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जरा याद करो कुर्बानी : एक मुठिया प्रथा से जलती थी रोहतास में आजादी की क्रांति की मशाल

Updated at : 13 Aug 2024 9:57 PM (IST)
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जरा याद करो कुर्बानी : एक मुठिया प्रथा से जलती थी रोहतास में आजादी की क्रांति की मशाल

13 अगस्त 1920 को संग्रह कर रखे एक मुठिया अनाज को लेकर कोआथ के रामेश्वर प्रसाद केशरी, करगहर थाना क्षेत्र के सोहसा के नगीना चौधरी व नासरीगंज थाना क्षेत्र के राजनडीह के श्रीनिवास सिंह कोचस पहुंचे थे कि अंग्रेजी सेना ने उन्हें घेर लिया.

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ओम प्रकाश गोंड, सासाराम. 13 अगस्त 1920 को संग्रह कर रखे एक मुठिया अनाज को लेकर कोआथ के रामेश्वर प्रसाद केशरी, करगहर थाना क्षेत्र के सोहसा के नगीना चौधरी व नासरीगंज थाना क्षेत्र के राजनडीह के श्रीनिवास सिंह कोचस पहुंचे थे कि अंग्रेजी सेना ने उन्हें घेर लिया. उनके पास से अनाज की बोरियां मिलीं. यह वह अनाज था, जो कांग्रेस के साथ आजादी के आंदोलनों को चलाने के लिए इस क्षेत्र में एक मुठिया प्रथा के तहत किसानों ने दान दिया था. अंग्रेजों को इसकी भनक लग गयी थी. बैलगाड़ी सहित अनाज को अंग्रेजों ने जब्त कर रामेश्वर प्रसाद केशरी, नगीना चौधरी व श्री निवास सिंह को गिरफ्तार कर लिया. इसके बावजूद इस क्षेत्र में एक मुठिया प्रथा चलती रही. इस प्रथा के तहत कांग्रेस के लिए क्षेत्र के किसान प्रतिदिन एक मुट्ठी अनाज निकाल कर रख देते थे. इसे कांग्रेस के कार्यकर्ता इकट्ठा कर कांग्रेस कार्यालय पहुंचाते थे. इसी अनाज के रुपये से कांग्रेस का खर्च चलता था. बाद में कांग्रेस की सदस्यता के लिए चवनिया प्रथा चली, तो एक मुठिया स्वत: बंद हो गयी. इस प्रथा के संबंध में इतिहासकार डॉ केके दत्ता ने अपनी किताब ‘ बिहार में स्वातंत्र्य आंदोलन का इतिहास’ भाग एक में वर्णन किया है.

11 अगस्त 1920 को रोहतास जिले में हुआ था गांधी जी का आगमन

1857 की क्रांति ने शाहाबाद प्रक्षेत्र में स्वतंत्रता के लिए लोगों के दिलों में उत्कंठा पैदा कर दी थी. इसी क्रांति का परिणाम था कि कांग्रेस की स्थापना के साथ ही पूरे क्षेत्र में क्रांतिकारियों की जमात-दर-जमात खड़ा होने लगी थी. 11 अगस्त 1920 को उस समय के शाहाबाद प्रक्षेत्र में महात्मा गांधी का आगमन हुआ. उस दिन वर्तमान में रोहतास जिला मुख्यालय सासाराम, वर्तमान अनुमंडल बिक्रमगंज और बिक्रमगंज अनुमंडल क्षेत्र की नगर पंचायत कोआथ में महात्मा गांधी ने जनसभा को संबोधित किया. उनके जनसभा के संबोधन के बाद जिले में कांग्रेस का जनसमर्थन और बढ़ता गया. गांधीजी की बातों से प्रभावित होकर ही कोआथ के रामेश्वर प्रसाद केशरी, करगहर थाना क्षेत्र के सोहसा के नगीना चौधरी व नासरीगंज थाना क्षेत्र के राजनडीह के श्रीनिवास सिंह आदि सीधे तौर पर स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े थे.

रोहतास में भी 26 जनवरी 1930 को मना था स्वतंत्रता दिवस

26 जनवरी 1930 को जब कांग्रेस ने स्वाधीनता दिवस मनाने का निर्णय किया, तो रोहतास जिला भी पीछे नहीं रहा. उस समय भभुआ में रतवार गांव के गुप्तेश्वर पांडेय, मोहनिया के रामनगीना सिंह, जैतपुर के बाबू चूरन सिंह और शिवपुर के बाबू लक्ष्मण सिंह ने स्वतंत्रता दिवस के आयोजन का संयोजन किया. इसी प्रकार रोहतास जिले के डेहरी, नासरीगंज, बिक्रमगंज व सासाराम में भी स्वाधीनता समारोह का आयोजन हुआ था, जिसमें स्वामी भवानी दयाल संन्यासी, ठाकुर राज किशोर सिंह, सरदार चौधरी, मो. आलम, मौलाना मुइजुद्दीन, सुमेश्वर सिंह, एलियाज, जयमंगल सिंह आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी.

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