दफन हो रहा लोगों का सपना

सहरसा नगर : कुसहा त्रासदी के समय बाढ़ पीड़ित लोगों को आश्रय देने के लिए शहर के लोगों ने घरों के दरवाजे भी खोल दिये थे. इसी क्रम में कुछ लोगों ने सरकारी मकानों में भी आश्रय लिया था. समय के साथ जख्म मिटते गये व लोग भी परिवार सहित स्थायी ठिकाने की तरफ कूच […]
सहरसा नगर : कुसहा त्रासदी के समय बाढ़ पीड़ित लोगों को आश्रय देने के लिए शहर के लोगों ने घरों के दरवाजे भी खोल दिये थे. इसी क्रम में कुछ लोगों ने सरकारी मकानों में भी आश्रय लिया था. समय के साथ जख्म मिटते गये व लोग भी परिवार सहित स्थायी ठिकाने की तरफ कूच करने लगे. इसके बावजूद सुपर बाजार स्थित लोक बाजार में तात्कालिक ठहराव को आये कुछ मेहमान सदा के लिए बस ही गये है.
ठहराव ऐसा कि जिन खटालों में दुकानदारों का सामान रखा जाता था वहां भूसा का बोरा नजर आने लगा. अब भूसा बिक्री के प्रमुख स्थल के रूप में सुपर बाजार का यह हिस्सा पहचान बनाने लगा है. शहर में कई बार अतिक्रमण हटाने की कवायद भी हुई, लेकिन भूसे के ढ़ेर में कंपन भी नहीं कर सकी. नतीजतन जिले के बेरोजगारों का सपना तिनके की तरह भविष्य की गोद में उड़ने को विवश है.
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