विकास की रोशनी से महरूम है माधोपुर सुंदर गांव

Updated at : 08 May 2015 7:42 AM (IST)
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विकास की रोशनी से महरूम है माधोपुर सुंदर गांव

शिवहर : जिले का माधोपुर सुन्दर गांव आजादी के दशकों बाद भी विकास से महरूम है. जनप्रतिनिधि के उदासीनता एवं प्रशासनिक अनदेखी के कारण यहां के लोग आदम युग में जीने को मजबूर है. पंचायती राज के गठन के बाद लोगों में आशा जगी थी कि गांव का विकास होगा, पर आज भी यहां की […]

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शिवहर : जिले का माधोपुर सुन्दर गांव आजादी के दशकों बाद भी विकास से महरूम है. जनप्रतिनिधि के उदासीनता एवं प्रशासनिक अनदेखी के कारण यहां के लोग आदम युग में जीने को मजबूर है.

पंचायती राज के गठन के बाद लोगों में आशा जगी थी कि गांव का विकास होगा, पर आज भी यहां की बदहाल सड़कें विकास पर सवाल खड़ा करती है. वही लोगों की फटेहाल जिंदगी गांव की कहानी बयां कर रही है.सर्वोदयी नेता जयप्रकाश नारायण के प्रयास से भूदान यज्ञ कमेटी को यह गांव दान में मिला था, सर्वे में जमीन पुन: जमीनदारों के चगुंल में चला गया और गरीब हाथ मलते रह गये. ग्रामीण दिनेश साह,रामबाबू साह,शंभु साह,महंथ शंभु नारायण दास, कृष्णनदंन साह व सोगारथ राय कहते हैं यहां कि सड़कें जर्जर है. ङिाटकाहीं मोड़ से इस गांव को जोड़ने वाली सड़क गड्ढों में तब्दील है. मवि से गणोश मल्लिक के घर तक की कच्ची सड़क खस्ता हाल है.

बरसात में आवागमन बाधित

बताया कि उक्त जर्जर सड़कों के चलते बरसात में आवागमन बाधित हो जाता है. बीमार लोगों को खाट पर लाद कर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है. ग्रामीण हलकान है, पर जनप्रतिनिधि व प्रशासन कुंभकर्णी निद्रा में सोये हैं.वर्ष 2001 में जिला परिषद से इस सड़क का निर्माण कराया गया था. तब से आज तक किसी ने इस सड़क की सुधि नहीं ली है.

इस संबंध में विधायक मो सरफुद्दीन ने बताया कि मुख्यमंत्री सड़क योजना में झिटकाहीं-माधोपुर सुंदर सड़क को शामिल किया जायेगा. इसके लिए पहल की जा रही है.

एक माह तक छुपे थे रघुवंश सिंह

इमरजेंसी के दौरान रघुवंश प्रसाद सिंह करीब एक माह तक इस गांव में छुप कर रहे किंतु केद्रीय मंत्री बनने के बाद भी कभी इस गांव की सुधि नहीं लिये. जिससे लोगों में क्षोभ है. भूदान आंदोलन के दौरान आचार्य विनोवा भावे, आचार्य कृपलानी भी यहां पधारे थे.सर्वोदय आश्रम में राधा बहन ग्रमीणों को चरखा से सूत काटना सिखाती थी. यहां के गरीबों के हक की लड़ाई सर्वोदयी नेता हरिवंश नारायण सिंह आजीवन लड़ते रहे. उनके बाद इस गांव की सुधि किसी ने नहीं ली है.

जेपी आंदोलन में लिया था भाग

बताया कि जेपी आंदोलन में इस गांव के लोग बढ़- चढ़ कर हिस्सा लिये थे. राम एकबाल राय, शंभु नारायण दास आदि कई लोग पेंशन भी पा रहें है. इधर, मुखिया मो मंसूर आलम का कहना है कि अति पिछड़ा इस गांव को विकास के मुख्य धारा से जोड़ने के लिए कई कदम उठाये गये हैं.

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