18 की जगह मात्र दो कट्ठे में सिमट कर रह गया है सुरसंड बाजार, कार्रवाई नहीं
Author Prabhat khabar digital desk
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सुरसंड : नगर पंचायत का प्रायः सभी वार्ड अतिक्रमणकारियों के मकड़जाल में फंस कर रह गया है. प्रशासन के लिए सुरसंड को अतिक्रमणकारियों की चंगुल से मुक्त कराना चुनौती बना हुआ है. कभी 18 एकड़ में लगने वाला सुरसंड बाजार अब कुछ कट्ठा में ही सिमट कर रह गयी है. दर्जनों लोगों द्वारा सरकारी भूमि […]
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सुरसंड : नगर पंचायत का प्रायः सभी वार्ड अतिक्रमणकारियों के मकड़जाल में फंस कर रह गया है. प्रशासन के लिए सुरसंड को अतिक्रमणकारियों की चंगुल से मुक्त कराना चुनौती बना हुआ है. कभी 18 एकड़ में लगने वाला सुरसंड बाजार अब कुछ कट्ठा में ही सिमट कर रह गयी है.
दर्जनों लोगों द्वारा सरकारी भूमि को अतिक्रमित कर आलिशान भवन खड़ा कर लिया गया है. नतीजतन नाली का अस्तित्व मिट जाने के चलते बाढ़ व बरसात के मौसम में पानी निकासी नहीं होने से बाजार वासियों समेत अन्य कई वार्ड के लोगों को घर से निकलना भी मुश्किल हो जाता है.
खासकर बाजार क्षेत्र में आनेवाले वार्ड संख्या एक, दो व तीन स्थित थाना रोड, खादी भंडार रोड व बाजार की सड़कों पर सजी दुकानें लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है. पड़ोसी देश नेपाल के सीमाई क्षेत्र के लोगों के लिए मुख्य बाजार माना जाने वाला सुरसंड दिनानुदिन अतिक्रमणकारियों के चपेट में आ गया है. स्थानीय समेत नेपाल से प्रतिदिन कपड़ा मंडी, सब्जी मंडी व ज्वेलरी की दुकान पर खरीदारी करने आनेवाले सैकड़ों लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है.
चारपहिया वाहनों के लिए आना-जाना मुश्किल : स्थानीय शिव कुमार लाठ उर्फ लाला लाठ, दिनेश शरावगी, मनीष कुमार व नीरज कुमार मिश्र समेत अन्य ने बताया कि आलम यह है कि दो पहिया वाहन चालकों को गाड़ी खड़ी करने के लिए सड़क छाप दुकानदारों की खड़ी- खोटी सुननी पड़ती है. वहीं, चार पहिया वाहनों को बाजार के अंदर जाने की कोई गुंजाइश नहीं देख यत्र-तत्र खड़ा करने को मजबूर होना पड़ता है. सुबह होते ही सब्जी मंडी बाजार स्थित पीसीसी की सड़कों पर सज जाती है.
जिसके चलते बाजार वासियों को घर व दुकान से निकलना भी मुश्किल हो जाता है. कुछ लोग सड़क पर हीं मवेशी बांधने देते हैं. इसको लेकर बार-बार उनलोगों के द्वारा थानाध्यक्ष, सीओ व बीडीओ से शिकायत की जाती है, पर समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है. थाना रोड समेत अन्य मार्गों पर तमाम प्रखंड स्तरीय अधिकारियों की गाड़ी दौड़ती रहती है, बावजूद प्रशासन अनजान बनी हुई है.
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