बिना रीडिंग भेजा जाता है बिल

Published at :09 Jan 2014 2:04 AM (IST)
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बिना रीडिंग भेजा जाता है बिल

कार्यपालक अभियंता की कार्यशैली की सभी ने की शिकायत उपभोक्ताओं ने शिकायतों का लगाया अंबार आयोग के चेयरमैन ने माना जायज थी शिकायत सहरसा: बुधवार को स्थानीय समाहरणालय स्थित सभागार में बिजली उपभोक्ताओं के साथ बिहार राज्य विद्युत विनियामक आयोग की बैठक के दौरान विभाग की कार्यशैली पर उठाये गये प्रश्नचिह्न् पर बैठक हंगामेदार रही. […]

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कार्यपालक अभियंता की कार्यशैली की सभी ने की शिकायत

उपभोक्ताओं ने शिकायतों का लगाया अंबार

आयोग के चेयरमैन ने माना जायज थी शिकायत

सहरसा: बुधवार को स्थानीय समाहरणालय स्थित सभागार में बिजली उपभोक्ताओं के साथ बिहार राज्य विद्युत विनियामक आयोग की बैठक के दौरान विभाग की कार्यशैली पर उठाये गये प्रश्नचिह्न् पर बैठक हंगामेदार रही. आयोग के चेयरमैन यूएन पंजियार व बीआरसी एससी झा की मौजूदगी में हुई सुनवाई के दौरान जिले के विभिन्न क्षेत्र से पहुंचे उपभोक्ताओं ने विद्युत विभाग के अधिकारियों की कारगुजारी की शिकायत करते हुए कई आरोप लगाये. जिला विद्युत उपभोक्ता संघ के अध्यक्ष कुमार हीरा प्रभाकर ने उपभोक्ताओं से जुड़े कई सवालों को उठाते हुए स्थानीय विभाग के अधिकारियों को कठघरे में ला खड़ा कर दिया. उन्होंने कहा कि बिना मीटर रीडिंग के ही उपभोक्ताओं को विभाग द्वारा अनाप-शनाप बिल भेज दिया जाता है. वहीं मीटर लगाने वाली एजेंसी द्वारा अभी भी कई उपभोक्ताओं के घर में मीटर लगाने का काम पूरा नहीं किया गया है. विभाग के अधिकारी ऐसे उपभोक्ताओं के घर चेकिंग करने के लिए पहुंचते हैं, तो उल्टे उपभोक्ताओं को ही दोषी करार देते मनमाने तरीके से उन पर फाइन कर मोटी रकम वसूल की जाती है. विभाग द्वारा कई उपभोक्ताओं को एक-एक महीने के बिल के एवज में तीन-तीन लाख रुपया तक का बिल भेज दिया जाता है. जब उपभोक्ता इसकी शिकायत के लिए विभागीय अधिकारी के पास आवेदन लेकर जाते हैं, तो उनकी शिकायत का निराकरण करने वाला कोई भी अधिकारी नहीं होता है. कई उपभोक्ताओं ने कार्यपालक अभियंता पर तानाशाही रवैये का आरोप लगाते चेकिंग के दौरान नियमों का पाठ पढ़ाते सही उपभोक्ताओं को भी तंग तबाह कर मनमाने तरीके से फाइन लगा मोटी रकम वसूलने व मानसिक प्रताड़ना का भी आरोप लगाया.

अधिकारी भी रह गये दंग

विद्युत उपभोक्ता पूर्व प्रमुख शंभु नाथ झा ने आयोग के चेयरमैन को विभाग की कारगुजारी सुनाते कहा कि एक तरफ विभाग उपभोक्ताओं को बिजली बिल वसूली के नाम पर तंग करने का काम कर रही है. वही गली-मुहल्ले व सड़क के किनारे जजर्र तार व पोल को बदलने के लिए उनका जरा सा भी ध्यान नहीं जा रहा है. उन्होंने कहा कि अभी भी कई गली-मुहल्ले के उपभोक्ताओं को बांस बल्ले के सहारे ही विद्युत आपूर्ति मुहैया करायी जा रही है. कायस्थ टोला की उपभोक्ता अहिल्या देवी ने कहा कि 18 जून 2008 को विद्युत कनेक्शन के लिए चार सौ रुपये की रसीद कटवा कर आवेदन दिया गया था, लेकिन अभी तक उनके यहां विद्युत कनेक्शन बहाल नहीं किया जा सका है.

सिहौल निवासी श्याम सुंदर मिश्र ने कहा कि वर्ष 2011 के जुलाई में कनेक्शन लिया गया और दो महीने के बाद ही सितंबर में एक मुश्त विभाग द्वारा नौ हजार का बिल भेज दिया गया. इसके सुधार के लिए आज तक वे चक्कर काट रहे हैं. बरियाही निवासी अजरुन गोस्वामी ने कहा कि उनके पिता के नाम से विद्युत कनेक्शन लिया गया था. 23 वर्ष पूर्व विद्युत कनेक्शन विच्छेद होने के बावजूद उसे 45 हजार रुपये का बिल भेज दिया गया. सरोनी के भुवनेश्वर यादव ने कहा कि छह दिसंबर 2013 को उनके द्वारा बिजली कनेक्शन लिया गया और 19 दिसंबर को उन पर एफआइआर दर्ज कर फाइन ठोक दिया गया. उपभोक्ताओं की शिकायत सुनने के बाद चेयरमैन ने कई उपभोक्ताओं की बिल सुधार व अन्य शिकायतों को जायज माना. उन्होंने कहा कि यदि जिला स्तर के अधिकारी बिल सुधार को लेकर कोई सुनवाई नहीं करते हैं, तो वे विद्युत उपभोक्ता फोरम पूर्णिया या मुजफ्फरपुर में लिखित आवेदन दे. सहरसा में भी उनके द्वारा जल्द उपभोक्ता फोरम कार्यालय खोलने के सुझाव पर विचार किया जायेगा.

बैठक में आयोग के डिप्टी सचिव लक्ष्मण भगत, कंस्लटेंट भोमिक दास, अधीक्षण अभियंता बलराम सिंह, कार्यपालक अभियंता दिलीप कुमार, सहायक अभियंता विवेकानंद सहित अन्य विभाग के कई अधिकारी मौजूद थे.

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