मौत से जूझ रहे बाढ़पीड़ित

Published at :08 Sep 2013 2:24 AM (IST)
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मौत से जूझ रहे बाढ़पीड़ित

दिघवारा: बाढ़ के पानी ने नगर पंचायत के कई वार्डो को नुकसान पहुंचाया है. हर वार्ड में व्यापक स्तर पर नुकसान है, मगर वार्ड 12 में रह रहे लोगों की स्थिति चिंतनीय बनी हुई है. खादी भंडार से रेलवे लाइन पार करने के बाद सामने का इलाका वार्ड नं 12 है, जो झील का स्वरूप […]

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दिघवारा: बाढ़ के पानी ने नगर पंचायत के कई वार्डो को नुकसान पहुंचाया है. हर वार्ड में व्यापक स्तर पर नुकसान है, मगर वार्ड 12 में रह रहे लोगों की स्थिति चिंतनीय बनी हुई है. खादी भंडार से रेलवे लाइन पार करने के बाद सामने का इलाका वार्ड नं 12 है, जो झील का स्वरूप ले चुका हैं. हालात ऐसे है कि इस वार्ड के दर्जनों घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है एवं जिंदगी की उम्मीद के बीच लोगों ने घरों से पलायन करते हुए रेलवे लाइन के किनारे अपनी झोपड़ी डाल दी है. या यूं कहें तो जिंदगी की उम्मीद के बीच बाढ़ पीड़ित परिवारों ने मौत के बगल में अपना ठिकाना बना लिया है. जो अतिश्योक्ति नहीं कहीं जायेगी. अति व्यस्त रेल मार्ग होने के कारण पास से गुजरने वाली ट्रेन दिल को दहला देती है. ट्रेन गुजरने के वक्त परिवार की महिलाओं व बच्चों को बुजुर्ग हिम्मत न हारने की सलाह देते नजर आते हैं. विस्थापित लोगों ने अपने द्वारा बनाये अनिश्चित ठिकानों में अपने पशुओं को पनाह दे रखा है. कब कौन सी ट्रेन, इन दर्जनों परिवारों की खुशियां छीन ले, कहा नहीं जा सकता. प्रशासन को ऐसे पीड़ित परिवारों की सुधि लेने की फुरसत नहीं? रेलवे लाइन से सटे झोपड़ी में रह रहे विस्थापित परिवारों के लिए हमदर्दी के दो शब्द कहने वाला भी कोई नहीं है. शनिवार को इसी रेलवे लाइन के किनारे झोपड़ी बना कर रह रहे रामेश्वर राम से जब उनका तकलीफ पूछा गया तो उस बूढ़े ने निराश भाव से कहा क्या बताएं बाबू जिंदगी की परेशानियों से जूझ रहे है. सहारा देने वाला कोई नहीं. राहत के नाम पर प्लास्टिक मिला है, जो ट्रेन की रफ्तार की भेंट चढ़ गया. प्रशासन का चूड़ा गुड़ अब तक नहीं आया है. अब तो बस इसी की आस है कि सरकार द्वारा अनाज व नगद राशि कब तक हमारे दरवाजे पर पहुंचती है?

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