किसान बिचौलिये के हाथ औने-पौने दाम में धान बेचने को मजबूर

Published at :31 Dec 2015 7:14 PM (IST)
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किसान बिचौलिये के हाथ औने-पौने दाम में धान बेचने को मजबूर

किसान बिचौलिये के हाथ औने-पौने दाम में धान बेचने को मजबूर प्रतिनिधि, सोनवर्षा राजक्षेत्र के धान उत्पादक किसान धान को बेचने के सरकारी घोषणाओं के चक्कर में फंसे बेबस नजर आ रहे हैं. सूबे की सरकार के घोषणा के बावजूद क्षेत्र के पैक्स केंद्रों द्वारा अब तक धान की खरीद प्रारंभ नहीं की जा सकी […]

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किसान बिचौलिये के हाथ औने-पौने दाम में धान बेचने को मजबूर प्रतिनिधि, सोनवर्षा राजक्षेत्र के धान उत्पादक किसान धान को बेचने के सरकारी घोषणाओं के चक्कर में फंसे बेबस नजर आ रहे हैं. सूबे की सरकार के घोषणा के बावजूद क्षेत्र के पैक्स केंद्रों द्वारा अब तक धान की खरीद प्रारंभ नहीं की जा सकी है. नतीजतन क्षेत्र के किसान बिचौलिये के हाथ औने-पौने दाम में धान को बेचने को विवश हैं. क्षेत्र में इस वर्ष धान की खरीद का लक्ष्य 4400 मैट्रिक टन रखा गया है, लेकिन पूरा दिसंबर गुजर जाने के बावजूद पैक्सों में एक छटांक धान भी किसानों का नहीं खरीदा है. सूबे की सरकार ने किसानों को साधारण धान के लिए प्रति क्विंटल 1410 रुपये तथा ए-ग्रेड के धान के लिए 1450 रुपये प्रति क्विंटल की घोषणा सूबे की सरकार द्वारा की गयी है, लेकिन सरकार द्वारा अब तक धान की खरीद प्रारंभ नहीं किये जाने से किसान द्वारा खुले बाजार में नौ सौ से एक हजार प्रति क्विंटल की दर से धान बेचा जा रहा है. खुले बाजार में धान बेचने से किसानों को औसत 500 रुपये क्विंटल का घाटा हो रहा है. किसानों को रबी फसल लगाने के लिए हर हाल में धान बेचकर पूंजी की व्यवस्था करना मजबूरी है. स्थिति के आकलन से तो ये स्पष्ट पता चलता है कि क्षेत्र के 70 प्रतिशत से ज्यादा किसान धान व्यापारियों के हाथ बेच चुके हैं. ऐसे में सरकार द्वारा धान खरीद का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए पैक्सों द्वारा व्यापारियों का ही धान खरीदा जाय तो आश्चर्य की बात नहीं होगी. कहते हैं प्रखंड सहकारिता पदाधिकारीपैक्स केंद्रों द्वारा अब तक धान की खरीद प्रारंभ नहीं किये जाने के बाबत सोनवर्षा के बीसीओ रंजन कुमार ने बताया कि धान खरीद से पूर्व एसएफसी, बैंक, पैक्स व मिलर से एक अनुबंध किया जाना था, जो अब तक नहीं हो पाया है. वहीं धान की नमी का मानक सरकार ने 17 प्रतिशत तय कर रखा है. जबकि क्षेत्र के धान की नमी अभी 20 प्रतिशत के करीब आ रहा है. इस वजह से धान खरीद में विलंब हो रही है. उम्मीद है जनवरी माह के प्रथम हफ्ते में धान की खरीद प्रारंभ हो जायेगी. –लक्ष्य प्राप्ति पर रखनी होगी नजर सरकार अपने हिसाब से जब धान की खरीद प्रारंभ करे, लेकिन असल बात तो यह है कि जब किसानों के पास बेचने के लिए धान बचेगा ही नहीं तो क्षेत्र का धान खरीद का लक्ष्य पूरा करने के लिए धान कहां से आयेगा. अगर लक्ष्य की पूर्ति हो जाती है तो जाहिर है वह धान न तो किसानों का होगा और न ही किसानों के हित की घोषणा सरजमीं पर उतरेगी.

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