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श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया ठाकुर अनुकूलचंद्र जी का 138वां जन्मोत्सव

Updated at : 01 Mar 2026 6:11 PM (IST)
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श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया ठाकुर अनुकूलचंद्र जी का 138वां जन्मोत्सव

मनाया गया ठाकुर अनुकूलचंद्र जी का 138वां जन्मोत्सव

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शोभायात्रा में सैकड़ों की संख्या में महिला व पुरुष श्रद्धालु ने लिया भाग सिमरी बख्तियारपुर . नगर परिषद क्षेत्र स्थित उच्च विद्यालय मैदान में रविवार को ठाकुर अनुकूलचंद्र जी का 138वां वार्षिक जन्म महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया. सुबह से ही कार्यक्रम स्थल पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. पूरा वातावरण भक्ति रस में डूबा नजर आया. कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः कालीन प्रार्थना एवं धर्मग्रंथों के पाठ से हुई. इसके बाद भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जिसमें महिला व पुरुष श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. भक्ति गीतों की स्वर लहरियों से पूरा मैदान गूंज उठा. धर्मग्रंथों के पाठ उपरांत कार्यक्रम स्थल से भव्य शोभायात्रा निकाली गयी. शोभायात्रा उच्च विद्यालय मैदान से निकलकर पोस्ट ऑफिस गली, शर्मा चौक, डाकबंगला चौक, पुरानी बाजार, रानी बाग, मालगोदाम रोड, मुख्य बाजार व बड़ी दुर्गा स्थान गली होते हुए नगर के विभिन्न मार्गों का भ्रमण कर वापस कार्यक्रम स्थल पर पहुंची. शोभायात्रा में शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों से आयी महिलाओं की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही. शोभायात्रा के दौरान ठाकुर अनुकूलचंद्र जी का चित्र सुसज्जित रथ पर स्थापित किया गया था. रथ को आकर्षक ढंग से सजाया गया था, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना रहा. इस दौरान ठाकुर अनुकूलचंद्र अमर रहें के जयकारों और गगनभेदी शंखनाद से वातावरण गुंजायमान होता रहा. शोभायात्रा के दौरान भक्ति गीतों की धुन पर श्रद्धालु नाचते-गाते आगे बढ़ते रहे, जिससे पूरा इलाका भक्तिमय माहौल में सराबोर हो गया. कार्यक्रम के दौरान विधि-व्यवस्था को लेकर बख्तियारपुर पुलिस की ओर से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गयी थी. प्रमुख चौक-चौराहों पर पुलिस बल तैनात रहा, जिससे शोभायात्रा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सकी. दोपहर में बाहर से आए ठाकुर जी के ऋत्विकों द्वारा प्रवचन का आयोजन किया गया. प्रवचन में वक्ताओं ने कहा कि अहंकार से कुछ भी प्राप्त नहीं होता. जो सच्चे मन से ठाकुर जी से प्रेम करते हैं, वही उनके विचारों को समझ सकते हैं. उन्होंने कहा कि ठाकुर अनुकूलचंद्र जी ने मानव मात्र को प्रेम, सद्भाव और परस्पर मंगल कामना का संदेश दिया. माता-पिता, संतान, पड़ोसी एवं समाज के प्रत्येक व्यक्ति से प्रेम करने की सीख उनके जीवन का मूल संदेश रहा है. संध्या बेला में फिर से प्रार्थना सभा आयोजित की गयी. कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया. आयोजकों ने बताया कि 138वीं जन्म जयंती के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि ठाकुर जी के प्रति लोगों की आस्था दिनोंदिन बढ़ती जा रही है. पूरे दिन चले इस आध्यात्मिक आयोजन में सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही और वातावरण श्रद्धा व भक्ति से ओतप्रोत बना रहा.

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Dipankar Shriwastaw

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By Dipankar Shriwastaw

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