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Sonepur Mela : सोनपुर मेला में अध्यात्म व भारतीय संस्कृति से अवगत हो रहे लोग

Updated at : 03 Dec 2024 9:41 PM (IST)
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Sonepur Mela : सोनपुर मेला में अध्यात्म व भारतीय संस्कृति से अवगत हो रहे लोग

आधुनिकता और भागदौड़ से भरी इस दुनिया में, कुछ आयोजन लाखों लोगों को अपने से महान किसी चीज के लिए एक साथ लाने की शक्ति रखती हैं. इसी मे एक स्थान हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला का है.

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सोनपुर. आधुनिकता और भागदौड़ से भरी इस दुनिया में, कुछ आयोजन लाखों लोगों को अपने से महान किसी चीज के लिए एक साथ लाने की शक्ति रखती हैं. इसी मे एक स्थान हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला का है. यह क्षेत्र एक पवित्र तीर्थ स्थल के लिए दुनिया-भर मे जाना जाता है. यह मेला दुनिया का सबसे बड़ा पशु मेला के लिए भी जाना जाता है. यह उन लाखों श्रद्धालुओ को आकर्षित करता है, जो स्वयं को पापों से शुद्ध करने और आध्यात्मिक मुक्ति पाने के लिए हरिहर क्षेत्र सोनपुर के पवित्र गंगा एवं गंडक में स्नान करते हैं. वे न केवल आध्यात्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला में शामिल होते है बल्कि ऐसी यात्रा पर जो धार्मिक अध्यात्मिक सांस्कृति के लिए भी जाना जाता है. हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेले मे जाति, पंथ या लिंग का भेदभाव दूर कर लाखों लोग शामिल होते हैं.यहां आने वाले साधु-संत और श्रद्धालु विभिन्न आश्रमों, धार्मिक संगठनों के होते हैं. हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला आम जनमानस मे आध्यात्मिक भूमिका निभाता है,जो आम लोगो पर एक जादुई प्रभाव डालता है. यह मेला आध्यात्मिकता, कर्मकांड की परंपराओं, और सामाजिक और सांस्कृतिक रीति-रिवाजों और ज्ञान को अत्यंत समृद्ध बनाती है.जैसा कि हम जानते हैं यह मेला कार्तिक पूर्णिमा के अवसर गंगा स्नान को लेकर हरिहर क्षेत्र सोनपुर में आयोजित होता है, इसमें विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियां शामिल होती हैं, जिससे यह सांस्कृतिक रूप से विविध त्योहार बन जाता है.यह मेला ज्ञान और कौशल प्रदान करने और का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है.हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला अनुष्ठानों का जीवंत मिश्रण है, जिसके केंद्र में पवित्र स्नान और बाबा हरिहरनाथ पर जलाभिषेक शामिल होता है. यहाॅ गंगा और गंडक नदी मे पवित्र स्नान होता है. इस मेला को छतर मेला के नाम से जाना जाता है. लाखों भक्त इस महत्वपूर्ण स्नान करने के लिए इकट्ठा होते हैं. ऐसा माना जाता है कि इन पवित्र जल में डुबकी लगाने से पापों से मुक्ति मिलती है, व्यक्तियों और उनके पूर्वजों दोनों को पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति मिलती है, और अंततः उन्हें मोक्ष मिलती है.लोग नदी के किनारे पूजा में संलग्न होते हैं और साधुओं एवं संतों के नेतृत्व में आध्यात्मिक प्रवचनों में भाग लेते है. इसके अलावा सरकार की ओर से चलायी जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी प्रदर्शनी के माध्यम से लोग प्राप्त करते हैं.बड़े-बड़े कलाकारों का कार्यक्रम भी लोगो को मेले मे देखने और सुनने को मिलता है.

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