बिहारी चाहिए या बाहरी फैसला अब आपके हाथ : नीतीश

Updated at : 30 Oct 2015 5:29 AM (IST)
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बिहारी चाहिए या बाहरी फैसला अब आपके हाथ : नीतीश

विकास के मुद्दे पर बहस करें पीएम शिवहर : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि आपको बिहारी चाहिए कि बाहरी फैसला आपके हाथ में है. उन्होंने पीएम मोदी को चुनौती दी कि विकास के मुद्दे पर बहस करें. वह शिवहर के चमनपुर गांव के समीप नाज ईंट उद्योग के प्रांगण में गुरुवार को महागंठबंधन जदयू […]

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विकास के मुद्दे पर बहस करें पीएम
शिवहर : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि आपको बिहारी चाहिए कि बाहरी फैसला आपके हाथ में है. उन्होंने पीएम मोदी को चुनौती दी कि विकास के मुद्दे पर बहस करें. वह शिवहर के चमनपुर गांव के समीप नाज ईंट उद्योग के प्रांगण में गुरुवार को महागंठबंधन जदयू प्रत्याशी मो सरफुद्दीन के समर्थन में एक चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे.
उन्होंने कहा िक 10 वर्ष में क्या विकास किया व 17 माह में मोदी सरकार ने क्या काम किया है. इस पर बहस होनी चाहिए. लोस चुनाव में कालाधन वापस लाने का वादा किया था. दो करोड़ युवाओं को रोजगार देने की बात कही थी. बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की बात की थी.
किसानों को पचास प्रतिशत लागत पर न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का भी वादा किया था. पीएम मोदी भरोसे के काबिल नहीं हैं. पीएम गुजरात मॉडल की बात करते हैं जबकि सबसे अधिक कुपोषित महिलाएं गुजरात में ही हैं. मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि तीन चरणों के चुनाव के बाद भाजपा व उसके सहयोगी दलों की हवा निकल चुकी हैं. मौके पर जदयू प्रत्याशी ने कहा कि डूब्बा घाट पुल व पिपराही पुल कानिर्माण नीतीश की देन है.
सरैया/कुढ़नी में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि वे लोहिया के समर्थक हैं. उनका कहना था कि आदमी को केवल काम करना चाहिए. बोलने की जरूरत नहीं. उसका काम स्वयं बोलता है. उसी तरह मैं भी अपने काम का बखान नहीं करना चाहता. हमने पूरे बिहार में जो काम किया है, उसका असर दिख रहा है. जो विकास किया, उसका फायदा सभी धर्म-संप्रदाय के लोगों को मिल रहा है. वे गुरुवार को पारू से महागंठबंधन के प्रत्याशी शंकर प्रसाद यादव के समर्थन में मणिकपुर चौक पर तथा कुढ़नी विस क्षेत्र के तुरकी प्रखंड मुख्यालय खेल मैदान में मनोज कुशवाहा के समर्थन में चुनावी सभाओं को संबोधित कर रहे थे.
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्रीजी रोज बिहार में चुनावी सभाएं करके दिल्ली लौट जाते हैं. रात भर नींद नहीं आने के कारण फिर बिहार में प्रचार करने पहुंच जाते हैं. बेवजह की बातें करते हैं. पिछली बार जब मुजफ्फरपुर आये तो हमारा डीएनए खराब कह कर चले गये. फिर 30 अक्टूबर को आ रहे हैं तो फिर कुछ बोलेंगे. वे मुझे अहंकारी कहते हैं लेकिन मैं अहंकारी नहीं, बिहारी हूं.
हम विकास का काम करते हैं लेकिन वे केवल बात करते हैं. मैं प्रधानमंत्री को विकास के मुद्दे पर बहस की चुनौती देता हूं. चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि बिहार चुनाव में एनडीए का कोई नेता नहीं है. वे मोदी जी के नाम पर चुनाव लड़ रहे हैं. देश के तीन सौ जिले सूखे की चपेट में हैं, लेकिन पीएम को इसकी चिंता नहीं है.
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