Samastipur News:पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप के 6,082 आवेदन लंबित, छात्र हो रहे परेशान

Author Prem kumar
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Samastipur News:पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप के 6,082 आवेदन लंबित, छात्र हो रहे परेशान

जिले में पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति पाने के लिए विद्यार्थियों ने नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया था.

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Samastipur News:समस्तीपुर : जिले में पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति पाने के लिए विद्यार्थियों ने नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया था. इन आवेदनों का सत्यापन तीन स्तर पर किये जाने के बाद ही विद्यार्थियों के खाते में राशि भेजी जाती है. जिले में कई माह बीत जाने के बाद भी आवेदनों का सत्यापन नहीं होने से कई बच्चों को अभी तक छात्रवृत्ति की राशि नहीं मिल सकी है. पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप के तहत लाभान्वित होने वाले जिले के 246 शिक्षण संस्थानों के 6,082 छात्र-छात्राओं का आवेदन सत्यापन नहीं होने के कारण लंबित है. समीक्षा के बाद डीएम ने मामले को गंभीरतापूर्वक लेते हुए नाराजगी प्रकट की है. साथ ही इन शिक्षण संस्थानों पर कार्रवाई के लिए भी कहा है. डीपीओ एसएसए मानवेंद्र कुमार राय ने इन शिक्षण संस्थानों को चौबीस घंटे की मोहलत देते हुए आवेदनों का नियमानुसार सत्यापन करने को कहा है ताकि अग्रेतर कार्रवाई की जा सके. बताते चलें कि यूआर काॅलेज रोसड़ा के पास पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप(बीसी-ईबीसी) कैटेगरी 792 व एसी-एसटी कैटेगरी के 28 लंबित हैं. यह सभी आवेदन सेशन 2022-23 व 2023-24 के हैं. वहीं अरबीएस काॅलेज मोहिउद्दीननगर के पास भी पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप(बीसी-ईबीसी) कैटेगरी 586 व एसी-एसटी कैटेगरी के 24 लंबित हैं. यह सभी आवेदन सेशन 2022-23 व 2023-24 के हैं. इसी तरह इसी सत्र के पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप (बीसी-ईबीसी) कैटेगरी 143 शिक्षण संस्थान के पास 3756, एसी-एसटी कैटेगरी के 896 आवेदन 101 शैक्षणिक संस्थान के पास बार-बार निर्देशित किये जाने के बाद भी लंबित पड़े हुए हैं. बताते चलें कि पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप एक छात्रवृत्ति योजना है जिससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को उच्च शिक्षा हासिल करने में मदद मिलती है. यह योजना, मुख्य रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए है. आइसा जिला सचिव सुनील कुमार ने ऐसे शिक्षण संस्थान को चिन्हित कर कार्रवाई करने की मांग की है. कहा कि सत्यापन का काम अभी तक पूरा नहीं किये जाने से बच्चे बिहार शिक्षा परियोजना के जिला कार्यालय तथा जिस संस्थान में पढ़ रहे हैं वहां का चक्कर लगाने को मजबूर हैं. सत्यापन का काम काफी धीमी गति से किये जाने के कारण बच्चे छात्रवृत्ति से वंचित हो रहे हैं. शिक्षण संस्थानों की ओर से दिलचस्पी नहीं लिये जाने के कारण आवेदनों का सत्यापन धीमी गति से हो रहा है.

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