Samastipur News:प्रभावी नहीं हो सका विद्यालयों में सुरक्षित शनिवार'''' कार्यक्रम

जिले के सभी सरकारी विद्यालयों में मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम को सुचारू रूप से संचालित करने का निर्देश दिया गया था.
Samastipur News:समस्तीपुर : जिले के सभी सरकारी विद्यालयों में मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम को सुचारू रूप से संचालित करने का निर्देश दिया गया था. ताकि यह प्रभावी तरीके से लागू हो सके. लेकिन कुछेक विद्यालय को छोड़ कर अधिकांश विद्यालयों खानापूर्ति की जा रही है. गर्मी के मौसम में अगलगी की घटनाओं से लेकर बरसात में बाढ़ में उत्पन्न होने वाली तरह-तरह की समस्याओं से बचाव के लिए बच्चों को भी प्रशिक्षित करने की योजना सरकार द्वारा बनाई गई है. उन्हें बताया जाना है कि किस तरह थोड़ी-सी सावधानी के जरिए बड़ी दुर्घटनाओं को टाला जा सकता है. इसके लिए मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम के तहत विद्यालयों में ””सुरक्षित शनिवार”” कार्यक्रम तैयार किया गया. शिक्षा विभाग के इस खास अभियान के तहत स्कूली बच्चों को प्रत्येक शनिवार को आपदा से बचाव की जानकारी दी जानी है. उन्हें आपदा की पहचान कर उससे उबरने के गुर भी सिखाया जाना है. इसके लिए विद्यालयों में मॉक ड्रिल कराने की भी योजना है. इस अभियान को पूर्व के वर्षों में ही धरातल पर उतारा गया, मगर अब तक शत-प्रतिशत अमल में नहीं आ सका है. बच्चे सुरक्षित शनिवार के माध्यम से बाढ़, महामारी, भूकंप आदि से बचाव के लिए बच्चों को प्रशिक्षित करने के साथ-साथ जोखिम की पहचान करना भी बच्चों को सिखाया जाना है. इस योजना की अवधारणा यह है कि अगर बच्चे भी इन बातों को समझेंगे तो आपदा की स्थिति में दुर्घटनाओं को कम किया जा सकेगा. कैसे घर में सावधानी बरतें कि अगलगी जैसी घटनाओं से बचा जाये. सर्पदंश से बचाव के लिए क्या करें, महामारी की स्थिति में कैसे बचाव करें, इन बातों की जानकारी भी बच्चों को दी जानी है. इसके लिए बच्चों को जोखिम की पहचान करने के साथ-साथ उनसे बचाव के भी गुर सिखाए जाने की योजना है. बच्चों को दिया जाना है प्रशिक्षण बाढ़, महामारी, भूकंप जैसे आपदा में स्वयं का बचाव कैसे किया जाए, इसके लिए कौन-कौन सी सावधानियां बरती जाएं, बच्चों को बताया जायेगा. इस प्रशिक्षण में उन्हें ऐसी बीमारियों से बचने के उपाय भी बताए जाएंगे जो आमतौर पर गंदगी के कारण होती हैं. बाढ़ या बरसात में भी जलजनित रोगों का बोलबाला होता है. बच्चों को बताया जायेगा कि साफ-सफाई हमारे लिए क्यों आवश्यक है. इसके लिए प्रत्येक स्कूल के एक शिक्षक को प्रशिक्षित किया गया है. उन्हें बच्चों को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इस अभियान की सफलता के लिए विद्यालयों से जुड़े विभिन्न संगठनों को भी इससे जोड़े जाने का प्रावधान किया गया है. इसके लिए विद्यालय शिक्षा समिति, बाल संसद एवं मीना मंच को भी सक्रिय किया जाना है. उनके लिए उन्मुखीकरण कार्यक्रम के आयोजन की भी योजना है. इस योजना को प्रभावी बनाने के लिए जिला स्तर पर अनुश्रवण करने का भी निर्देश दिया गया था. बावजूद इसके यह योजना प्रभावी नहीं हो सकी है. हां, कुछ शिक्षकों ने इस दिशा में सक्रियता जरूर दिखाई है, मगर अधिकांश विद्यालय स्तर पर यह प्रभावी नहीं है. तत्कालीन डीपीओ एसएसए ने विद्यालयों के एचएम को पत्र भेजकर सुरक्षित शनिवार से संबंधित गतिविधियों को वार्षिक समय सारणी (वैगन व्हील) के अनुसार प्रत्येक शनिवार को प्रभावी रूप से क्रियान्वयन कराने को कहा था बावजूद एचएम रुचि नहीं ले रहे हैं.
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