Chhapra News : फूलों की खेती ने दिघवारा को दी है एक अलग पहचान, समृद्ध हो रहे हैं किसान

Author Alok kumar
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Chhapra News : फूलों की खेती ने दिघवारा को दी है एक अलग पहचान, समृद्ध हो रहे हैं किसान

Chhapra News : फूलों की खेती ने दिघवारा के किसानों को एक अलग पहचान दी है और अब दिघवारा प्रखंड अधीन विभिन्न क्षेत्रों में वाणिज्यिक स्तर पर फूलों की खेती हो रही है जिससे किसानों को अच्छी आमदनी होती है.

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दिघवारा. फूलों की खेती ने दिघवारा के किसानों को एक अलग पहचान दी है और अब दिघवारा प्रखंड अधीन विभिन्न क्षेत्रों में वाणिज्यिक स्तर पर फूलों की खेती हो रही है जिससे किसानों को अच्छी आमदनी होती है. फूलों की खेती से प्राप्त अच्छी आमदनी से किसानों का दैनिक जीवन भी महकने लगा है. कल तक जहां गंगा पार के अकिलपुर पंचायत के विभिन्न गांवों में फूलों की खेती होती थी, अब नगर पंचायत क्षेत्र के चकनूर और सैदपुर में भी दर्जनों किसानों ने फूलों की खेती करनी शुरू कर दी है. छपरा हाजीपुर निर्माणाधीन फोरलेन सड़क के बगल से गुजरने के क्रम में आपको खेतों में फूलों की खेती देखने को मिलेगी जो एक मनभावन दृश्य भी उपस्थित करता है. किसानों द्वारा गेंदा, चेरी, चंपा व गुलदावदी समेत कई अन्य वैरायटी के फूलों का उत्पादन होता है.

लग्न के सीजन में बढ़ जाती है फूलों की मांग, होती है अच्छी आमदनी

लोगों की मानें तो नगर पंचायत के चकनूर व सैदपुर गांव में फोरलेन से सटे दोनों और की खेतों में कई जगहों पर कई वैरायटी के फूलों की खेती होती है. कई खेतों में किसान खुद फूलों की खेती करते हैं तो कई जगहों पर किराए की जमीन को लेकर फूलों की खेती की जाती है.

वैवाहिक आयोजनों व मंदिरों में होती है फूलों की खपत

गंगा पार के अकिलपुर पंचायत में पिछले दो दशकों से फूलों की खेती वाणिज्यिक स्तर पर होती है. यह क्षेत्र पूरे जिले में फूलों की खेती के लिए मशहूर है. दोनों ओर से गंगा के बीच घिरे अकिलपुर पंचायत में खेतों से उत्पादित होने वाले फूलों को पहले दिघवारा व दानापुर भेजा जाता है जहां से इन फूलों को प्रदेश के विभिन्न जिलों में भेज कर किसान अच्छी आमदनी प्राप्त करते हैं. अकिलपुर पंचायत में दर्जनों घरों में खेतों से प्राप्त फूलों की माला बनाई जाती है और फिर उसे बाजारों में बेचा जाता है. पटना के हनुमान मंदिर, आमी के मां अंबिका भवानी मंदिर, सोनपुर के बाबा हरिहरनाथ मंदिर व मुजफ्फरपुर के बाबा गरीबनाथ मंदिर समेत छपरा, हाजीपुर, सोनपुर व आरा आदि जगहों के मंदिरों में भी इन जगहों के उत्पादित फूलों की खपत होती है.किसान रमेश भगत, सुभाष भगत व योगेंद्र सिंह का कहना है कि फूलों की मांग खूब है. सीजन में अच्छी आमदनी हो जाती है. गेंदा फूल की मांग सबसे अधिक है.साइज के अनुसार माला की बिक्री होती है. खुले फूलों की भी खूब मांग है.फूलों की खेती ने किसानों को एक अच्छी पहचान दी है,इसमें कोई संदेह नहीं है. शिक्षक कुमार पंकज व हृदयानंद यादव बताते हैं कि फूलों की खेती से खेतों की सुंदरता बढ़ जाती है और यह एरिया सेल्फी जोन बन जाता है. युवाओं को इन खेतों के समीप खूब रील बनाते देखा जाता है. फूलों की खेती फिजाओं में भी खुशबू बिखेरती है.

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