झारखंडी मंदिर परिसर में निर्माण कार्य का विरोध, निर्माण स्थल बदलने की मांग, बढ़ रहा विरोध
Published by : YUVRAJ RATAN Updated At : 13 Jun 2026 7:30 PM
झारखंडी मंदिर परिसर के चबूतरे की तस्वीर
Sasaram News : सासाराम के ऐतिहासिक झारखंडी मंदिर परिसर में निर्माण को लेकर विवाद, स्थानीय लोगों ने विधायक से की स्थान बदलने की मांग.
डेहरी (रोहतास) से मुकेश पांडेय की रिपोर्ट
Sasaram News : शहर के एनिकट स्थित ऐतिहासिक झारखंडी मंदिर परिसर में प्रस्तावित निर्माण कार्य का स्थानीय लोगों, बुद्धिजीवियों एवं अखिल भारतीय हलवाई वैश्य समाज के सदस्यों ने विरोध किया है. लोगों ने मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन चबूतरे एवं यज्ञशाला को संरक्षित रखने की मांग करते हुए विधायक से निर्माण कार्य का स्थान बदलने की अपील की है. विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि मंदिर परिसर में स्थित सार्वजनिक चबूतरे को हटाकर कमरों का निर्माण कराया जा रहा है. उनका आरोप है कि इस संबंध में स्थानीय लोगों एवं समाज के प्रतिनिधियों से कोई पूर्व सहमति नहीं ली गयी है.
‘चबूतरा नहीं, हमारी आस्था और परंपरा का केंद्र है’
प्रदर्शनकारियों के अनुसार यह चबूतरा केवल एक संरचना नहीं, बल्कि धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है. स्थानीय लोगों ने बताया कि मंदिर परिसर की यज्ञशाला एवं चबूतरे पर प्रतिवर्ष सावन महोत्सव, बाबा गणिनाथ पूजा महोत्सव, राजा जौहरमल जयंती समारोह तथा वट सावित्री पूजा जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं. इन आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं एवं समाज के लोग शामिल होते हैं. ऐसे में इस स्थल का स्वरूप बदलने से धार्मिक परंपराओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.
सार्वजनिक मंच के रूप में वर्षों से लोगों की सेवा कर रहा है चबूतरा
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि मंदिर परिसर का यह खुला क्षेत्र स्थानीय गरीब परिवारों के लिए भी उपयोगी है. यहां शादी-विवाह, सामाजिक समारोह, सांस्कृतिक कार्यक्रम, टेंट लगाने, योगाभ्यास करने तथा सुबह-शाम बैठने जैसी गतिविधियां होती हैं. इस कारण यह स्थल लंबे समय से एक सार्वजनिक मंच के रूप में लोगों की सेवा करता रहा है. स्थानीय निवासी सत्येंद्र कुमार ने कहा कि यदि खुले चबूतरे को घेरकर छोटे-छोटे कमरे बना दिये गये, तो परिसर की खुली संरचना समाप्त हो जायेगी. इससे एकांत बढ़ने के कारण अवांछनीय गतिविधियों की आशंका भी बढ़ सकती है.
वैकल्पिक निर्माण का प्रस्ताव
उन्होंने कहा कि इससे मंदिर की प्राकृतिक एवं भौगोलिक सुंदरता प्रभावित होगी तथा मुख्य मंदिर का दृश्य भी आंशिक रूप से ढक जायेगा. अखिल भारतीय हलवाई वैश्य समाज के प्रतिनिधि संजीव कुमार ने कहा कि समाज विकास कार्यों का विरोध नहीं कर रहा है. मंदिर परिसर के दोनों ओर एवं सामने पर्याप्त खाली स्थान उपलब्ध है. आवश्यकता होने पर जर्जर हिस्सों की मरम्मत कर वहां नये कमरों का निर्माण कराया जा सकता है, जिसमें स्थानीय लोग पूरा सहयोग देंगे.
चबूतरे के मुद्दे पर उग्र हो सकता है विरोध, प्रदर्शनकारियों ने जताई नाराजगी
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह चबूतरा वैश्य समाज के सहयोग से निर्मित एक सार्वजनिक धरोहर है. उन्होंने विधायक से जनभावनाओं का सम्मान करते हुए निर्माण कार्य का स्थान बदलने की मांग की. साथ ही चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गयी, तो डेहरीवासी एवं संबंधित समाज के लोग लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होंगे.
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