Samastipur News:परों को खोला है, सारी उड़ान बाकी है...

Published by : GIRIJA NANDAN SHARMA Updated At : 28 Jul 2025 6:54 PM

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परों को खोला है, सारी उड़ान बाकी है,जमीन देख ली है अब आसमान बाकी है.

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Samastipur News:समस्तीपुर : परों को खोला है, सारी उड़ान बाकी है,जमीन देख ली है अब आसमान बाकी है. थकी जो मुफलिसी तो अमीरी बोल पड़ी, अभी तो रास्ते का इम्तिहान बाकी है. कुछ ऐसी ही कविताओं से गूंजता रहा केन्द्रीय विद्यालय के निकट स्थित कुसुम सदन का प्रांगण. मौका था कुसुम पांडेय स्मृति साहित्य संस्थान के द्वारा आयोजित काव्य संध्या का. काव्य संध्या में दूर-दूर से बड़ी संख्या में रचनाकार भाग लेने पहुंचे थे. आगत अतिथियों का स्वागत डॉ. रामेश गौरीश कर रहे थे. अध्यक्षता मैथिली तथा हिन्दी के चर्चित रचनाकार डॉ. नरेश कुमार विकल ने की. संचालन गज़लकार प्रवीण कुमार चुन्नू कर रहे थे. गीतकार व पूर्व रेल राजभाषा अधिकारी द्वारिका राय सुबोध मुख्य अतिथि थे. वहीं वरिष्ठ पत्रकार चांद मुसाफिर तथा डॉ. राम पुनीत ठाकुर तरुण विशिष्ट अतिथि के रूप में विराजमान रहे. कार्यक्रम के प्रारंभ में संस्था के अध्यक्ष शिवेंद्र कुमार पाण्डेय ने जुलाई में उत्पन्न हिन्दी साहित्य के आधार स्तम्भ मार्कण्डेय प्रवासी,पंडित देवेन्द्र नाथ शर्मा, मुंशी प्रेमचंद डॉ. राम लखन राय,प्रो. मुन्नी सिन्हा, दिनेश दीन, चन्द्रधर शर्मा गुलेरी,इस्मत चुगताई के कृतित्व तथा व्यक्तित्व पर विशद चर्चा करते हुए उनके प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित की. स्वतंत्रता सेनानी मंगल पांडेय,पंडित चन्द्र शेखर तिवारी आजाद, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के अलावा कारगिल शौर्य के अमर सेनानियों के प्रति भी हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित की गयी. गोष्ठी का प्रारंभ डॉ. राम सूरत प्रियदर्शी द्वारा मां सरस्वती की आराधना गीत से हुई. सावन की फुहार, भोलेनाथ को समर्पित भजन के अलावा ग़ज़ल, हास्य व्यंग, रोमांटिक एवं पर्यावरण संबंधी भोजपुरी गीत और मैथिली तथा बज्जिका की रचनायें आकर्षण के केंद्र रहीं. डॉ. सुनील चम्पारणी की नवीनतम कृति पल-पल बदलती फितरत का मंचासीन रचनाकारों द्वारा लोकार्पण करने के साथ ही डॉ. सुनील चम्पारणी द्वारा डॉ. विकल, डॉ राम पुनीत ठाकुर तरुण, द्वारिका राय सुबोध, प्रोफेसर रीता वर्मा, डॉ. परमानन्द लाभ, भुवनेश्वर मिश्र, प्रवीण कुमार चुन्नू, तथा शिवेन्द्र कुमार पाण्डेय को सम्मानित किया गया. पश्चात डॉ सुनील चम्पारणी और पूर्णिमा श्रीवास्तव को सभी ने मिलकर सम्मानित किया. पल-पल बदलती फितरत पर अनेक रचनाकारों द्वारा समीक्षा भी की गयी. डॉ. राम सूरत प्रियदर्शी, राज कुमार चौधरी, भुवनेश्वर मिश्र, दिनेश प्रसाद, रामाश्रय राय राकेश, राजकुमार राय राजेश, विष्णु कुमार केडिया, दीपक कुमार श्रीवास्तव, , नरेंद्र कुमार सिंह त्यागी,मो. अयूब अंसार,मो. शुभम कुमार, स्मृति झा, डॉ. परमानंद लाभ, द्वारिका राय सुबोध, आचार्य गंगा प्रसाद आजाद सतमलपुरी, दुखित महतो भक्तराज, डॉ. जगमोहन चौधरी, ज्योति कुमारी,संत सुखी चंद सत्यवादी, ओमप्रकाश ओम, मुकेश कुमार, डॉ. अर्चना कुमारी, अरविंद सत्यदर्शी, रीता वर्मा, डॉ. राम पुनीत ठाकुर तरुण, डॉ. केशव कुमार सिंह,मो. जावेद, अरुण कुमार सिंह मालपुरी,प्रो. अवधेश कुमार झा, पूर्णिमा श्रीवास्तव, कुमार अमरेश, यशवंत कुमार, रंजना लता, नीला शर्मा, अरविंद कुमार चौधरी, विनोद विनित आदि की रचनाएं खूब पसंद की गयी. समापन शैलजा कनिष्ठा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन से किया गया.

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