14 करोड़ की निविदा में फंसा 416 संवेदकों का 124 करोड़ रुपया

Updated at : 21 Mar 2026 4:30 PM (IST)
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14 करोड़ की निविदा में फंसा 416 संवेदकों का 124 करोड़ रुपया

निगम की मनमानी से क्षुब्ध संवेदकों ने डीएम को लिखा पत्र

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12 जून 2025 को नगर निगम ने 42 योजनाओं का निकाला था टेंडर, नवंबर में बीड वैलिडिटी हुआ समाप्त

निगम की मनमानी से क्षुब्ध संवेदकों ने डीएम को लिखा पत्रअवधि विस्तार के लिए निविदाकारों से नहीं मांगा गया सहमति पत्र, संवेदकों ने निविदा रद्द करने की मांग की

नियम विरुद्ध बीड वैलिडिटी बढ़ाने का आरोपफोटो-नगर निगम सासाराम़ प्रतिनिधि, सासाराम नगर

नगर निगम की निविदा संख्या-03 को लेकर उठा विवाद अब तूल पकड़ने लगा है. लंबे समय से लंबित इस प्रक्रिया पर जब हाल ही में कार्रवाई शुरू हुई, तो संवेदकों ने नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया. क्षुब्ध संवेदकों ने नगर आयुक्त और जिलाधिकारी को पत्र लिखकर पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाये हैं. संवेदकों का आरोप है कि नगर निगम की सशक्त स्थायी समिति (स्टैंडिंग कमेटी) ने अपने कुछ चहेते संवेदकों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से यह सारी कवायद की है.

शिकायतकर्ता संवेदकों के अनुसार, इस कार्य के लिए 12 जून 2025 को निविदा प्रकाशित की गयी थी. संवेदकों को 11 जुलाई 2025 तक निविदा अपलोड करने का समय दिया गया था, जिसके बाद निष्पादन के लिए 120 दिनों की अवधि निर्धारित थी. हालांकि, विधानसभा चुनाव की घोषणा और अधीक्षण अभियंता की अनुपलब्धता के कारण तय समय सीमा में निविदा का निष्पादन नहीं हो सका. इससे नाराज कई संवेदकों ने परिमाण विपत्र और अग्रधन के रूप में जमा की गयी राशि वापस करने के लिए आवेदन दिया, लेकिन उनकी राशि वापस नहीं की गयी. संवेदकों ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से आरोपित किया है कि सशक्त स्थायी समिति ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर निविदा की ”बीड वैलिडिटी” बढ़ा दी. इस नियम विरुद्ध निर्णय के आधार पर ही तीन फरवरी 2026 को पत्रांक संख्या-367 के तहत दावा-आपत्ति प्रकाशित की गयी है. संवेदकों का कहना है कि विभागीय प्रावधानों के तहत निर्धारित समय सीमा में निविदा प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए थी, लेकिन निकाय ने इसका अक्षरश: पालन नहीं किया. आरोप है कि अधीक्षण अभियंता द्वारा तकनीकी बीड पर लिये गये निर्णय के दो माह बाद ईमेल प्राप्त हुआ और उसके भी दो माह बाद केवल कार्यालय के सूचना पट्ट पर दावा-आपत्ति चस्पा की गयी. किसी भी निविदाकार को इसकी व्यक्तिगत सूचना नहीं दी गयी, जिससे पूरी प्रक्रिया संदेहात्मक हो गयी है. विभाग की छवि धूमिल होने की बात कहते हुए संवेदकों ने पारदर्शिता की मांग की है.

416 संवेदकों का फंसा है पैसा

नगर निगम की इस निविदा प्रक्रिया में कुल 416 संवेदकों का पैसा पिछले आठ महीने से फंसा हुआ है. गौरतलब है कि यह पूरी योजना महज 14.08 करोड़ रुपये की है, लेकिन संवेदकों के अग्रधन (अर्नेस्ट मनी) के रूप में करीब 124 करोड़ रुपये अटके हुए हैं. बड़ी राशि लंबे समय तक ब्लॉक रहने के कारण संवेदक आर्थिक मानसिक दबाव में हैं और अविलंब समाधान की गुहार लगा रहे हैं.

क्या कहते हैं नगर आयुक्त

इस पूरे प्रकरण पर नगर आयुक्त विकास कुमार ने बताया कि उक्त निविदा के संबंध में विभाग से आवश्यक पत्राचार किया गया है. विभाग की ओर से जो भी दिशा-निर्देश प्राप्त होंगे, उनके आलोक में ही आगे की विधि सम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी.

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