Samastipur News:सरसों व राई के फसलों में कीट व्याधियों के प्रबंधन की जरूरत : डॉ. प्रियरंजन

Published by : GIRIJA NANDAN SHARMA Updated At : 23 Jan 2026 6:26 PM

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भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान क्षेत्रीय केंद्र पूसा में किसानों के बीच प्रक्षेत्र परिभ्रमण सह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया.

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Samastipur News:पूसा : भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान क्षेत्रीय केंद्र पूसा में किसानों के बीच प्रक्षेत्र परिभ्रमण सह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. अध्यक्षता करते हुए संस्थान के अध्यक्ष डॉ. प्रियरंजन कुमार ने कहा कि सरसों एवं राई व तोरी के फसलों में ससमय कीट एवं व्याधियों का प्रबंधन करने की जरूरत है. जिससे किसानों को लक्ष्य के अनुसार उत्पादन प्राप्त हो सके. आईएआरआई के माध्यम से विकसित सरसों एवं तोरी के प्रभेदों का चयन बेहतर उत्पादकता दर को मेंटेन करने के लिए लगाने की आवश्यकता है. साथ ही उन्होंने भंडारण की दिशा में तकनीकी पहलुओं पर किसानों को बताया. सरसों-तोरी के भंडारण के दौरान कम नमी 9 प्रतिशत से कम और कम तापमान 18 डिग्री सेंटीग्रेट से नीचे को बनाए रखने के साथ ही साफ़, हवा-रोधी कंटेनर में रखना ताकि नमी और कीटों से बचाया जा सके. तेल की उच्च मात्रा के कारण नमी जल्दी खराब कर सकती है. भंडारण से पहले धूप में सुखाएं, पुराने बीजों से अलग रखें और बोरों को भी सुखाकर इस्तेमाल करें. कटाई के बाद बीजों को धूप में अच्छी तरह सुखाएं जब तक नमी 9 प्रतिशत या उससे कम नहीं हो जाये. भंडारण से पहले बीजों से कचरा हटा दें. यह नमी बढ़ा सकता है. परिवहन के लिए उपयोग किए जाने वाले वाहनों को भी कीटाणुरहित करें. नमी से बचाने के लिए एयरटाइट टिन के डिब्बे सबसे अच्छे होते हैं. उसके बाद एल्यूमीनियम फ़ॉइल, पॉलीथीन बैग और फिर कपड़े के थैले आते हैं. भंडारण स्थल साफ-सुथरा और कीट-मुक्त होना चाहिए. दरारें बंद कर दें और चूहों के बिलों को सील कर दें. बीज को 18 डिग्री सेंटीग्रेट से नीचे और जितना हो सके उतना ठंडा रखें. रेफ्रिजरेटर में रखने से बचें क्योंकि नमी से बीज जल्दी खराब हो सकते हैं. पुराने और नए बीजों को मिलाएं नहीं, क्योंकि पुराने बीज में कीड़े हो सकते हैं. बिन में रखने के बाद, शुरुआती 6 हफ्तों में अक्सर तापमान और नमी की जांच करें. श्वसन से गर्मी और नमी पैदा होती है, और संभव हो तो बीजों को पलटना चाहिए. वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. तमोघना साहा ने प्रशिक्षण सत्र का संचालन करते हुए समुचित उत्पादन के लिए वैज्ञानिकों के माध्यम अनुशंसित प्रभेदों को खेतों में लगाने के साथ खड़पतवार नियंत्रण के बारे में विस्तार से चर्चा की. वहीं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सतीश नायक ने आधुनिक तकनीकों से बेहतर उत्पादन लेने से संबंधित उपाय पर विस्तार से प्रकाश डाला. मौके पर मनीष कुमार भारती, अनिल कुमार, बिंदेश्वर मांझी, साहेब राय, सुशील कुमार, अभिषेक, जगदीश आदि मौजूद थे.

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