दो माह बाद मिल पायेगा डॉक्टरों को वेतन
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :08 Apr 2017 5:36 AM (IST)
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समस्तीपुर : सदर अस्पताल के डॉक्टरों एवं कर्मियों को अब दो माह बाद ही वेतन मिलने की उम्मीद है. बिहार सरकार से आवंटन प्राप्त होने में कम से कम दो माह लगेंगे. पर सरकार इस मद में कितनी राशि उपलब्ध करा पाती है, कहा नहीं जा सकता है. इस वजह से डॉक्टरों एवं कर्मियों में […]
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समस्तीपुर : सदर अस्पताल के डॉक्टरों एवं कर्मियों को अब दो माह बाद ही वेतन मिलने की उम्मीद है. बिहार सरकार से आवंटन प्राप्त होने में कम से कम दो माह लगेंगे. पर सरकार इस मद में कितनी राशि उपलब्ध करा पाती है, कहा नहीं जा सकता है. इस वजह से डॉक्टरों एवं कर्मियों में जबरदस्त गुस्सा है. यह गुस्सा सिविल सर्जन के प्रति भी दिख रहा है. डॉक्टर और इस बात को लेकर आक्रोशित हैं कि आवंटन के बाद भी उन्हें वेतन नहीं मिल सका.
जबकि आठ माह से बारह माह तक का वेतन लंबित है. बता दें कि सदर अस्पताल के डॉक्टरों एवं कर्मियों के वेतन मद में भुगतान के लिये सरकार की ओर से 1 करोड़ 25 लाख रुपये की राशि सिविल सर्जन को उपलब्ध करायी गयी. समय से यह आवंटन भी प्राप्त हो गया.
डॉक्टरों के मुताबिक सदर अस्पताल के दो लिपिकों की शिथिलता की वजह से यह डॉक्टरों एवं कर्मियों को वेतन भुगतान नहीं हो पाया. जबकि किसी डॉक्टर का आठ महीने का वेतन बकाया था तो किसी का बारह महीने का. ए ग्रेड नर्स एवं अन्य पारा मेडिकल स्टॉफ का भी वेतन कई माह से लंबित था. कर्मी यदि सक्रियता दिखाता तो सभी को वेतन मिल जाता.
कई डॉक्टरों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि इसके लिये पूरी तरह से जिम्मेवार सिविल सर्जन भी हैं. एक तरफ वे डॉक्टरों एवं कर्मियों को समय से ड्यूटी आने एवं काम कराने की बात करते हैं वहीं दूसरी ओर वेतन देने में खूद ढिलाई बरतते हैं. कई डॉक्टरों एवं कर्मियोंने वेतन मिलने की उम्मीद में कई कार्यो के लिये अपना बजट बना रखा था. यह सब पूरी तरह से गड़बड़ हो गया. सरकार की जो स्थिति है उससे नहीं लगता कि दो महीने से पहले आवंटन मिल पायेगा. कितना आवंटन मिलेगा यह भी नहीं कहा जा सकता.
ऐसे में डॉक्टर एवं कर्मी काफी चिंतित हैं. दूसरी ओर जिलाधिकारी प्रणव कुमार ने आवंटन के बाद भी डॉक्टरों एवं कर्मियों के वेतन नहीं मिलने के मामले को गंभीरता से लिया है. उन्होंने सिविल सर्जन से इस मामले में रिपोर्ट देने की मांग भी कर चुके हैं. ऐसे में सिविल सर्जन की मुश्किलें भी बढ सकती हैं. सिविल सर्जन इस बात को लेकर चिंतित दिख रहे हैं.
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