22 के बदले मात्र 11 से ही मांगा गया स्पष्टीकरण

Published at :11 Jan 2016 6:46 PM (IST)
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22 के बदले मात्र 11 से ही मांगा गया स्पष्टीकरण

22 के बदले मात्र 11 से ही मांगा गया स्पष्टीकरण मामला जेएनके विश्वविद्यालय से बीएड की डिग्री लेनेवाले शिक्षकों का संवाददाता, छपराजम्मू एवं कश्मीर विश्वविद्यालय से बीएड कर नियोजित होनेवाले शिक्षकों के साथ विभाग द्वारा दोहर मानदंड अपनाया जा रहा है. ऐसे 22 शिक्षकों में से मात्र 11 से स्पष्टीकरण मांगा गया है, जबकि शेष […]

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22 के बदले मात्र 11 से ही मांगा गया स्पष्टीकरण मामला जेएनके विश्वविद्यालय से बीएड की डिग्री लेनेवाले शिक्षकों का संवाददाता, छपराजम्मू एवं कश्मीर विश्वविद्यालय से बीएड कर नियोजित होनेवाले शिक्षकों के साथ विभाग द्वारा दोहर मानदंड अपनाया जा रहा है. ऐसे 22 शिक्षकों में से मात्र 11 से स्पष्टीकरण मांगा गया है, जबकि शेष को वंचित रखते हुए वेतन भुगतान भी किया जा रहा है. उक्त बातें इससे प्रभावित शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री के जनता दरबार समेत, डीएम, डीडीसी व माध्यमिक शिक्षा निदेशक से गुहार लगाते हुए कही है. अभ्यर्थियों ने अपने दिये गये आवेदन में कहा है कि जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, स्थापना ने निदेशक माध्यमिक शिक्षा के ज्ञापांक 821, दिनांक 17 जुलाई, 2015 के आधार पर जम्मू-कश्मीर को अमान्य संस्था की सूची में शामिल होने की बात कहते हुए स्पष्टीकरण की मांग की है. अभ्यर्थियों ने कहा है कि निदेशक के उक्त पत्रांक के बाद चार सितंबर, 2015 को अपने पत्रांक 1705 के अनुसार, उक्त मामले को सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन होने का हवाला देते हुए पद को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है, साथ ही न्यायालय आदेश आने के बाद अग्रेतर कार्रवाई का निर्देश देने की बात कही है. स्थापना कार्यालय ने न तो निदेशक के उक्त पत्र का ध्यान रखा और ना ही पत्रांक 893, दिनांक 13.06.2013 व पत्रांक 878, दिनांक सात जून, 2013 के निर्देश को माना. सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश की अनदेखी कर शो कॉज मांगा व सेवा समाप्ति की कार्रवाई की बात कह रहे हैं. इस मामले में एनसीइटी के अगस्त, 2015 में जारी संस्था की मान्यता के पत्र को एवं स्वयं अपने पत्रांक 821 दिनांक 17.7.2015 का संज्ञान लिया जिसमें अमान्य संस्था की सूची में जम्मु कश्मीर विवि का नाम तक नहीं है. अभ्यर्थियों ने इस प्रकार की कार्रवाई से मानसिक रूप से प्रताड़ित होने की बात कहते हुए सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश आने तक पद पर बने रहने व काम के बदले वेतन दिये जाने की मांग की है. आवेदन देनेवालों में यादव क्षत्रीय उवि, खोदाइबाग की शिक्षक नसरीन आरा समेत अन्य 11 अभ्यर्थी शामिल हैं.

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