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वेंडिंग जोन व सीसीटीवी कैमरे पर दो करोड़ खर्च, पर नतीजा शून्य

Updated at : 18 Apr 2025 4:46 PM (IST)
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वेंडिंग जोन व सीसीटीवी कैमरे पर दो करोड़ खर्च, पर नतीजा शून्य

Sasaram news. नगर निगम को व्यवस्थित करने के लिए जिला प्रशासन ने निगम का पैसा पानी की तरह बहाया. वेंडिंग जोन बनाने के लिए करीब 50 लाख और सीसीटीवी पर 1.50 करोड़ रुपये खर्च कर दिये. लेकिन, इसका फायदा शहरवासियों को नहीं मिल रहा है.

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जिला प्रशासन की सुस्ती से सुरक्षित व व्यवस्थित नहीं हो पा रहा शहर

सीसीटीवी कैमरे नहीं कर रहे काम, कई हो गये चोरी, तो पोलों से उतारे गये बाकी कैमरे

पुराने बस पड़ाव को वेंडिंग जोन बनाने में 50 लाख रुपये से अधिक हुआ है खर्च, पर वेंडर नदारदफोटो-33- पुराने जीटी रोड पर कारोबार करते वेंडर ए- पोस्ट ऑफिस पर लगा कैमरा.प्रतिनिधि, सासाराम नगरनगर निगम को व्यवस्थित करने के लिए जिला प्रशासन ने निगम का पैसा पानी की तरह बहाया. वेंडिंग जोन बनाने के लिए करीब 50 लाख और सीसीटीवी पर 1.50 करोड़ रुपये खर्च कर दिये. लेकिन, इसका फायदा शहरवासियों को नहीं मिल रहा है. जीटी रोड से वेंडरों को वेंडिंग जोन में भेजने के लिए पुराने बस स्टैंड में जनवरी में 50 लाख रुपये के करीब खर्च किया गया. लेकिन, तीन माह से वेंडिंग जोन सूना पड़ा है और वेंडर जीटी रोड पर सीना तान के कारोबार कर रहे हैं. पूर्व नगर आयुक्त विजय कुमार पांडेय वर्तमान में डीडीसी हैं और जिला प्रशासन से निगम को वेंडरों को हटाने में कोई सहयोग नहीं मिल रहा है. हालांकि, डीडीसी जब नगर आयुक्त के प्रभार में थे, तभी बोर्ड में काली स्थान से लेकर कुशवाहा सभा भवन तक जीटी रोड के दोनों किनारे नो वेंडिंग जोन घोषित किया गया था. निगम अपने स्तर से अभियान चलाकर कुछ घंटों के लिए वेंडरों को परेशान करता है. फिर वेंडर अपने जगह पर वापस चले आते हैं. नतीजतन, वेंडिंग जोन सूना पड़ा है. इनके नहीं जाने की वजह से वेंडिंग जोन का मुख्य द्वार ऑटो का पार्किंग स्थल बन चुका है. बसों को भी यहां खड़े होने के लिए काफी समय मिल जाता है. यही पर ट्रैफिक पुलिस का चेकपोस्ट बना हुआ है. लेकिन, वह ऑटो और बस ड्राइवरों को परेशान नहीं करते हैं. जब तक मन करे, बसें व ऑटो सवारी के इंतजार में खड़े रहते हैं. कई बार इनकी वजह से वेंडिंग जोन सहित आरा-सासाराम पुल पर जाम की स्थिति बन जाती है. फिर भी यह सिलसिला प्रतिदिन चलता है.

1.50 करोड़ रुपये के सीसीटीवी कैमरे पड़े हैं बेकार

वर्ष 2022 में नगर निगम के प्रशासक के रूप में डीएम धर्मेंद्र कुमार थे. अपने कार्यकाल में उन्होंने शहर में सीसीटीवी कैमरे लगाने की कवायद की थी. करीब डेढ़ करोड़ रुपये इस योजना पर खर्च हुआ था. नगर निगम के एक कमरे को कंट्रोल रूम बनाया गया, जहां वर्तमान में भी सीसीटीवी कैमरे के संचालन की मशीनें लगी हैं. लेकिन, अब यह मशीनें काम नहीं कर रही हैं. कारण, कई जगहों पर सीसीटीवी कैमरे चोरी हो गये. कुछ टूट गये और जो बचे हैं, वे पोलों से उतार नगर निगम में रखे गये हैं. यानी सीसीटीवी योजना फेल हो गयी और इस पर खर्च निगम का डेढ़ करोड़ रुपये अब लोगों के काम नहीं आ रहा है.

जिम्मेदारों ने कहा

नियम के अनुसार नगर निगम ने वेंडरों के लिए बेहतर व्यवस्था वेंडिंग जोन में की है, ताकि मुख्य सड़क से हटाने के बाद रोजी-रोजगार को लेकर दिक्कत न हो. जल्द ही जिला प्रशासन इन वेंडरों को वेंडिंग जोन में भेजने के लिए निगम को सहयोग करेगा.

विजय कुमार पांडेय, डीडीसी, रोहतासनगर निगम अपने सामर्थ्य के अनुसार वेंडरों को वेंडिंग जोन में भेजने के लिए कार्य कर रहा है. पूर्व में लगाये गये सीसीटीवी कैमरे अब कार्य के योग्य नही है. इसकी जांच करायी गयी थी. नये कैमरों का अधिष्ठापन बोर्ड में चर्चा के बाद किया जा सकता है.

काजल कुमारी, मेयर, नगर निगम सासाराम.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ANURAG SHARAN

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By ANURAG SHARAN

ANURAG SHARAN is a contributor at Prabhat Khabar.

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