Samastipur News:बिजली के बिल में 71 लाख बैलेंस देख उपभोक्ता अचंभित

Published by : ABHAY KUMAR Updated At : 29 Aug 2025 6:34 PM

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बिजली बिल बनाने में गड़बड़ी की शिकायतें कम नहीं हो रही है. गड़बड़ी होने के बाद उसे ठीक करने पर भी गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

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Samastipur News: समस्तीपुर : बिजली बिल बनाने में गड़बड़ी की शिकायतें कम नहीं हो रही है. गड़बड़ी होने के बाद उसे ठीक करने पर भी गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा है. कहा जा रहा था कि स्मार्ट मीटर लगाने के बाद सबकुछ पारदर्शी तरीके से उपभोक्ता जान सकेंगे. लेकिन शहर के भूईधारा स्थित उपभोक्ता उषा देवी के स्मार्ट मीटर को देखने के बाद सभी अचंभित है और इसकी सूचना जब बिजली कंपनी के वरीय अधिकारियों को मिली तो उनके होश उड़े हुए हैं. जानकारी के मुताबिक उक्त उपभोक्ता के स्मार्ट मीटर बैलेंस में 71,08983.77 रुपए जमा है. इसकी जानकारी जब परिजनों को मिली तो वे लोग भी अचंभित है और खुशी के मारे फूले नहीं समा रहे हैं. बताते चलें कि उक्त उपभोक्ता के घर की खपत औसतन 100-120 यूनिट है. वहीं उपभोक्ता प्रति माह करीब एक हजार रुपए जमा करते हैं. इसके बाद रातोंरात अचानक से 71 लाख रुपए बैलेंस आ जाना तकनीकी खराबी की ओर इशारा करता है. इस संबंध में पूछने पर विद्युत कार्यपालक अभियंता आनंद कुमार ने बताया कि जांच करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है. उपभोक्ता का स्मार्ट मीटर सही है या डिटेक्टिव जांच के बाद ही खुलासा हो सकेगा. इधर, उपभोक्ता का कहना है कि बिना रिचार्ज के ही इतना अधिक बैलेंस आ जाना कहीं न कहीं खराबी की ओर इंगित कर रहा है. बिलिंग सिस्टम में गड़बड़ी के कारण ऐसा हुआ है. सरकार ने स्मार्ट मीटर सही बिलिंग के लिये लगाये थे, लेकिन अब ये परेशानी का सबब बन गये हैं. क्या स्मार्ट मीटर से छेड़छाड़ संभव है? विद्युत कार्यपालक अभियंता आनंद कुमार ने बताया कि यह किसी भी साइबर अटैक से प्रोटेक्टेड है. इसे हैक नहीं किया जा सकता. स्मार्ट मीटर डिजिटल मीटर का लेटेस्ट वर्जन है. इसमें मोबाइल की तरह एक सिम कार्ड इन्स्टॉल होती है. यह नेटवर्क से जुड़ी होती है. मोबाइल की तरह आईएमई नंबर भी होता है. जियो, बीएसएनएल, एयरटेल जैसी कंपनियों की सिम लगती होती हैं. सिम नंबर और बिजली अकाउंट नंबर को सिंक्रोनाइज कर डेटा इस्तेमाल किया जाता है. टेक्निकल तौर पर मीटर एक्यूरेट और प्री साइज होते हैं. इसका मतलब है कि वह सही रीडिंग लेते हैं. छोटे से छोटे कंजप्शन को रीड करता है. हालांकि हर दस में से एक मीटर में एरर हो सकता है. ऐसा होने पर कंज्यूमर को मीटर बदलवाना चाहिए.

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