बंगाल चुनाव 2026: डॉक्टरों को इलेक्शन ड्यूटी पर विवाद, स्वास्थ्य सेवाओं पर असर की आशंका

Updated at : 27 Mar 2026 5:45 AM (IST)
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Doctors Election Duty Controversy in Bengal Election 2026

Doctors Election Duty Controversy in Bengal: पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों को इलेक्शन ड्यूटी पर लगाने का मामला अब विवाद का रूप लेता जा रहा है. डॉक्टरों के संगठनों ने चुनाव आयोग के इस पैसले का विरोध किया है. डॉक्टरों का कहना है कि अगर उन्हें चुनाव की ड्यूटी में लगाया गया, तो अस्पताल में मरीजों की परेशानी बढ़ेगी.

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Doctors Election Duty Controversy in Bengal| कोलकाता, शिव राउत : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग के एक फैसले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. आयोग ने डॉक्टरों को भी चुनाव ड्यूटी में तैनात करने का निर्देश दिया है. हाल ही में एक मेडिकल कॉलेज को भेजे गये पत्र में चिकित्सकों को पीठासीन अधिकारी के रूप में काम करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि भ्रष्टाचार के आरोपों में दोषी ठहराये गये या नौकरी से हटाये गये शिक्षकों को किसी भी हालत में चुनाव ड्यूटी में शामिल नहीं किया जायेगा.

स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की आशंका

इस फैसले को लेकर विभिन्न स्तरों पर सवाल उठने लगे हैं. राज्य के सरकारी अस्पताल पहले से ही मरीजों के भारी दबाव में काम कर रहे हैं. कई मेडिकल कॉलेज, जिला और अनुमंडल अस्पतालों के साथ-साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी डॉक्टरों की कमी है. ऐसे में चिकित्सकों का मानना है कि चुनावी ड्यूटी का अतिरिक्त बोझ स्वास्थ्य सेवाओं को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है. हालांकि, आयोग का कहना है कि सभी नियुक्तियां तय प्रोटोकॉल के अनुसार ही की जा रही हैं.

नौकरी गंवा चुके शिक्षकों को भी जारी हुए आदेश

कुछ मामलों में ऐसे शिक्षकों को भी चुनाव ड्यूटी के आदेश जारी कर दिये गये, जिनकी नौकरी पहले ही जा चुकी है. इस पर आयोग ने सफाई दी कि यह गलती पुराने डाटाबेस के कारण हुई है और इसे तुरंत ठीक किया जा रहा है. आयोग ने यह भी निर्देश दिया था कि संविदा कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी में शामिल न किया जाये, लेकिन कुछ जगहों पर इसके उल्लंघन के आरोप सामने आये हैं. पूर्व मेदिनीपुर में ऐसे ही एक मामले के बाद संबंधित जिलाधिकारी का तबादला कर दिया गया है.

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49 वरिष्ठ डॉक्टरों को मिला ड्यूटी का आदेश

आरामबाग के प्रफुल्ल चंद्र सेन सरकारी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में 49 डॉक्टरों को चुनाव ड्यूटी के आदेश जारी किये गये हैं. इनमें विभिन्न विभागों के चिकित्सक और सहायक प्रोफेसर शामिल हैं. चुनावी तैयारियों के बीच आयोग के इस फैसले ने बहस को और तेज कर दिया है.

पश्चिम बंगाल में पहले से ही डॉक्टरों की कमी है. अगर डॉक्टरों को इलेक्शन ड्यूटी पर लगाया जायेगा, तो स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा जायेगी. ऐसे आदेश उचित नहीं हैं. इस आदेश के खिलाफ चुनाव आयोग को पत्र लिखकर डॉक्टरों को चुनाव ड्यूटी से मुक्त रखने की मांग की जायेगी.

डॉ सजल विश्वास, महासचिव, सर्विस डॉक्टर फोरम

पंचायत चुनाव में भी जारी हुआ था निर्देश

चिकित्सक संगठनों के अनुसार, वर्ष 2023 के पंचायत चुनाव में भी डॉक्टरों को पीठासीन अधिकारी बनाने का निर्देश दिया गया था. उस समय विरोध के बाद प्रशासन को अपना निर्णय बदलना पड़ा था.

आयोग ने शुरू की निर्देश वापसी की प्रक्रिया

डॉक्टरों के संगठनों ने इस फैसले के खिलाफ कॉलेज प्रशासन को पत्र लिखकर आदेश रद्द करने की मांग की है. उनका दावा है कि दबाव के चलते इस बार भी निर्देश वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. उन्होंने राज्य के अधिकारियों पर मनमाने तरीके से डॉक्टरों की तैनाती का आरोप लगाया है.

स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ेगा असर

डॉक्टरों का कहना है कि उनका प्राथमिक दायित्व मरीजों का इलाज करना है. यदि वे चुनावी ड्यूटी में चले गये, तो स्वास्थ्य सेवाएं बाधित होंगी. उन्होंने सवाल उठाया कि जब अन्य सरकारी कर्मचारी उपलब्ध हैं, तो डॉक्टरों को इस काम में क्यों लगाया जा रहा है.

चुनाव आयोग को लिखा जायेगा पत्र

सर्विस डॉक्टर फोरम ने भी इस मुद्दे पर आपत्ति जतायी है. संगठन का कहना है कि राज्य में पहले से ही डॉक्टरों की कमी है. ऐसे में इस तरह के निर्देश उचित नहीं हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस फैसले के खिलाफ चुनाव आयोग को पत्र लिखकर डॉक्टरों को चुनाव ड्यूटी से मुक्त रखने की मांग की जायेगी.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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