामनंदन सिंह के अलावा बथनाहा, बोखड़ा, नानपुर व चोरौत समेत अन्य प्रखंडों के किसान मौजूद थे.
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