टूटे स्लीपर पर रोज दौड़ रहीं 175 ट्रेनें

समस्तीपुर : समस्तीपुर रेल मंडल के स्थानीय जंक्शन से टूटे एवं जर्जर स्लीपर पर प्रतिदिन औसतन 175 ट्रेनें दौड़ रही हैं. इसे किसी बड़े रेल हादसे को दावत देने से कम नहीं माना जा सकता. लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बावजूद मंडल अबतक लापरवाह बना हुआ है. यूं तो 22 अगस्त से रेलवे देशभर में […]
समस्तीपुर : समस्तीपुर रेल मंडल के स्थानीय जंक्शन से टूटे एवं जर्जर स्लीपर पर प्रतिदिन औसतन 175 ट्रेनें दौड़ रही हैं. इसे किसी बड़े रेल हादसे को दावत देने से कम नहीं माना जा सकता. लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बावजूद मंडल अबतक लापरवाह बना हुआ है. यूं तो 22 अगस्त से रेलवे देशभर में विशेष अभियान के तहत हादसों को रोकने के लिए 90 दिनों के लिए सेफ्टी ड्राइव चला रहा है. हालांकि, यह अभियान सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गया है.
मंगलवार को प्रभात पड़ताल में जंक्शन के पश्चिमी छोड़ पर कई जगहों पर रेल पटरी को आपस में जोड़ने वाले सीमेंट के स्लीपर टूटे मिले. हाल यह था कि कहीं स्लीपर बीच से टूटा हुआ है, तो कहीं पटरी के पास से टूट चुका है. इससे पैंड्रोल क्लीप भी ढीली पड़ चुकी है. हैरत की बात यह है कि स्लीपर टूटे होने के बावजूद इसे बदला नहीं गया और धड़ल्ले से टूटे स्लीपर पर ट्रेनों का परिचालन हो रहा है. मंडल के इस रवैया से यह बिल्कुल नहीं लग रहा कि रेलवे के लिए अब सेफ्टी महत्वपूर्ण रह गया है. मंडल की ओर से बरती जा रही इस लापरवाही से लोग सहमे हैं.
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