जिले में झुलसने लगी धान की फसल

Published at :25 Sep 2015 2:11 AM (IST)
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जिले में झुलसने लगी धान की फसल

संवाददाता : छपरा (सारण) जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की अनुशंसा जिला प्रशासन ने राज्य सरकार से की है. एक सप्ताह और बारिश नहीं हुई, तो जिले में खरीफ फसलें नहीं बचायी जा सकेंगी. धान की रोपनी तो किसानों ने किसी तरह कर दी, लेकिन खेतों में लगी धान की फसल बारिश के अभाव में […]

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संवाददाता : छपरा (सारण) जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की अनुशंसा जिला प्रशासन ने राज्य सरकार से की है.

एक सप्ताह और बारिश नहीं हुई, तो जिले में खरीफ फसलें नहीं बचायी जा सकेंगी. धान की रोपनी तो किसानों ने किसी तरह कर दी, लेकिन खेतों में लगी धान की फसल बारिश के अभाव में मुरझा रही हैं.

इसे देख कर किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें पड़ गयी हैं. अनियमित माॅनसून व कम बारिश के कारण जिले में विकट परिस्थिति उत्पन्न हो गयी है. डीजल अनुदान किसानों को उपलब्ध कराकर खरीफ फसल को बचाने की सरकार व प्रशासन की कोशिशें जारी हैं. किसानों पर प्रकृति की मार भारी पड़ रही है.

फसलों की क्षति का आकलन शुरू : खरीफ फसल को कम बारिश के कारण हुई क्षति का आकलन शुरू कर दिया गया है. सभी पंचायतों में कृषि विभाग के विशेषज्ञों की टीम को भेजा जा रहा है और फसलों के नुकसान का भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है.
अब तक की रिपोर्ट के अनुसार,
जिले में करीब 20 प्रतिशत खरीफ फसल को क्षति पहुंचने की आशंका है और अगले एक सप्ताह में बारिश नहीं होने पर और काफी क्षति होने की आशंका जतायी जा रही है.
इस माह काफी कम हुई बारिश : अबतक जिले में 50 फीसदी कम बारिश हुई है. सबसे खराब स्थिति सितंबर की है. इस माह के 24 दिनों से 163 एमएम औसत बारिश होनी चाहिए. इसके विरुद्ध महज 10 एमएम ही बारिश हुई है. खरीफ फसल के दौरान जिले में 886.48 एमएम बारिश होनी चाहिए, लेकिन अब तक महज 439.10 एमएम बारिश हो सकी है, जो 50 फीसदी से भी कम है.
डीजल अनुदान के लिए नौ करोड़ स्वीकृत : जिले में किसानों को उपलब्ध कराने के लिए डीजल अनुदान के मद में नौ करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत है, जिसमें से अब तक छह करोड़ रुपये उपलब्ध कराये जा चुके हैं. उपलब्ध राशि में से किसानों के बीच एक करोड़ 24 लाख रुपये का वितरण हुआ है. डीजल अनुदान की राशि के वितरण की गति धीमी है.
सुखाड़ के बीच विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो जाने से डीजल अनुदान की राशि वितरण का कार्य बाधित हो रहा है. अब तक सामान्य वर्ग के किसानों के लिए चार करोड़ 76 लाख 5360 रुपये, अनुसूचित जाति के लिए एक करोड़ पांच लाख 71 हजार 400 रुपये तथा अनुसूचित जनजाति को आठ लाख 71 हजार 240 रुपये की राशि उपलब्ध करायी गयी है.
81 हजार हेक्टेयर में हुई है धान की रोपनी : जिले में 86 हजार हेक्टेयर में धान की फसल लगाने का लक्ष्य निर्धारित था. इसके विरूद्ध 81 हजार 210 हेक्टेयर में ही धान की रोपनी हो पायी. निर्धारित लक्ष्य के 95 प्रतिशत भूमि पर ही धान के फसल लगायी जा सकी है. धान की तुलना में मक्के की खेती बेहतर हुई है. 33 हजार हेक्टेयर के विरुद्ध 34 हजार 720 हेक्टेयर में मक्के की फसल लगायी गयी है, जो 105 प्रतिशत है.
कृषि वैज्ञानिक दे रहे हैं बचाव का सुझाव : कृषि विभाग के निर्देश के आलोक में कृषि विज्ञान केंद्र मांझी कृषि वैज्ञानिक गांवों में जाकर किसानों को सूखे से निबटने का उपाय बता रहे हैं और फसलों को बचाने का प्रयास हो रहा है.
कृषि वैज्ञानिकों के द्वारा खरीफ फसल बचाने और रबी फसल को समय पर लगाने के विकल्प भी बता रहे हैं. खास कर जिले के सूखाग्रस्त इलाकों में कृषि वैज्ञानिक बचाव के उपाय के प्रचार-प्रसार पर विशेष जोर दे रहे हैं.
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