पति की दीर्घायु के लिए महिलाएं करेंगी तीज

Published at :16 Sep 2015 7:55 AM (IST)
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पति की दीर्घायु के लिए महिलाएं करेंगी तीज

शिव-पार्वती की होगी आराधना ब्रह्मणों को दान में दी जायेगी शृंगार पेटी दिघवारा : हरतालिका तीज एक ऐसा त्योहार है, जो पति-पत्नी के संबंध की प्रगाढ़ता को समर्पित है. यह त्योहार पति-पत्नी के रिश्तों को मजबूती प्रदान करता है. सुहागिन स्त्रियां पति की लंबी उम्र, उनके स्वास्थ्य, सानंद व सफल होने की कामना से उनके […]

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शिव-पार्वती की होगी आराधना
ब्रह्मणों को दान में दी जायेगी शृंगार पेटी
दिघवारा : हरतालिका तीज एक ऐसा त्योहार है, जो पति-पत्नी के संबंध की प्रगाढ़ता को समर्पित है. यह त्योहार पति-पत्नी के रिश्तों को मजबूती प्रदान करता है. सुहागिन स्त्रियां पति की लंबी उम्र, उनके स्वास्थ्य, सानंद व सफल होने की कामना से उनके लिए व्रत करती हैं. प्रखंड अधीन क्षेत्रों में आज हजारों महिलाएं तीन व्रत करती नजर आयेंगी.
सोलह शृंगार का मौका देता है तीज
तीज की तैयारी महिलाएं काफी पहले से करना शुरू कर देती है. सुहाग की जितनी भी चीजें होती हैं, उन सभी को नया खरीदने और तीज वाले दिन पहनने की परंपरा है. पर्व के एक दिन पूर्व महिलाएं घर की साफ-सफाई कर स्नान करने के बाद शुद्ध सात्विक भोजन करती हैं.
तीज के दिन खजूर व पिरिकिया जैसे कई मीठे पकवान बनाती हैं. नये वस्त्र पहन कर, हाथों में मेहंदी, पैरों में आलता लगा कर सोलह शृंगार करते हुए निर्जला रह कर पूजा-अर्चना करती हैं. इस पर्व में सुहागिन महिलाओं द्वारा भगवान शंकर व माता पार्वती की पूजा की जाती है. पंडितों को बुला कर उनके द्वारा पूजा करवाने व कथा सुनने की परंपरा है. पंडित जी कच्ची मिट्टी से महादेव व पार्वती की मूर्ति बनाते है एवं कथा सुनाते हैं. घी का दीपक जला कर आराधना की जाती है.
ब्राह्मणों को दी जाती है शृंगार पेटी : कथा श्रवण के पश्चात सुहागिन महिलाएं बाजार से लायी गयीं शृंगार पेटी या टोकड़ी को ब्राह्मणों के बीच दान करती हैं, जिसमें वस्त्र, आलता, बिंदी समेत शृंगार के कई सामान उपलब्ध होते हैं.
शंकरपुर रोड में दिखा महिलाओं का जमावड़ा : पर्व से एक दिन पूर्व मंगलवार को नगर पंचायत का शंकरपुर रोड महिला खरीदारों की भीड़ से गुलजार दिखा. आभूषण दुकान, कपड़े की दुकान, दर्जी की दुकानों समेत, किराना दुकानों में भी ग्राहकों की भीड़ दिखी. वहीं, कई महिलाएं दान करने के लिए शृंगार पेटी खरीदती नजर आयीं.
फलों की दामों में दिखी तेजी : पर्व को लेकर दिघवारा, आमी व शीतलपुर आदि बाजारों में कई अस्थायी फलों की दुकानें लगी नजर आयी. पर्व के कारण सेब को छोड़ अन्य फलों के दाम तल्ख दिखे. खरीदारों को फल खरीदने में ज्यादा जेबें ढीली करनी पड़ी. खीरा का रेट पर्व को लेकर हाइ दिखा. बाजार में 40 से 60 रुपये प्रति किलो खीरा बिकता नजर आया.
ऐसे पड़ा पर्व का नाम पड़ा हरितालिका तीज : व्रत कथा में शिवजी पार्वती को उनके तप की कहानी सुनाते हैं. नारद जी, पार्वती के पिता हिमालय के पास विष्णु के विवाह का प्रस्ताव लेकर गये थे.
परंतु पार्वती शिवजी से विवाह करने को इच्छुक थीं. वे दुखी होकर विलाप करने लगीं. इस पर उनकी सहेलियां उन्हें वन में ले गयीं, जहां पार्वती ने कठिन तप किया. भाद्र पद मास में शुक्ल पक्ष की तृतीय तिथि को उपवास रह कर पार्वती ने नदी के किनारे बालू से शिव की प्रतिमा बना कर पूजन किया एवं रात्रि जागरण किया.
शिवजी उनके तप से प्रकट हुए एवं उन्हें अपनी अर्धांग्नि के रूप में स्वीकार कर लिया. उसके बाद से ही स्त्रियां यह व्रत श्रद्धा से करने लगीं. चूंकि सहेलिया पार्वती को हर के ले गयी थी. इसलिए वर्त का नाम हरतालिका पड़ा, जिसे हरितालिका भी कहा जाता है.
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