पोते की हत्या के आरोप में सौतेली दादी को आजीवन कारावास, 14 महीने पहले हुई थी वारदात

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 10 Jun 2026 6:43 PM

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कोडरमा के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय राकेश चंद्रा की अदालत ने सुनाई सजा. प्रतीकात्मक फोटो.

Koderma News: कोडरमा में छह वर्षीय विक्रम कुमार उर्फ सौरव की हत्या के मामले में उसकी सौतेली दादी रेखा देवी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. अदालत ने 14 माह के भीतर स्पीड ट्रायल पूरा कर फैसला सुनाया. दोषी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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कोडरमा से विकास कुमार की रिपोर्ट

Koderma News: कोडरमा में छह वर्षीय बच्चे विक्रम कुमार उर्फ सौरव की हत्या के मामले में अदालत ने उसकी सौतेली दादी को दोषी करार देते हुए आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय राकेश चंद्रा की अदालत ने आरोपी रेखा देवी (53 वर्ष), पति मनोज यादव, निवासी गझंडी, कोडरमा को हत्या का दोषी पाते हुए यह फैसला सुनाया. अदालत ने दोषी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में उसे तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी.

अप्रैल 2025 में सामने आया था मामला

यह मामला वर्ष 2025 का है. मृतक बच्चे की मां पूनम देवी ने तिलैया थाना में कांड संख्या 123/25 दर्ज कराते हुए अपने सास-ससुर समेत अन्य लोगों पर बेटे की हत्या का आरोप लगाया था. उन्होंने पुलिस से पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी. शिकायत में पूनम देवी ने बताया था कि होली के समय उनके पति अरविंद कुमार ने शराब के नशे में अपनी मां के साथ मारपीट की थी और गला दबाने का प्रयास किया था. इसके बाद सास रेखा देवी और ससुर मनोज यादव ने उनके बेटे को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी थी.

पारिवारिक विवाद के बीच हुई वारदात

जानकारी के अनुसार, अरविंद कुमार मनोज यादव की पहली पत्नी के पुत्र थे. पहली पत्नी की मृत्यु के बाद मनोज यादव ने रेखा देवी से दूसरी शादी की थी. पुलिस जांच में सामने आया कि सौतेली दादी होने के कारण रेखा देवी के मन में बच्चे के प्रति द्वेष की भावना थी. 16 अप्रैल 2025 को पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए बताया था कि आरोपी ने छह वर्षीय विक्रम कुमार उर्फ सौरव की हत्या कर उसके शव को जंगल में दफना दिया था. जांच के दौरान पुलिस के समक्ष आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार किया था. पुलिस के अनुसार, रेखा देवी ने कपड़ा टांगने वाली रस्सी से बच्चे का गला दबाकर उसकी हत्या की थी. बाद में साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से शव को जंगल में ले जाकर दफना दिया गया था.

14 माह में पूरा हुआ स्पीड ट्रायल

मामला अदालत में पहुंचने के बाद इसकी सुनवाई स्पीड ट्रायल के तहत की गई. महज 14 माह के भीतर अदालत ने पूरे मामले की सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुनाया. अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक प्रवीण कुमार सिंह ने अदालत में पक्ष रखा. उन्होंने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए दोषी को अधिकतम सजा देने की मांग की. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल आठ गवाहों का परीक्षण कराया.

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गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर सुनाया गया फैसला

वहीं बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता वचन देवनाथ आर्या ने आरोपी का पक्ष रखा और विभिन्न दलीलें प्रस्तुत कीं. दोनों पक्षों की बहस सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों तथा गवाहों के बयान का अवलोकन करने के बाद अदालत ने रेखा देवी को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई. इस फैसले के साथ एक ऐसे मामले का न्यायिक निष्कर्ष सामने आया, जिसने वर्ष 2025 में पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था. अदालत ने यह स्पष्ट संदेश देने का प्रयास किया कि गंभीर अपराधों के मामलों में त्वरित सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर दोषियों को कानून के अनुसार दंडित किया जाएगा.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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