यहां हर मुराद होती है पूरी

* आस्था का केंद्र है चकनूर का बाबा गुप्तेश्वर नाथ मंदिर दिघवारा : गौरवशाली अतीत के धरोहरों से पूर्ण प्रमुख आस्था का केंद्र हैं दिघवारा नगर पंचायत के चकनूर अवस्थित बाबा गुप्तेश्वर नाथ मंदिर. कहते हैं, इस मंदिर में भक्तों द्वारा मांगी गयी हर मुरादों को बाबा गुप्तेश्वर नाथ पूरा करते हैं. सावन में बाबा […]
* आस्था का केंद्र है चकनूर का बाबा गुप्तेश्वर नाथ मंदिर
दिघवारा : गौरवशाली अतीत के धरोहरों से पूर्ण प्रमुख आस्था का केंद्र हैं दिघवारा नगर पंचायत के चकनूर अवस्थित बाबा गुप्तेश्वर नाथ मंदिर. कहते हैं, इस मंदिर में भक्तों द्वारा मांगी गयी हर मुरादों को बाबा गुप्तेश्वर नाथ पूरा करते हैं. सावन में बाबा गुप्तेश्वरनाथ की असीम अनुकंपा उनके भक्तों पर बरसाती है, यही कारण है कि यह मंदिर श्रद्धालुओं के आस्था केंद्र के रूप में विकसित होता जा रहा है.
* पौराणिक है मंदिर का इतिहास
चकनूर का बाबा गुप्तेश्वर नाथ मंदिर पौराणिक दृष्टिकोण से शक्तिपीठ स्थल आमी के समकालीन है. इसी स्थल पर आमी प्रस्थान करने के लिए भगवान शिव गुप्त रूप से प्रकट हुए थे, तभी से यह स्थल गुप्तेश्वर नाथ धाम से प्रसिद्ध हुआ.
* रामचरित मानस में उल्लेख
मंदिर के पौराणिक इतिहास पर गौर किया जाय, तो तुलसीदास रचित रामचरितमानस महाकाव्य में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि राजा दक्ष ने अपने यहां ब्रहर्षि यज्ञ का आयोजन करवाया, जिसमें शामिल होने के लिए तमाम इष्ट देवताओं को निमंत्रण भिजवाया था, इसमें देवतागण शामिल हुए और भगवान शिव के व्यक्तिगत व्यवहार से राजा दक्ष काफी आहत हुए. बदले की भावना से ग्रसित होकर राजा दक्ष ने वर्तमान आमीवाली जगह पर एक बार फिर यज्ञ का आयोजन करवाया, पर बेटी पार्वती व दामाद शिव को निमंत्रण नहीं भेजा. इस बात पर पार्वती काफी व्यथित हुई और यज्ञ स्थल पर आकर अग्नि कुंड में कूदते हुए यज्ञ में विघ्न डाला. यह खबर सुनते ही शिव काफी क्रोधित हुए और सती को पाने के लिए गुप्ता विधि से जिस स्थान पर प्रकट हुए, आज उसी स्थान पर बाबा गुप्तेश्वर नाथ मंदिर हैं.
* सावन की सोमवारी विशेष
विगत कई वर्षो से मंदिर की प्रसिद्धि को दूर–दराज के लोगों तक पहुंचाने के लिए स्थानीय लोगों द्वारा सावन की प्रत्येक सोमवारी को मंदिर परिसर से भव्य जलाभिषेक यात्रा निकाली जाती है. हाथी, घोड़े, बैंड बाजा व बोलबम के जयकारे के बीच हजारों नर नारी यात्रा में शामिल होकर नाचते–गाते अंबिका घाट आमी पहुंचते हैं, जहां से जलभरी कर बाबा गुप्तेश्वरनाथ पर जलाभिषेक करते हैं. सोमवारी को मंदिर में अवस्थित शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के लिए शिवभक्तों का तांता लगा रहता है.
* सावन की पूर्णिमा को लगता है भव्य मेला
ऐसे तो मंदिर परिसर में संपूर्ण सावन मास श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है, लेकिन सावन की पूर्णिमा को मंदिर परिसर में भव्य मेला लगता है. इसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है. दिन भर चकनूर का नभमंडल भोलेनाथ पर आधारित कर्णप्रिय गीतों व बोलबम के जयकारों से गुंजायमान रहता है.
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