छपरा सिविल कोर्ट ने 17 साल पुराने हत्या मामले में सुनाया बड़ा फैसला, तीन दोषियों को आजीवन कारावास

Published by : Sakshi kumari Updated At : 22 May 2026 10:42 AM

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छपरा व्यवहार न्यायालय की तस्वीर

छपरा में 17 साल पुराने हत्या मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. जिला और सत्र न्यायाधीश अष्टम की अदालत ने हत्या के तीन दोषियों को आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है.

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Chhapra News: (विकास कुमार) छपरा में 17 साल पुराने हत्या मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. जिला और सत्र न्यायाधीश अष्टम की अदालत ने हत्या के तीन दोषियों को आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है. मामला वर्ष 2009 में हुए चाकूबाजी और बाद में घायल युवक की मौत से जुड़ा था.

तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा

जिला और सत्र न्यायाधीश अष्टम अनिल कुमार भारद्वाज ने छपरा मुफस्सिल थाना कांड संख्या-21/2009 में सुनवाई पूरी करने के बाद खैरा थाना क्षेत्र के खैरा निवासी और वर्तमान में हेमनगर निवासी सुबोध राय, सुधीर राय और वीरेंद्र राय को दोषी करार दिया. अदालत ने तीनों को भादवि की धारा 302/34 के तहत आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई.

जुर्माना नहीं देने पर अतिरिक्त सजा

अदालत ने दोषियों को भादवि की धारा 341/34 के तहत एक माह की अतिरिक्त सजा भी सुनाई है. साथ ही अर्थदंड जमा नहीं करने पर छह माह की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी.

रेलवे क्वार्टर विवाद में हुआ था हमला

मामले में सोनपुर थाना क्षेत्र के रहर दियर निवासी और वर्तमान में शिव टोला रामनगर निवासी संजीत कुमार यादव ने पटना के राजेश्वर हॉस्पिटल में जख्मी हालत में फर्द बयान दर्ज कराया था. बयान में उन्होंने बताया था कि एक फरवरी 2009 की शाम ड्यूटी से घर लौटने के दौरान साढ़ा डाला सेंट्रल बैंक के पास तीनों आरोपियों ने उन्हें घेर लिया.

चाकू से हमला कर किया था गंभीर रूप से घायल

फर्द बयान के अनुसार आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए कहा था कि रेलवे क्वार्टर खाली कराने को लेकर वे उन्हें काफी दिनों से खोज रहे थे. इसके बाद तीनों ने मिलकर चाकू से हमला कर दिया, जिससे संजीत कुमार यादव गंभीर रूप से घायल हो गये. शोर सुनकर आसपास के लोग पहुंचे तो आरोपी मौके से फरार हो गये.

इलाज के दौरान हो गई थी मौत

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने घायल को सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां से उन्हें पटना रेफर कर दिया गया. इलाज के दौरान ही उनकी मौत हो गई. इसके बाद पुलिस ने 20 जून 2009 को मामले को हत्या में परिवर्तित कर जांच शुरू की थी.

आठ गवाहों की गवाही के बाद आया फैसला

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक विमल चंद्र ने चिकित्सक और अनुसंधानकर्ता समेत कुल आठ गवाहों की गवाही अदालत में कराई. सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई.

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लेखक के बारे में

By Sakshi kumari

साक्षी देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की धरती सीवान से आती हैं. पत्रकारिता में अपनी करियर की शुरुआत News4Nation के साथ की. 3 सालों तक डिजिटल माध्यम से पत्रकारिता करने के बाद वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार की राजनीति में रुचि रखती हैं. हर दिन नया सीखने के लिए इच्छुक रहती हैं.

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