फसलों के साथ-साथ किसानों के चेहरे पड़े पीले

Published at :02 Aug 2013 11:24 PM (IST)
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फसलों के साथ-साथ किसानों के चेहरे पड़े पीले

* सारण में सूखे की मार भारी पड़ रही खरीफ के उत्पादन पर ।। राजीव रंजन ।। छपरा : मौसम की बेरुखी के कारण सरकार द्वारा डीजल सब्सिडी की घोषणा के बावजूद फसलों के साथ–साथ किसानों के चेहरे भी पीले पड़ने लगे हैं. एक तो कम बारिश व सिंचाई साधनों की लचर व्यवस्था के कारण […]

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* सारण में सूखे की मार भारी पड़ रही खरीफ के उत्पादन पर

।। राजीव रंजन ।।

छपरा : मौसम की बेरुखी के कारण सरकार द्वारा डीजल सब्सिडी की घोषणा के बावजूद फसलों के साथसाथ किसानों के चेहरे भी पीले पड़ने लगे हैं. एक तो कम बारिश सिंचाई साधनों की लचर व्यवस्था के कारण जिले के किसान अब तक महज 23 हजार हेक्टेयर में धान की खेती कर पाये हैं. वहीं, लक्ष्य 86 हजार हेक्टेयर में खेती का रखा गया है. धान की रोपनी का उपयुक्त समय 15 जुलाई से 15 अगस्त होता है. आखिर, इस सावन के महीने में प्रतिकूल मौसम में किसान धान की रोपनी रोपे गये धान को बचाने का काम करें, तो कैसे करें.

* काफी कम हुई वर्षा

जिले में जुलाई में सामान्य वर्षापात 296.6 एमएम के विरुद्ध 72.6 एमएम औसत बारिश हुई, जो सामान्य वर्षापात से 224 एमएम कम है. वहीं, अगस्त में 291.4 एमएम वर्षापात का अनुमान है. परंतु, दो अगस्त तक जिले में वर्षा के स्थिति नगण्य है. सारण जिले में नहर से 22 हजार हेक्टेयर में तथा सरकारी निजी ट्यूबवेल से 72 हजार हेक्टेयर में सिंचाई का लक्ष्य कृषि नलकूप विभाग ने निर्धारित रखा है. परंतु, सारण जिले में कुल 208 ट्यूबवेल में से महज 54 के ही कार्यरत होने का दावा नलकूप विभाग के पदाधिकारी करते हैं. हालांकि, धरातल पर ये संख्या और कम है.

ऐसी स्थिति में सरकार के द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में पूरे जिले में आठ घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था की गयी है. परंतु, सरकारी नलकूपों की खराब स्थिति, जिसमें बिजली का कनेक्शन नहीं होने, खराब पड़े मोटर, नाला नहीं होना किसानों के लिए बेकार साबित हो रहा है. जिले के महज पांच फीसदी निजी किसानों के द्वारा अपने नलकूप को विद्युत से जोड़ने की बात विद्युत विभाग के पदाधिकारी बताते हैं. परंतु, उसका भी उनके पास कोई आंकड़ा नहीं है.

* डीजल सब्सिडी स्वीकृत

सारण जिले में महज 28 फीसदी ही धान की रोपनी होने तथा मक्के का आच्छादन 33 हजार, 50 हेक्टेयर में होने के मद्देनजर बिचड़े की सिंचाई तथा धान की रोपनी के लिए सरकार ने दो करोड़, 73 लाख 69 हजार रुपये सारण जिले के लिए स्वीकृत किये हैं. इसकी प्रथम किस्त के रूप में 94 लाख, 42 हजार, 305 रुपये का आवंटन विभिन्न प्रखंडों में उपावंटित कर दिया गया है.

* अनुदान प्राप्त करने के तरीके

धान या मक्का की सिंचाई के लिए किसान को प्रति एकड़ एक सिंचाई के लिए 250 रुपये प्रति एकड़ तीन सिंचाई हेतु 750 रुपये मिलेंगे. डीजल सब्सिडी एक एकड़ के लिए 25 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से 10 लीटर पर सब्सिडी दी जायेगी. इसके लिए किसानों को 24 जुलाई से ही अधिकृत विक्रेता के द्वारा डीजल खरीद की रसीद अपने पंचायत के अधिकृत कर्मी को जमा करेगा.

इसमें बीडीओ के द्वारा पंचायत सेवक, किसान सलाहकार तथा हल्का कर्मचारी में से किसी एक को आवेदन लेने की जिम्मेवारी दी गयी है. अनुश्रवण सह निगरानी समिति के ग्रामीण क्षेत्र के सात सदस्यों मुखिया अध्यक्ष, सदस्य सरपंच, पंचायत वार्ड के सदस्य, पूर्व मुखिया, पूर्व सरपंच, पंचायत समिति के संबंधित सदस्य, किसान सलाहकार, हलका कर्मचारी, पंचायत सेवक की उपस्थिति में सब्सिडी की राशि बंटेगी. वहीं नगर निकाय क्षेत्र में नगर परिषद के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष, गत चुनाव में हाड़े निकटतम उम्मीदवार, कार्यपालक पदाधिकारी, किसान सलाहकार, हलका कर्मचारी, या पंचायत सेवक की उपस्थिति में की जायेगी.

किसानों के द्वारा दिये गये आवेदन पर 15 दिन के अंदर आवेदन लेनेवाले अधिकृत कर्मचारी द्वारा जांच कर अर्हता रखनेवाले किसान को अनुदान के राशि कैंप लगा कर दी जायेगी. सारण जिले में अभी डीजल सब्सिडी की राशि का वितरण शुरू नहीं हो पाया है.

* सारण जिले में काफी बारिश होने के कारण महज 30 फीसदी क्षेत्र में ही धान की रोपनी हो पायी है. काफी कम बारिश कृत्रिम संसाधनों की कमी के कारण धान की फसल का उत्पादन पर प्रतिकूल असर की संभावना है.

डॉ वेद नारायण सिंह

डीएओ, सारण

* जिले में काफी कम बारिश के मद्देनजर सरकार द्वारा डीजल सब्सिडी मद में उपलब्ध करायी गयी राशि का उपावंटन सभी प्रखंडों में करते हुए प्रखंडों के प्रभारी वरीय उपसमाहर्ताओं या अन्य पदाधिकारियों को डीजल सब्सिडी वितरण में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है.

अभिजीत सिन्हा

डीएम, सारण

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