Bihar News:पश्चिमी कोसी नहर परियोजना का दरभंगा व समस्तीपुर तक होगा विस्तार, छोटी नदियों को भी जोड़ा जाएगा

जल संसाधन तथा सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री संजय कुमार झा ने कहा कि मिथिला में बाढ़ के प्रभाव और इससे होने वाले नुकसान को कम करने के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर जल संसाधन विभाग तत्परता से काम कर रहा है.
दरभंगा जिले में शुक्रवार को बाढ़ से सुरक्षा की कई योजनाओं का कार्यारंभ करते हुए जल संसाधन तथा सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री संजय कुमार झा ने कहा कि मिथिला में बाढ़ के प्रभाव और इससे होने वाले नुकसान को कम करने के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर जल संसाधन विभाग तत्परता से काम कर रहा है.
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर महत्वाकांक्षी पश्चिमी कोसी नहर परियोजना के शेष कार्यों को पूरा करने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है. 1971 में शुरू हुई पश्चिमी कोसी नहर परियोजना के अंतिम चरण के सात निर्माण कार्यों का शिलान्यास खुद मुख्यमंत्री ने नवंबर 2019 में मधुबनी में किया.
इस परियोजना के नहरों में गाद सफाई के साथ क्षतिग्रस्त नहर बांधों एवं जीर्ण-शीर्ण संरचनाओं का पुनर्स्थापन कार्य तथा अधूरी नहर प्रणाली का निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया है, जिसे मार्च 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य है. परियोजना के पूर्ण होने से मधुबनी और दरभंगा जिले में 2 लाख 65 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी.
उन्होंने कहा कि जल संसाधन विभाग पश्चिमी कोसी नहर परियोजना का विस्तार कर दरभंगा और समस्तीपुर जिले के नये क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने पर विचार कर रहा है. इसके लिए एक विस्तृत योजना प्रतिवेदन तैयार कर लिया गया है, जिसमें नहर प्रणाली में भविष्य में 1193 क्यूसेक अतिरिक्त जलश्राव के साथ लगभग 48,300 हेक्टेयर नये क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी.
मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने सात निश्चय 2 में बिहार के हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचाने की घोषणा की है. इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जल संसाधन सहित पांच विभागों की टीमों ने पूरे राज्य में तकनीकी सर्वे कराया है. इसमें हजारों योजनाओं का चयन किया गया है, जिनसे राज्य के 7 लाख 79 हजार हेक्टेयर नये क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने की संभावना बन रही है.
इन योजनाओं में आहर-पईन, जल अधिशेष क्षेत्र से पानी उठा कर उसे पानी की कमी वाले क्षेत्र में ले जाना, चेक डैम, एण्टी फ्लड स्लुइस, नहरों का पुनर्स्थापन, विस्तारीकरण, नलकूप आदि प्रकार की योजनाएं हैं. इनके क्रियान्वयन के लिए संबंधित पांचों विभागों द्वारा जरूरी प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है. उन्होंने कहा कि बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है और हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचने से राज्य में कृषि क्रांति आएगी, किसानों की आय बढ़ेगी तथा विकास को नई रफ्तार मिलेगी.
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संजय कुमार झा ने कहा कि ‘इंटर लिंकिंग ऑफ रिवर्स’ के स्थान पर ‘इंट्रालिंकिंग ऑफ रिवर्स’ का कॉन्सेप्ट बिहार ने ही दिया है. राज्य सरकार केंद्रीय संस्था राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण की सहभागिता में प्रदेश की पांच से छह नदी जोड़ योजनाओं का प्रारूप विकसित करने की दिशा में अग्रसर है.
बिहार सरकार के अनुरोध पर इंट्रा स्टेट रिवर लिंकिंग के तहत बिहार की बागमती गंगा लिंक, बूढ़ी गंडक नून बाया गंगा लिंक और बागमती बूढ़ी गंडक लिंक योजना की संभाव्यता पर पुनर्विचार कर रहा है. कहा कि प्रदेश की छोटी-छोटी नदियों को जोड़ने के मुख्यमंत्री के निर्देश के तहत राज्य सरकार अपने संसाधनों से उत्तर बिहार में बागमती, कमला एवं कोसी बेसिन और दक्षिण बिहार में पुनपुन, किउल-हरोहर बेसिन में छोटी नदियों को आपस में जोड़ते हुए इन क्षेत्रों की बाढ़ की समस्या को दूर करने और सिंचाई क्षमता सृजन की संभावनाओं का पता लगा रही है.
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By Prabhat Khabar News Desk
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