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Chhapra News : बीडीसी ने मनरेगा के अधिकारियों पर लगाया कमीशनखोरी का आरोप

Updated at : 05 Oct 2024 9:40 PM (IST)
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Chhapra News : बीडीसी ने मनरेगा के अधिकारियों पर लगाया कमीशनखोरी का आरोप

chhapra news : प्रखंड में मनरेगा में कमीशन के कारण योजनाओं को पूरा नहीं कराने, रोक कर रखने और काम से पहले पैसा वसूलने का एक आरोप लगा कर जारी किया गया वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है.

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मढ़ौरा. प्रखंड में मनरेगा में कमीशन के कारण योजनाओं को पूरा नहीं कराने, रोक कर रखने और काम से पहले पैसा वसूलने का एक आरोप लगा कर जारी किया गया वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. प्रखंड के भुआलपुर पंचायत के बीडीसी सदस्य ने मामले में जिलाधिकारी से लिखित शिकायत करके भी न्याय की गुहार लगायी है. सोशल साइट्स पर भी लाइव आकर अपनी पीड़ा को सबके सामने रखा है. जिसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. बीडीसी सदस्य विश्वकर्मा कुमार राय उर्फ भरदूल प्रसाद ने जिलाधिकारी को लिखे अपने आवेदन में यह आरोप लगाया है कि मनरेगा की योजना को पास करने में कार्यक्रम पदाधिकारी से लेकर मनरेगा कर्मी तक सभी लोग पहले ही तीन प्रतिशत कमीशन ले लेते हैं. रिश्वत की राशि लेने के बाद भी समय से काम नहीं किया जाता है. बीडीसी द्वारा कमीशन की राशि मनरेगा कर्मी को कई किश्तों में फोन पे पर लेने की बात कहीं गयी. बीडीसी ने यह कहा है कि वह गरीब आदमी है जनता उसे चुनकर भेजी है. वह कर्ज में पैसा लेकर कमीशन के तौर पर दिया है. उसकी योजना में एक साल पहले से एंट्री है जो अभी तक पेंडिंग है. अपनी योजना का वर्क कोड आरसी 20720010 और आरसी 20720012 की चर्चा करते हुए कहा है कि दोनों योजना पर पीटीए अवध बिहारी ने 12 हजार लिया है. टीएस कराने के लिए बीएफटी प्रदीप कुमार को दस हजार दो बार में दिया है. इतना रुपया रिश्वत में देने के बाद भी उसका काम पेंडिंग है. यह भी कहा है कि रिश्वत का रुपया जिन पदाधिकारी ने लिया है इसका उसके पास सबूत भी मौजूद है. यह भी कहा है की कमीशन पहले से सेट है. इसमें प्रोग्राम पदाधिकारी पांच प्रतिशत, कनीय अभियंता पांच प्रतिशत, पीआरएस छह प्रतिशत, एकाउंटेट दो प्रतिशत और डाटा ऑपरेटर का एक प्रतिशत लिया जाता है. इनका कुल कमीशन 21 प्रतिशत होता है. इसके बाद भी सुपर चेक करने के लिए दो प्रतिशत अलग से जिला में कमीशन लिया जाता है. इस मामले को लेकर पीआरएस प्रदीप कुमार से पूछे जाने पर बताया कि दोनों योजनाएं अपलोड है. उसके स्तर पर कही अवरोध नहीं रहा है. कनीय अभियंता और सहायक अभियंता से तकनीकि स्वीकृति प्राप्त नही होने से काम शुरु नहीं हो सका है.

क्या कहते हैं मनरेगा प्रोग्राम पदाधिकारी

विभाग पर लगे गंभीर आरोपों के सम्बंध में मनरेगा पीओ ने कहा कि आरोप बेबुनियाद है. अगर आवेदक के पास साक्ष्य उपलब्ध है तो उसे भी प्रस्तुत करना चाहिये. बिना साक्ष्य आरोप लगाना उचित नहीं है.

विनोद कुमार, मनरेगा प्रोग्राम पदाधिकारी, मढ़ौरा

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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