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महोत्सवों में हो रही है भारी अनियमितता, इसकी हो निष्पक्ष जांच: किशोर कुमार

Updated at : 17 Mar 2025 5:49 PM (IST)
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महोत्सवों में हो रही है भारी अनियमितता, इसकी हो निष्पक्ष जांच: किशोर कुमार

महोत्सवों में हो रही है भारी अनियमितता, इसकी हो निष्पक्ष जांच: किशोर कुमार

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जन सुराज पार्टी के प्रदेश महासचिव सह नवनिर्माण मंच के संस्थापक सदस्य ने की प्रेसवार्ता सहरसा . जन सुराज पार्टी के प्रदेश महासचिव सह नवनिर्माण मंच के संस्थापक सदस्य किशोर कुमार ने सोमवार को अपने आवास पर प्रेस कांफ्रेंस कर जिले में आयोजित होने वाले महोत्सव जैसे सांस्कृतिक आयोजनों में भारी अनियमितता का आरोप लगाया. उन्होंने कोसी महोत्सव, बाणेश्वर महोत्सव, विषहरी महोत्सव, रविदास महोत्सव, मटेश्वर महोत्सव, उग्रतारा महोत्सव, लक्ष्मीनाथ महोत्सव व बनगांव होली महोत्सव जैसे सांस्कृतिक आयोजनों में भारी अनियमितता की बात कही. उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय विरासत, कला, संस्कृति व इतिहास को संजोए रखना था. लेकिन विगत कुछ वर्षों से यह महोत्सव अपने मूल उद्देश्य से भटक भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है. इन आयोजनों में स्थानीय जनता की भागीदारी घटती जा रही है. जिससे यह साफ जाहिर होता है कि यह कार्यक्रम अब महज औपचारिकता बनकर रह गयी है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि महोत्सव के कमेटी में प्रशासन व जनप्रतिनिधियों के करीबी लोग ही शामिल होते हैं, जो आयोजन के नाम पर सिर्फ सरकारी पैसे की बंदरबांट करते हैं. हाल ही में संपन्न हुए बनगांव होली महोत्सव में भी यही स्थिति देखने को मिली. बनगांव की ऐतिहासिक होली, जिसे मथुरा-वृंदावन की होली के समकक्ष माना जाता है. अब स्थानीय प्रशासन एवं प्रतिनिधि के स्वार्थ की भेंट चढ़ रही है. इस बार स्थानीय लोगों को अपने संसाधनों से बाबाजी कुटी स्थान में होली के दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन करना पड़ा. बाबा जी के भजनिया बैजनाथ खां को दस हज़ार रुपया व पाग चादर से सम्मानित किया. ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा गया. ग्रामीणों का कहना है कि यह आयोजन अब खाओ-पकाओ अभियान बनकर रह गया है. उन्होंने कहा कि इन महोत्सवों के लिए जारी कुल बजट का 75 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ टेंट एवं डेकोरेशन पर खर्च किया जाता है. जबकि मुख्य कार्यक्रमों पर मात्र 25 प्रतिशत राशि लगती है. इवेंट कंपनियों के जरिए अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर सरकारी राशि का गबन किया जाता है. हाल ही में सहरसा के संत लक्ष्मीनाथ गोसाईं महोत्सव में शामिल एक मंत्री ने भी इस ओर इशारा करते हुए कहा कि इस आयोजन में तो स्थानीय लोग ही शामिल नहीं हैं. यह महोत्सव बाबा जी की कुटी में होना चाहिए. जिससे उनकी कृति का प्रचार-प्रसार हो सके. इसी तरह बाणेश्वर महोत्सव एवं अन्य आयोजनों में भी बड़े पैमाने पर अनियमितताएं देखी जा रही है. कोसी महोत्सव जो कभी जिले का सबसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक आयोजन हुआ करता था. अब अपनी चमक खो चुका है. पहले इसकी तैयारियों के लिए जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, व्यापारी संगठनों, साहित्यकारों, पत्रकारों, रंगकर्मियों व समाजसेवियों के साथ बैठकें होती थी. लेकिन अब इसकी पूरी व्यवस्था कुछ गिने-चुने लोगों के हाथों में चली गयी है. जिससे यह आयोजन महज खानापूर्ति बनकर रह गया है. उन्होंने इन अनियमितताओं की कड़ी निंदा करते सरकारी धन के दुरुपयोग की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. उन्होंने कहा कि इन आयोजनों के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई को लूटने नहीं दिया जायेगा. प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से जो भ्रष्टाचार हो रहा है, उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए एवं दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि महोत्सवों का उद्देश्य सिर्फ सरकारी धन खर्च करना नहीं, बल्कि कला-संस्कृति एवं परंपराओं को जीवंत बनाये रखना है. इस तरह से आम लोगों की जनभावना के साथ खिलवाड़ बंद होना चाहिए. प्रेस कांफ्रेंस में प्रो राजकुमार झा प्रभारी प्रधानाचार्य, अधिवक्ता लुकमान अली, जिला सचिव जनसुराज रोहित कुमार, जिला उपाध्यक्ष जनसुराज डॉ नवनीत, प्रक्षेत्रीय अध्यक्ष शिक्षकेतर कर्मचारी संघ त्रिभुवन प्रसाद सिंह, ठाकुर पंकज सिंह, मुकेश कुमार सिंह, दीपक गुप्ता, निखिल कुमार, रौनक कुमार, मो गफ़ूर, सुनील यादव, अनिल गुप्ता सहित अन्य मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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