बीसीसीआई के एथिक्स ऑफिसर ने जेएससीए को जारी किया शो कॉज नोटिस, चार सप्ताह में मांगा लिखित जवाब

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 10 Jun 2026 7:10 PM

विज्ञापन

बीसीसीआई का दफ्तर. फाइल फोटो

Ranchi News: बीसीसीआई के ओम्बड्समैन सह एथिक्स ऑफिसर जस्टिस अरुण मिश्रा ने सदस्यता समाप्ति मामले में जेएससीए को शो कॉज नोटिस जारी किया है. शिकायतकर्ता रंजीत सिंह की याचिका पर चार सप्ताह के भीतर लिखित जवाब मांगा गया है. मामला आजीवन सदस्यता समाप्त करने की प्रक्रिया से जुड़ा है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

विज्ञापन

रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

Ranchi News: झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (जेएससीए) की आजीवन सदस्यता समाप्त किए जाने के मामले में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के ओम्बड्समैन सह एथिक्स ऑफिसर ने जेएससीए को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता में शिकायत संख्या 16/2026 के तहत यह नोटिस जारी किया गया है. मामले में शिकायतकर्ता रंजीत सिंह की ओर से लगाए गए आरोपों को संज्ञान में लेते हुए जेएससीए से चार सप्ताह के भीतर विस्तृत लिखित जवाब मांगा गया है.

जस्टिस अरुण मिश्रा ने जारी किया नोटिस

बीसीसीआई के ओम्बड्समैन सह एथिक्स ऑफिसर जस्टिस अरुण मिश्रा ने अपने आदेश में कहा है कि शिकायत और उसमें लगाए गए आरोपों का अवलोकन करने के बाद प्रतिवादी पक्ष को नोटिस जारी किया जाना आवश्यक है. इसके तहत झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन को निर्देश दिया गया है कि नोटिस प्राप्त होने की तिथि से चार सप्ताह के भीतर अपना लिखित पक्ष प्रस्तुत किया जाए. साथ ही, यह भी कहा गया है कि जेएससीए अपने जवाब के साथ उन सभी दस्तावेजों को भी संलग्न करेगा, जिनके आधार पर वह अपना पक्ष मजबूत करना चाहता है.

शिकायतकर्ता को भी मिला जवाब दाखिल करने का मौका

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि जेएससीए की ओर से जवाब दाखिल किए जाने के बाद शिकायतकर्ता को कोई प्रति उत्तर देना हो, तो वह दो सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रख सकता है. इसके अलावा शिकायत की प्रति और उससे संबंधित सभी दस्तावेज प्रतिवादी पक्ष को उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया गया है, ताकि मामले की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित की जा सके.

आठ अप्रैल को दर्ज कराई गई थी शिकायत

मामले के शिकायतकर्ता रंजीत सिंह ने आठ अप्रैल 2026 को बीसीसीआई के एथिक्स ऑफिसर के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी. उन्होंने आरोप लगाया कि 20 अगस्त 2025 को उनकी आजीवन सदस्यता को जेएससीए के नियमों और विनियमों का उल्लंघन करते हुए समाप्त कर दिया गया. रंजीत सिंह का कहना है कि सदस्यता समाप्त करने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया और न ही निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया. उन्होंने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ बताया है.

बैठक के एजेंडा में नहीं था सदस्यता समाप्ति का मुद्दा

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि सदस्यता समाप्त करने के फैसले को प्रबंधन समिति से मंजूरी दिलाने और बाद में स्थगित वार्षिक आमसभा में अनुमोदन की बात कही गई, जबकि संबंधित बैठक के एजेंडा में इस विषय का कोई उल्लेख नहीं था. शिकायतकर्ता के अनुसार, इस मामले के लिए कोई विशेष आम बैठक भी नहीं बुलाई गई थी और एसोसिएशन के नियमों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया.

सदस्यता बहाल करने की मांग

रंजीत सिंह ने अपनी शिकायत में मांग की है कि उनकी सदस्यता समाप्त करने के निर्णय को अवैध और शून्य घोषित किया जाए. साथ ही उनकी आजीवन सदस्यता बहाल करने और मामले में आवश्यक निर्देश जारी करने की भी मांग की गई है. अब बीसीसीआई के ओम्बड्समैन सह एथिक्स ऑफिसर के समक्ष यह मामला आगे बढ़ेगा. जेएससीए की ओर से जवाब दाखिल होने के बाद शिकायतकर्ता को भी अपना प्रति उत्तर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा.

इसे भी पढ़ें: परिमल नाथवानी का पर्चा वैध, कांग्रेसी मंत्रियों के विरोध के बाद दिल्ली में डेरा जमाएंगे विधायक

मामले पर टिकी हैं क्रिकेट जगत की नजरें

झारखंड क्रिकेट से जुड़े इस विवाद ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं और एसोसिएशन के नियमों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. आने वाले दिनों में बीसीसीआई के समक्ष होने वाली सुनवाई इस मामले की दिशा तय करेगी. क्रिकेट मैदान पर फैसले तीसरे अंपायर की स्क्रीन से निकलते हैं, लेकिन प्रशासनिक विवादों में फाइलें, नोटिस और नियम ही असली डीआरएस बन जाते हैं. अब नजर इस बात पर रहेगी कि दस्तावेज किसके पक्ष में बल्ला घुमाते हैं.

इसे भी पढ़ें: पोते की हत्या के आरोप में सौतेली दादी को आजीवन कारावास, 14 महीने पहले हुई थी वारदात

विज्ञापन
KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

Tags

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola