नगर आयुक्त की पिटाई से घायल डाटा ऑपरेटर 11 दिन बाद लौटा कार्य पर

Updated at : 07 Jun 2024 10:01 PM (IST)
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नगर आयुक्त की पिटाई से घायल डाटा ऑपरेटर 11 दिन बाद लौटा कार्य पर

नगर आयुक्त यतेंद्र कुमार पाल की पिटाई से घायल डाटा ऑपरेटर 11 दिन बाद कार्य पर लौट आया है. शुक्रवार को अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में पहुंचे शुभम ने बताया कि दवा खा रहा हूं. लेकिन, अभी भी दर्द बहुत है. ज्यादा देर तक बैठ कर कार्य करने में परेशानी हो रही

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सासाराम नगर. नगर आयुक्त यतेंद्र कुमार पाल की पिटाई से घायल डाटा ऑपरेटर 11 दिन बाद कार्य पर लौट आया है. शुक्रवार को अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में पहुंचे शुभम ने बताया कि दवा खा रहा हूं. लेकिन, अभी भी दर्द बहुत है. ज्यादा देर तक बैठ कर कार्य करने में परेशानी हो रही है. शुभम करीब तीन दिन सदर अस्पताल में भर्ती रहा. नगर आयुक्त की पिटाई से उसे मसल इंजरी हुई है. हालांकि, इस मामले को लेकर शुभम ने नगर आयुक्त पर प्राथमिकी दर्ज करने के लिए नगर थाने में आवेदन भी दिया है. लेकिन, आवेदन के 10 दिन बाद भी नगर थाने के दारोगा जांच में जुटे हुए हैं. अब तक उन्हें एफआइआर दर्ज करने लायक सबूत नहीं मिले हैं. ऐसा केवल अधिकारियों के खिलाफ आये आवेदन पर ही होता है. आम आदमी के आवेदन पर बिना स्थल निरीक्षण के ही एफआइआर दर्ज कर ली जाती है. शुभम ने बताया कि मुझे पुलिसवालों की कार्यशैली पर भरोसा नहीं है. इसलिए मैंने कोर्ट में परिवाद दायर करने का भी आवेदन दिया है. जब उनसे संघ के बारे में पूछा गया कि अब चुनाव समाप्त हो गये हैं. संघ कोई स्टैंड क्यों नहीं ले रहा है? तो उन्होंने बताया कि अब भी कई कर्मी चुनाव ड्यूटी में लगे हैं. जैसे ही सभी को चुनाव कार्य से मुक्त कर दिया जायेगा. इसको लेकर विरोध होगा. क्योंकि, आज मेरे साथ वरीय अधिकारी ने किया है. कल किसी और के साथ ऐसा कर सकते हैं. जबकि आपके पास कई अधिकार सरकार ने दिया है. आप मुझपर कार्रवाई कर सकते थे. मैं चोर नहीं हूं, जो की आप मुझे पीटेंगे और मेरे साथ गाली-गलौज करेंगे.

इसके पहले भी नगर आयुक्त पर लग चुके हैं आरोप

यह पहली घटना नहीं है, जब जिले के वरीय पदाधिकारी अपने सहयोगी को बचाने में जुटे हैं. ऐसा ही पार्षदों के साथ हुआ था. दो पार्षदों ने नगर आयुक्त के खिलाफ एफआइआर करने का आवेदन किया था, जिसमें एक पार्षद आजाद राम के आवेदन पर कोर्ट के निर्देश के बाद डेहरी एससी एसटी थाने में एक वर्ष बाद मामला दर्ज किया गया था, जिसपर फिलहाल पुलिस का अनुसंधान धीमी गति से चल रहा है. वहीं वार्ड संख्या-13 की पार्षद के आवेदन पर अबतक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.

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