मोबाइल टॉवर चोरी मामले में कोर्ट सख्त, प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश

Published by : Dipankar Shriwastaw Updated At : 16 May 2026 5:57 PM

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मोबाइल टॉवर चोरी मामले में कोर्ट सख्त, प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश

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23.67 लाख की संपत्ति चोरी का आरोप, पुलिस की निष्क्रियता पर उठे सवाल सलखुआ. सलखुआ में मोबाइल टॉवर चोरी के एक बहुचर्चित मामले में न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिया है. मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अश्विनी कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित थाना को तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू करने का आदेश दिया है. लंबे समय से लंबित इस मामले में कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब कार्रवाई तेज होने की उम्मीद जगी है. क्या है पूरा मामला मिली जानकारी के अनुसार मेसर्स जीटीएल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के प्रतिनिधि वैद्यनाथ ओझा ने 14 अगस्त 2024 को न्यायालय में परिवाद दायर किया था. परिवाद में आरोप लगाया गया कि सलखुआ स्थित खाता संख्या 40, प्लॉट संख्या-1752 पर स्थापित टेलीकॉम कंपनी का ग्राउंड बेस्ड मोबाइल टॉवर 30 जून 2023 को अज्ञात चोरों द्वारा पूरी तरह चोरी कर लिया गया. कंपनी के मुताबिक टॉवर के साथ जुड़े अन्य महत्वपूर्ण उपकरण भी गायब कर दिए गये, जिससे करीब 23.67 लाख रुपये का नुकसान हुआ. यह संपत्ति कंपनी की वैध परिसंपत्ति थी, जिसकी सुरक्षा व्यवस्था भी सुनिश्चित थी. पुलिस पर उठे सवाल परिवादी ने आरोप लगाया कि घटना के तुरंत बाद स्थानीय थाना एवं पुलिस अधीक्षक, सहरसा को लिखित आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई थी, लेकिन पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गयी. लगातार अनदेखी के बाद कंपनी को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी. न्यायालय का सख्त रुख मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने अभिलेखों का अवलोकन कर पाया कि प्रथम दृष्टया यह एक गंभीर आपराधिक मामला है. न्यायालय ने माना कि अज्ञात व्यक्तियों द्वारा सुनियोजित तरीके से इस घटना को अंजाम दिया गया है. इसके बाद कोर्ट ने सलखुआ थाना को निर्देश दिया कि मामले में तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर विधिसम्मत कार्रवाई शुरू की जाए. साथ ही आदेश की प्रति थाना एवं पुलिस अधीक्षक, सहरसा को भेजने का निर्देश भी दिया गया. इलाके में फिर चर्चा तेज कोर्ट के इस आदेश के बाद पूरे क्षेत्र में मोबाइल टॉवर चोरी की घटना एक बार फिर चर्चा का विषय बन गयी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी चोरी के बावजूद कार्रवाई में हुई देरी गंभीर चिंता का विषय है. अब सभी की निगाहें पुलिस की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं कि आखिर इस बड़े आर्थिक अपराध के पीछे कौन लोग शामिल थे और कब तक उन्हें कानून के दायरे में लाया जायेगा.

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