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महाशिवरात्रि पर रात्रि जागरण का है विशेष महत्व

Updated at : 13 Feb 2020 1:12 AM (IST)
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महाशिवरात्रि पर रात्रि जागरण का है विशेष महत्व

छपरा : युवा संत व आध्यात्मिक गुरु और ओम ध्यान योग आध्यात्मिक साधना सत्संग सेवाश्रम के संस्थापक श्रीश्री शैलेश गुरुजी ने 21 फरवरी शुक्रवार को मनाये जाने वाली महाशिवरात्रि व्रत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देवाधिदेव महादेव का निराकार से साकार रूप में प्रकटीकरण का यह महान पर्व में रात्रि का विशेष महत्व है. […]

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छपरा : युवा संत व आध्यात्मिक गुरु और ओम ध्यान योग आध्यात्मिक साधना सत्संग सेवाश्रम के संस्थापक श्रीश्री शैलेश गुरुजी ने 21 फरवरी शुक्रवार को मनाये जाने वाली महाशिवरात्रि व्रत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देवाधिदेव महादेव का निराकार से साकार रूप में प्रकटीकरण का यह महान पर्व में रात्रि का विशेष महत्व है.

इस पर्व में व्रतियों द्वारा रात्रि जागरण करने का अत्यंत पुण्य फल प्राप्ति का उल्लेख मिलता है. शिव रहस्यानुसार और शिवपुराण में एक कथा प्रसंगानुसार इस व्रत में व्रतियों द्वारा श्रद्धा भक्ति व विश्वास के साथ जो रात्रि पर्यंत जागरण कर शिव उपासना पूजन करता है, उसके समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है.
शिवरात्रि पर चार प्रहर पूजन का विधान है. किंतु निशीथ काल पूजन उत्तम मानी जाती है, जिसका विशेष महत्व है. इस बार पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि में पूजन का श्रेष्ठ निशीथ काल प्रहर का मुहूर्त रात्रि 11:49 से 12:39 तक है.
वहीं ज्योतिष की दृष्टि में महाशिवरात्रि का व्रत शुक्रवार, उत्तराषाढ़ा तदोपरांत श्रवण नक्षत्र का योग विशेष संयोग बना रहा, जिससे इस दिन शिव शंकर का पूजन अर्चन करना अत्यंत फलदायी माना जा रहा है. प्रदोषकाल व महानिशीथ काल में चतुर्दर्शी का योग भी अपने आप मे श्रेष्ठ कर हैं.
महाशिवरात्रि व्रत का पारण 22 फरवरी शनिवार को प्रातः काल कर लिया जायेगा. श्री श्री शैलेश गुरुजी ने बताया कि स्कंदपुराणानुसार शिव मंदिर में दीप दान करने बृषभ उत्सर्ग (छोड़ना) या दान करने से शुभफल इंद्र के समान ऐश्वर्य श्री की प्राप्ति होती है. उन्होंने बताया कि ज्योतिष की दृष्टि से बारह राशियों(सूर्यादि द्वादश राशि) के जातकों के द्वारा किस शिवलिंग की पूजन करना श्रेष्ठ व उत्तम फलदायक होगा.
अपने राशिनुसार इस प्रकार करें पूजा
मेष :- महाशिवरात्रि के अवसर पर ताम्र या प्रबाल शिवलिंग का पूजन व दर्शन करें मंगल ही मंगल होगा.
वृषभ:- महाशिवरात्रि के अवसर पर स्फटिक मणि शिवलिंग का पूजन व दर्शन करें सकल मनोरथ विशेष सिद्ध होगी.
मिथुन:- उर्दू दूर्वा या पन्ना शिवलिंग का पूजन व दर्शन करें, अनुकूलता भव्यता बनी रहेगी.
कर्क:- मोती या रजत शिवलिंग का पूजन व दर्शन करें रोग का नाश हो कल्याण होगा.
सिंह:-पद्मराग या माणिक शिवलिंग का पूजन व दर्शन करें, श्रीलक्ष्मी व शांति की प्राप्ति होगी.
कन्या:- वैदूर्यमणि या अपामार्ग शिवलिंग का पूजन व दर्शन करें. शत्रु और चित शांत होगा.
तुला:- हीरक या कपूर शिवलिंग का पूजन व दर्शन शुभ व ऐश्वर्य दायक होगा.
वृश्चिक :- मरकत या मूंगा के शिवलिंग का पूजन व दर्शन करें, विशेष लाभ होगी.
धनु :- पोखराज या हल्दी के शिवलिंग का पूजन व दर्शन सुख समृद्धि धन दायक होगी.
मकर:- इंद्रनील शिवलिंग का पूजन व दर्शन करें यश कीर्ति सौभाग्य की प्राप्ति होगी.
कुंभ :- गंधमय या नीलम के शिवलिंग का पूजन-दर्शन करें कल्याण होगा.
मीन :- स्वर्ण शिवलिंग का पूजन व दर्शन करें ,श्री की प्राप्ति होती है.
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