गोदना-सेमरिया मेला शुरू

Published at :16 Nov 2013 11:05 PM (IST)
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गोदना-सेमरिया मेला शुरू

गुड्डू राय, गोदना-सेमरिया (सारण)प्रसिद्ध धार्मिक तथा पौराणिक गोदना-सेमरिया मेला शनिवार को शुरू हो गया. मेले के उद्घाटन की महज रस्म अदायगी शेष रह गयी है, जो देर संध्या पूरी हो जायेगी. गंगा-सरयू के पावन संगम पर लगनेवाले इस मेले में आये श्रद्धालु कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर शनिवार की आधी रात से ही मोक्ष प्राप्ति […]

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गुड्डू राय, गोदना-सेमरिया (सारण)प्रसिद्ध धार्मिक तथा पौराणिक गोदना-सेमरिया मेला शनिवार को शुरू हो गया. मेले के उद्घाटन की महज रस्म अदायगी शेष रह गयी है, जो देर संध्या पूरी हो जायेगी. गंगा-सरयू के पावन संगम पर लगनेवाले इस मेले में आये श्रद्धालु कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर शनिवार की आधी रात से ही मोक्ष प्राप्ति के पवित्र डुबकी लगायेंगे. मेले में लाखों की संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु, वृद्ध-बच्चे, साधु-संत पर्यटक पहुंचे हुए हैं. गोदना से लेकर सेमरिया तक सात किमी के लंबे विस्तृत भू-भाग में लगनेवाले यह मेला धार्मिक, ऐतिहासिक, पौराणिक, सामाजिक व सांस्कृतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. इस मेले में लोग न केवल मोक्ष प्राप्ति के लिए आते हैं, बल्कि यहां एक साथ कई सामाजिक -धार्मिक संस्कृतियों का मिलन भी होता है. न्याय शास्त्र के प्रणोता महर्षि गौतम ऋषि का कर्म क्षेत्र, महर्षि गौतम की पत्नी अहिल्या की उद्धार स्थली, वेदज्ञ महर्षि श्रृंगी ऋषि की तपोस्थली होने के कारण इस क्षेत्र की विशेष महत्ता है. गंगा व सरयू नदी के पावन संगम की भी धर्म ग्रंथों में विशेष महत्ता बतायी गयी है. भगवान विष्णु के दाहिने पैर के अंगूठे से गंगा और बायें पैर के अंगूठे से सरयू का निकास है और गोदना-सेमरिया में दोनों नदियों के मिलन स्थल को भगवान विष्णु का साक्षात दर्शन माना जाता है. इस मेले को लेकर यह भी मान्यता है कि नारी से पत्थर बनी महर्षि ऋषि की पत्नी अहिल्या का उद्धार भगवान श्रीराम ने स्वयं किया था. इसी उपलक्ष्य में यह मेला लगता है. कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर मोक्ष प्राप्ति के साथ-साथ मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए भी श्रद्धालु यहां स्नान व पूजा-अर्चना करने आते हैं. पुत्र प्राप्ति, वर-वधू शादी के लिए भी कई तरह संस्कार व मुंडन कराये जाते हैं. मेले में काफी संख्या में दुकानें सजी हैं, जिसमें कपड़ा, खिलौना, सौंदर्य प्रसाधन, बरतन, मिट्टी के बरतन, लोहा के औजार, लकड़ी के नक्काशीदार फर्नीचर, सिपुली-मौनी जैसे पारंपरिक खिलौने से लेकर चाइनीज खिलौनों की दुकानें शामिल हैं. मिट्टी व कपड़े से निर्मित खिलौने हस्तकला का नमूना पेश कर रहे हैं. मेले में मनोरंजन के भी साधन हैं. झूला व खेल-तमाशावाले जगह-जगह जमे हुए हैं. प्रशासन की ओर से भी सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है. प्रशासन की ओर से सभी घाटों पर सुरक्षा का व्यापक प्रबंध किया गया है. नदी में एसडीआरएफ की टीम को लगाया गया है. मेला क्षेत्र में पुलिस व दंडाधिकारियों को तैनात किया गया है. सुबह से कार्यपालक पदाधिकारी राजीव प्रकाश राय तथा बीडीओ रणंजय सिंह मेला क्षेत्र में घूमते रहे और तैयारियों का जायजा लेते रहे. स्वास्थ्य विभाग की ओर से चिकित्सा शिविर भी लगाया गया है. मेलार्थियों की सुविधा हेतु एनएच 19 पर गोदना से सेमरिया के बीच बड़े वाहनों का परिचालन रोक दिया गया है. रेलवे प्रशासन की ओर से छपरा से बलिया के बीच विशेष ट्रेन की व्यवस्था की गयी है.

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