पहले अनाज, अब आम को निशाना बना रहे बंदर
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :03 Jun 2016 5:31 AM (IST)
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बंदरों के उत्पात से परेशान हैं आम बागान के मालिक बंदर बन रहा व्यवसाय में बाधक बनगांव व पड़डी के लोग ज्यादा हो रहे प्रभावित बंदरों की वजह से व्यवसायियों को लाखों का नुकसान सहरसा नगर : राज्य की जनता प्रत्येक वर्ष कोसी नदी की बाढ़ व सुखाड़ की वजह से अपनी आंखों के सामने […]
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बंदरों के उत्पात से परेशान हैं आम बागान के मालिक
बंदर बन रहा व्यवसाय में बाधक
बनगांव व पड़डी के लोग ज्यादा हो रहे प्रभावित
बंदरों की वजह से व्यवसायियों को लाखों का नुकसान
सहरसा नगर : राज्य की जनता प्रत्येक वर्ष कोसी नदी की बाढ़ व सुखाड़ की वजह से अपनी आंखों के सामने फसल की तबाही होते देखती है. वहीं जिले के बनगांव, पड़़ड़ी सहित आसपास के गांव में किसान साल भर बंदर के उत्पात से परेशान रहते हैं. बंदरों का उत्पाद इस कदर बीते बीस वर्षो से क्षेत्र में किसानी कर रहे लोगों पर कहर बन कर टूट रहा है कि बनगांव के पश्चिमी क्षेत्र में हजारों एकड़ भूमि में लोगों ने फसल से भी तेबा कर ली है.
इधर आम के मौसम में बंदर दिन व रात के समय समूह में पहुंच बगीचे में हमला कर देते हैं. बंदरों द्वारा कच्चे आम को समय से पूर्व दांत कांट कर जमीन पर गिरा दिया जाता है. बंदरों के उत्पात का विरोध करने वाले केयर टेकर को कई बार बंदरों के सीधे हमले का भी शिकार बनना पड़ा है.
सैकड़ों की तादाद में पहुंचते हैं बंदर: बनगांव निवासी पीड़ित रूपेश झा बताते हैं कि बंदर सैकड़ों की तादाद में आम बगान में प्रवेश कर जाते हैं. जिसके बाद आधा घंटे के अंदर पूरे बगान में चालीस से पचास क्विंटल आम को टहनियों में ही दांत काट नुकसान पहुंचा देते हैं. जिसके बाद बंदर का झुंड दूसरे बगीचे में प्रवेश कर जाता है. लोगों ने बताया कि बंदरों के नुकसान पहुंचाये गये आम बारह से चौदह घंटे में संक्रमित हो जाता है. लोगों ने बताया कि फल हो या फूल बंदर हमेशा निशाने पर लेते रहते हैं.
फसल का दुश्मन है बंदर: इन क्षेत्रों में धान व गेहूं की रोपनी के समय किसान बड़ी उम्मीद से बीज बोने का काम करते हैं. लेकिन जैसी ही फसल अंकुरित होने के क्रम में बड़ा होने लगता है. किसानों की बैचेनी बढ़ जाती है. लोग बताते हैं कि बंदरों के आतंक से लोग साल भर खेतों की रखवाली करते हैं. बंदरों को डराने के लिए किसान आतिशबाजी भी करते हैं. लेकिन इसके बावजूद बंदरों की रोजाना बढ़ रही आबादी मानव जाति के आहार पर संकट बन रही है.
गुहार लगाते थक गये ग्रामीण: क्षेत्र में होने वाले पंचायत से लेकर लोकसभा चुनाव तक में ग्रामीण बंदरों से मुक्ति को पहला मुद्दा बनाते आये हैं. चुनाव में वोट मांगने वाले जनप्रतिनिधि भी बंदरों से क्षेत्र के किसानों को मुक्ति दिलाने का आश्वासन देते हैं. अभी तक कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया है. ग्रामीण अभयकांत खां बताते हैं कि क्षेत्र के सांसद रह चुके शरद यादव से लेकर सीएम नीतीश कुमार को हमलोगों ने सेवा यात्रा में मिलकर समस्या से अवगत कराया था. फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की गयी है. ग्रामीण बताते हैं कि मजबूरी में लोग गुलैत व लाठी से बंदरों को डराते हैं. लेकिन अचानक होने वाले आक्रमण में स्वयं की प्राणरक्षा करने की फिराक में लग जाते हैं.
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